Pragati Maidan Underpass Work Resumes: दिल्ली वालों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है, उन्हें अब रोज-रोज के जाम से आराम मिलने वाला है. जानकारी के अनुसार, 3 साल से अटके हुए अंडरपास नंबर 5, जो प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का आखिरी अंडरपास है, उसका का काम फिर से शुरू हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूरी और डिजाइन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से यह काम पिछले तीन सालों से रुका हुआ था, वह अब जल्दी पूरा हो जाएगा.
यह भी पढ़ें: दिल्ली- NCR वालों के लिए लाइफलाइन बनी Namo Bharat, 3 करोड़ यात्रियों ने जताया
कब चालू होगा प्रगति मैदान का ये अंडरपास
अंडरपास को लेकर अधिकारियों ने बताया कि बॉक्स-पुशिंग का काम पूरा हो चुका है, और अब स्टिचिंग का काम शुरू हो गया है. अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में तेजी तब आई, जब रेलवे ने निर्माण ने कास्ट-इन-सीटू योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी. इस मंजूरी के मिलने के बाद काम में तेजी आई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 'बॉक्स-पुशिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, और अब बाकी बचा निर्माण कार्य शुरू हो गया है. जिसके बाद उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अगले फरवरी 2027 तक पूरा हो जाएगा.
क्यों अधूरा रह गया था प्रोजेक्ट?
प्रगति मैदान के मुख्य टनल और पांच अंडरपास का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जून 2022 में ही कर दिया गया था, लेकिन भैरों मार्ग पर स्थित अंडरपास नंबर 5 का काम जून 2023 से ठप पड़ा था. इस देरी की सबसे बड़ी वजह इंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियां थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, निर्माण के दौरान रेलवे ओवरब्रिज के नीचे धकेले जा रहे दो कंक्रीट बॉक्स अपनी जगह से खिसक गए और धंस गए थे. इसके अलावा, यमुना नदी के करीब होने के कारण यहां ग्राउंडवाटर लेवल काफी ज्यादा है और ऊपर से गुजरती तीन एक्टिव रेलवे लाइनों ने इस काम को और भी जोखिम भरा बना दिया था, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ रहा था.
अब छोटी गाड़ियों के लिए ही खुलेगा रास्ता
सालों के इंतजार के बाद अब इस प्रोजेक्ट को एक संशोधित योजना (Revised Plan) के साथ फिर से शुरू किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, बिना रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाए काम पूरा करने का यही एकमात्र तकनीकी रास्ता बचा था, जिसे अब इस्तेमाल किया जा रहा है. नए डिजाइन के तहत अंडरपास की ऊंचाई को 5.5 मीटर से घटाकर 3.9 मीटर और चौड़ाई को 11.5 मीटर से 6.25 मीटर कर दिया गया है. इसका मतलब है कि भविष्य में इस अंडरपास का इस्तेमाल मुख्य रूप से कारों और छोटी गाड़ियों के लिए ही किया जा सकेगा, ताकि रेलवे ट्रैफिक में कोई बाधा न आए.
रिंग रोड से सीधे जुड़ जाएगा प्रगति मैदान
इसके साथ ही रोड इंटीग्रेशन, ड्रेनेज सिस्टम और रिटेनिंग वॉल जैसे सहायक काम भी चरणों में पूरे किए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य रिंग रोड और प्रगति मैदान के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है और शहर के जाम को कम करना है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो फरवरी 2027 तक यह अंडरपास पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जिससे भारत मंडपम और मध्य दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी.
यह भी पढ़ें: दिल्ली ट्रैफिक की स्पीड… लंदन और न्यूयॉर्क से बेहतर, स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
Pragati Maidan Underpass Work Resumes: दिल्ली वालों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है, उन्हें अब रोज-रोज के जाम से आराम मिलने वाला है. जानकारी के अनुसार, 3 साल से अटके हुए अंडरपास नंबर 5, जो प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का आखिरी अंडरपास है, उसका का काम फिर से शुरू हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूरी और डिजाइन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से यह काम पिछले तीन सालों से रुका हुआ था, वह अब जल्दी पूरा हो जाएगा.
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कब चालू होगा प्रगति मैदान का ये अंडरपास
अंडरपास को लेकर अधिकारियों ने बताया कि बॉक्स-पुशिंग का काम पूरा हो चुका है, और अब स्टिचिंग का काम शुरू हो गया है. अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में तेजी तब आई, जब रेलवे ने निर्माण ने कास्ट-इन-सीटू योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी. इस मंजूरी के मिलने के बाद काम में तेजी आई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बॉक्स-पुशिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, और अब बाकी बचा निर्माण कार्य शुरू हो गया है. जिसके बाद उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अगले फरवरी 2027 तक पूरा हो जाएगा.
क्यों अधूरा रह गया था प्रोजेक्ट?
प्रगति मैदान के मुख्य टनल और पांच अंडरपास का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जून 2022 में ही कर दिया गया था, लेकिन भैरों मार्ग पर स्थित अंडरपास नंबर 5 का काम जून 2023 से ठप पड़ा था. इस देरी की सबसे बड़ी वजह इंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियां थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, निर्माण के दौरान रेलवे ओवरब्रिज के नीचे धकेले जा रहे दो कंक्रीट बॉक्स अपनी जगह से खिसक गए और धंस गए थे. इसके अलावा, यमुना नदी के करीब होने के कारण यहां ग्राउंडवाटर लेवल काफी ज्यादा है और ऊपर से गुजरती तीन एक्टिव रेलवे लाइनों ने इस काम को और भी जोखिम भरा बना दिया था, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ रहा था.
अब छोटी गाड़ियों के लिए ही खुलेगा रास्ता
सालों के इंतजार के बाद अब इस प्रोजेक्ट को एक संशोधित योजना (Revised Plan) के साथ फिर से शुरू किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, बिना रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाए काम पूरा करने का यही एकमात्र तकनीकी रास्ता बचा था, जिसे अब इस्तेमाल किया जा रहा है. नए डिजाइन के तहत अंडरपास की ऊंचाई को 5.5 मीटर से घटाकर 3.9 मीटर और चौड़ाई को 11.5 मीटर से 6.25 मीटर कर दिया गया है. इसका मतलब है कि भविष्य में इस अंडरपास का इस्तेमाल मुख्य रूप से कारों और छोटी गाड़ियों के लिए ही किया जा सकेगा, ताकि रेलवे ट्रैफिक में कोई बाधा न आए.
रिंग रोड से सीधे जुड़ जाएगा प्रगति मैदान
इसके साथ ही रोड इंटीग्रेशन, ड्रेनेज सिस्टम और रिटेनिंग वॉल जैसे सहायक काम भी चरणों में पूरे किए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य रिंग रोड और प्रगति मैदान के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है और शहर के जाम को कम करना है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो फरवरी 2027 तक यह अंडरपास पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जिससे भारत मंडपम और मध्य दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी.
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