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दिल्ली में पानी की किल्लत ने बढ़ाई टेंशन, एक वाटर टैंक के लिए हफ्तेभर का इंतजार, रोजगार पर पड़ रहा असर

Delhi Water Crisis: दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को लगातार पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में इसका असर स्थानीय निवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी और रोजगार पर पड़ रहा है.

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Water Crisis In Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते तापमान के बीच पटेल नगर विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत है. इस संकट की वजह से लोग पानी के टैंकरों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं और कई लोगों को अपने घर के लिए जरूरी पानी पाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है. बलजीत नगर, नेहरू नगर, गुलशन चौक, होली चौक और पंजाबी बस्ती जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. स्थानीय लोगों के मुता, इन इलाकों के कई हिस्सों में पानी की पाइपलाइन तो बिछा दी गई हैं, लेकिन कई घरों तक पानी की रेगुलर सप्लाई नहीं पहुंचती है.

हर दिन का संघर्ष

कई परिवारों के लिए पीने का पानी हासिल करना रोजाना की जद्दोजहद बन गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि टैंकर सेवाएँ अनियमित हैं और अक्सर कई दिनों के बाद ही आती हैं. जब भी कोई टैंकर इलाके में पहुँचता है, तो भारी भीड़ जमा हो जाती है, जिससे लंबी लाइनें लग जाती हैं और पानी भरने की कोशिश में लोगों के बीच कभी-कभी झगड़े भी हो जाते हैं.

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कई साल से संकट बरकरार

निवासी इस समस्या को एक ऐसी पुरानी परेशानी बताते हैं जो सालों से हल नहीं हुई है. कई लोगों का तर्क है कि हफ़्ते में सिर्फ़ एक बार टैंकर मिलना काफ़ी नहीं है, खासकर गर्मी के मौसम में जब पानी की खपत काफी बढ़ जाती है. पानी की कमी से मजदूर वर्ग के परिवारों और दूसरे राज्यों से आकर बसे परिवारों के लिए आर्थिक मुश्किलें भी पैदा हो रही हैं. कई निवासियों का कहना है कि जब भी टैंकर आते हैं, तो उन्हें काम छोड़ना पड़ता है क्योंकि पानी इकट्ठा करना उनकी सबसे बड़ी प्रायोरिटी बन जाती है.

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बढ़ गया आर्थिक बोझ

एनआई के मुताबिक पुष्पा नाम की एक निवासी, जो हाल ही में बेहतर मौकों की तलाश में अपने पति के साथ दिल्ली आई थीं, उन्होंने बताया कि इस हालात ने परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है. उन्होंने बताया कि पानी इकट्ठा करने में घंटों बिताने के कारण अक्सर उनकी दिहाड़ी का नुकसान हो जाता है. जब टैंकर से पानी मिलने में देरी होती है या पानी कम मिलता है, तो उनके पास प्राइवेट वेंडर से पानी खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं बचता, जिससे उनके महीने का खर्च और बढ़ जाता है.

First published on: Jun 18, 2026 03:29 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वो नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वो नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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