भारत में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली इस अहम बैठक में सदस्य देशों के शीर्ष नेता वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे. सम्मेलन के आधिकारिक कार्यक्रम में औपचारिक बैठकों के अलावा एक खास आयोजन भी शामिल है, जिसे BRICS Gala Dinner कहा जाता है. यह सिर्फ नेताओं के लिए आयोजित होने वाला रात्रिभोज नहीं, बल्कि कूटनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जाता है.
क्या होता है BRICS Gala Dinner?
BRICS गाला डिनर की मेजबानी आमतौर पर उस देश की ओर से की जाती है, जो उस साल संगठन की अध्यक्षता कर रहा होता है. इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रमुख प्रतिनिधियों को औपचारिक रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया जाता है. भारत की अध्यक्षता में इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेताओं के लिए डिनर आयोजित किया जाएगा. सम्मेलन के पहले दिन के कार्यक्रमों के बाद यह आयोजन भारत मंडपम में होगा.
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गाला डिनर का मकसद केवल मेहमानों का स्वागत करना नहीं होता. दिनभर चलने वाली औपचारिक बैठकों के बाद इस गाला डिनर के दौरान नेता एक-दूसरे के साथ बातचीत कर सकते हैं. ऐसे मौकों पर व्यक्तिगत संवाद और अनौपचारिक चर्चा के जरिए देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की कोशिश होती है.
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रूस ने की थी इस परंपरा की शुरुआत
BRICS गाला डिनर की परंपरा का इतिहास संगठन के पहले आधिकारिक शिखर सम्मेलन से जुड़ा हुआ है. साल 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित पहले BRIC शिखर सम्मेलन के दौरान मेजबान देश ने नेताओं के लिए औपचारिक रात्रिभोज का आयोजन किया था. जिसके बाद हर साल यह आयोजन BRICS सम्मेलन का एक अहम हिस्सा बन गया.
डिनर में क्या होता है?
गाला डिनर के जरिए मेजबान देश अपनी संस्कृति और खान-पान की झलक भी दुनिया के सामने रखता है. मेन्यू में स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों को जगह दी जाती है. इसके अलावा संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए मेजबान देश की विरासत को प्रदर्शित किया जाता है.
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कैसे बनी ये परंपरा?
ब्रिक्स में 2009 के बाद लगातार बदलाव हुए हैं. शुरुआत में यह समूह ब्रिक (BRIC) के नाम से जाना जाता था, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे. 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद समूह का नाम ब्रिक्स (BRICS) हो गया. दक्षिण अफ्रीका की सदस्यता ने संगठन की गतिविधियों में अफ्रीकी दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विविधता को भी जगह दी. इसके बाद ब्रिक्स का विस्तार जारी रहा और इसमें नए देशों के शामिल होने से इसकी भौगोलिक और राजनीतिक पहुंच और व्यापक हुई. मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देशों के जुड़ने से शिखर सम्मेलनों में प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ा है.
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कूटनीति के लिए क्यों अहम है गाला डिनर?
गाला डिनर केवल नेताओं के लिए आयोजित एक औपचारिक रात्रिभोज नहीं होता, बल्कि यह कूटनीति के अनौपचारिक पहलू को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम भी माना जाता है. मेजबान देश भोजन, संगीत, कला और अपनी पारंपरिक मेहमाननवाजी के जरिए दुनिया के सामने अपनी संस्कृति और सोच की झलक पेश करता है. इस तरह ऐसे आयोजन किसी देश की सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने का अवसर भी बन जाते हैं. इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यहां नेता औपचारिक बैठकों के मुकाबले ज्यादा सहज माहौल में एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं. जहां कैमरों और आधिकारिक एजेंडे के बीच संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा करना मुश्किल हो सकता है, वहीं अनौपचारिक मुलाकातें नेताओं को एक-दूसरे के नजरिए और चिंताओं को बेहतर ढंग से समझने का मौका देती हैं.
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