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मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा तथा मार्गदर्शन में 2003 से शुरू हुई वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट से गुजरात ग्लोबल इंडस्ट्रियल मैप पर अग्रसर बना है। इतना ही नहीं गुजरात ने विश्वभर के उद्योगों-निवेशकों के लिए गेट-वे टु द फ्यूचर की विशेष पहचान स्थापित की है। मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में कहा कि हमें प्रधानमंत्री के दिशादर्शन में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के आयोजन से गुजरात की इमेज को ‘वोकल फॉर लोकल’ से और अधिक उजागर करने तथा विकास का लाभ राज्य के हर कोने में पहुंचाने की नई पहल करनी है।

पटेल गुरुवार को इस वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के लॉन्चिंग कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उद्योग मंत्री बलवंतसिंह राजपूत तथा कृषि मंत्री राघवजी पटेल और राज्य मंत्री भीखूसिंह परमार की प्रेरक उपस्थिति में कॉन्फ्रेंस के लोगो, वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन की लॉन्चिंग भी की। राज्य के हर प्रदेश की औद्योगिक-आर्थिक स्ट्रेंथ तथा निवेशों की सज्जता का प्लेटफॉर्म बनने वाली इस वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस की प्रथम कॉन्फ्रेंस आगामी 9 तथा 10 अक्टूबर को मेहसाणा में आयोजित होने वाली है। इसके बाद सौराष्ट्र, मध्य गुजरात तथा दक्षिण गुजरात क्षेत्रों में ऐसी रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित होंगी।

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वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात के हर प्रदेश की विशिष्ट प्रोडक्ट तथा पहचान है और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) की विशेष स्ट्रेंथ भी है। कुछ जिलों में तो ऐसा पोटेंशियल है कि उनमें देश के अन्य राज्यों से भी अनेक गुना अधिक इंडस्ट्रियल आउटपुट और प्रोडक्शन है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात कृषि, मत्स्योद्योग, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल-पेट्रोकेमिकल, जेम्स-ज्वैलरी, इंजीनियरिंग, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे परंपरागत क्षेत्रों में हमेशा अग्रसर रहा है। प्रधानमंत्री के दिशादर्शन में अब गुजरात को नए उभरते तथा फ्यूचरिस्टिक सेक्टर्स सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एयरोस्पेस, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी में आत्मनिर्भरता के साथ लीडर बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्पष्ट संकल्प है कि हमें ऐसा राष्ट्र-राज्य बनाना है; जहां टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप, रिसर्च, प्रोडक्शन; हर क्षेत्र में स्वदेशी की प्राथमिकता हो। स्वदेशी तथा आत्मनिर्भरता को प्रमोट करने के लिए प्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल तथा लोकल फॉर ग्लोबल का मंत्र दिया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस इस मंत्र को साकार करेगी। उन्होंने कहा कि गुजरात में जो उद्योग आएं, वे उन जिलों में स्थापित हों, जहां औद्योगिक विकास की विशेषताएं हैं। इस दिशा में प्रयास में यह रीजनल कॉन्फ्रेंस परिणामदायी बनेगी।

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इतना ही नहीं; क्वालिटी प्रोडक्ट से उस जिले की ब्रैंड इमेज बनेगी और विकास का सच्चा लाभ राज्य के हर कोने में पहुँचने से ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का ध्येय पूरा होगा।

औद्योगिक विकास का बैक बोन बनेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट समिट से प्रधानमंत्री ने मंशा रखी थी कि राज्य के उद्योग और अर्थव्यवस्था विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें। यह मंशा इस समिट की उत्तरोत्तर सफलता से पूरी हो रही है और गुजरात आज विश्व के अनेक बड़े औद्योगिक घरानों का केन्द्र और हब बना है। बड़े उद्योगों के आने से उनके अनुरूप छोटे उद्योग तथा एमएसएमई विकसित हुए हैं और एमएसएमई तो राज्य के औद्योगिक विकास का बैक बोन बने हैं।

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उन्होंने जोड़ा कि वाइब्रेंट समिट के चलते जो उद्योग व निवेश गुजरात में आएं, उन्हें जमीन मिलने से लेकर उद्योग शुरू होने तक की जरूरी अनुमतियां तथा व्यवस्थाएं भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से राज्य सरकार ने सरल बनाई हैं। अनेक रिफॉर्म्स तथा 20 से अधिक पॉलिसीज द्वारा गुजरात पॉलिसी ड्रिवन तथा प्रो-एक्टिव गवर्नेंस स्टेट बना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस की यह नूतन पहल राज्य के उद्योगों को प्रधानमंत्री के विकसित भारत@2047 के विजन को आत्मनिर्भर भारत तथा वोकल फॉर लोकल एवं लोकल फॉर ग्लोबल का दिशादर्शन कराने का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बनेगी।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने कहा कि गुजरात में आयोजित गत वाइब्रेंट समिट में 45 हजार करोड़ रुपए का निवेश आया और 2600 से अधिक एमओयू हुए। इस सफल आयोजन के हिस्से के रूप में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में हर जिले व तहसील तथा गुजरात के सुदूरवर्ती व्यक्ति को वाइब्रेंट गुजरात के साथ जोड़ने के लिए पुनः एक बार वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया है।

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2003 में हुई थी वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत

राजपूत ने जोड़ा कि गुजरात में तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2003 में वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत की थी। उस समय राज्य का उत्पादन 1,42,000 करोड़ रुपए का था, जो आज बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक का हुआ है। साल 2003 की तुलना में प्रतिव्यक्ति आय 18,392 रुपए से बढ़कर 2,73,000 रुपए हुई है। उत्पादन 44 हजार करोड़ रुपए था, जो 6.30 लाख करोड़ रुपए यानी 15 गुना बढ़ा है। इतना ही नहीं; मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट भी 1,48,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 21 लाख 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक का हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट गुजरात समिट के कारण गुजरात राज्य में छोटे उद्योगकारों की संख्या में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में छोटे उद्योगकारों की संख्या केवल डेढ़ लाख थी, जो आज बढ़कर 21 लाख से भी अधिक है। इतना ही नहीं; वर्ष 2003 से 2025 तक 5.50 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश गुजरात में आया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में 10वीं वाइब्रेंट समिट में 140 से अधिक देशों के लोगों ने भाग लिया।

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98 हजार से अधिक लोगों ने एमओयू किए तथा 45 हजार से अधिक लोगों ने गुजरात में पूजी निवेश करने का निश्चय किया। इसके साथ ही 81 लाख रोजगार का सृजन हो; इस प्रकार की व्यवस्था गुजरात में हुई, जिसके कारण गुजरात का विकास दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है।

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस

उद्योग विभाग की प्रधान सचिव ममता वर्मा ने वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस की पृष्ठभूमि दी। उद्योग आयुक्त पी. स्वरूप ने आगामी समय में आयोजित होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास की गति को वेग देना, रोजगार के अवसर सृजित करना और हर प्रदेश की विशिष्ट पहचान को उजागर करना है। ये सम्मेलन राज्य के चार मुख्य क्षेत्रीय केन्द्रों में आयोजित होंगे। इनमें उत्तर गुजरात के लिए मेहसाणा (9-10 अक्टूबर, 2025), कच्छ व सौराष्ट्र के लिए राजकोट (8-9 जनवरी, 2026), दक्षिण गुजरात के लिए सूरत (9-10 अप्रैल, 2026) तथा मध्य गुजरात के लिए वडोदरा (10-11 जून, 2026) शामिल हैं।

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स्वरूप ने आगे कहा कि इन सम्मेलनों द्वारा लोगों, उद्यमियों, युवाओं तथा स्थानीय नेतृत्व को एक मंच पर लाकर उनकी आकांक्षाओं को शासन की नीतियों से जोड़ने का प्रयास होगा। इसके अतिरिक्त; ये सम्मेलन परंपरागत क्षेत्रों के उपरांत मूल्यवर्धित फसल उत्पादन तथा ग्रीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एमकेदास, खान विभाग के आयुक्त धवल पटेल, जीआईडीसी की प्रबंध निदेशक प्रवीणा डीके, इंडेक्स्ट-बी के प्रबंध निदेशक केयुर सी. संपत समेत बड़ी संख्या में औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि, पदाधिकारी-अधिकारी आदि मौजूद रहे।

First published on: Aug 28, 2025 09:01 PM

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