दिल्ली लन्दन और न्यूयॉर्क से तेज भागती है. आप ये सुनकर हैरान जरूर होंगे लेकिन एक स्टडी को माने तो ये सच है. भले ही दिल्ली में सड़कों पर चल रहे लोगों को ये लगे कि उनकी जिंदगी के कई घंटे ट्रैफिक जाम से जूझते हुए निकल जाते है. लेकिन स्टडी के मुताबिक हम राजधानी के हालात अमेरिका और ब्रिटेन के सबसे बड़े शहर और राजधानी के मुकाबले थोड़े बेहतर है. स्टडी कहती है कि लन्दन की सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की एवरेज स्पीड 16.5 किलोमीटर प्रति घंटा है. जबकि न्यूयॉर्क की एवरेज रफ्तार 19 किलोमीटर प्रति घंटा है. इनके मुकाबले अगर देश की राजधानी दिल्ली की बात की जाए तो यहां चलने वाली गाड़ियों की एवरेज रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटा है. अगर दुनिया के बड़े देशों की बात करें तो हमारी दिल्ली नम्बर 2 पर आती है. हमसे आगे ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न है जहां गाड़ियों की रफ्तार साढ़े 26 किलोमीटर है.
इसी तरह हमें भले ही लगता हो कि हमारे हर दिन के कई घंटे सड़कों पर ट्रैफिक जाम में फंसने से बर्बाद हो जाते है. तो ये बात बिल्कुल सही है अगर पूरे साल भर की बात करें तो करीब 104 घंटे दिल्ली वाले के ट्रैफिक में बर्बाद होते है. इसको अगर दिनों में बदला जाए तो करीब साढ़े 4 दिन साल भर में हर दिल्ली वासी सड़कों पर लड़ी लाल बत्तियों या फिर रेंगती हुई गाड़ियों में बर्बाद कर देता है. ये भी कोई छोटा आंकड़ा नहीं है. लेकिन लन्दन और न्यू यॉर्क जैसे शहरों से बेहतर जरूर है.
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स्टडी कहती है कि न्यू यॉर्क में सड़कों पर फसने वाले हर वर्ष अपने 125 घंटे तो वही लन्दन जैसे हाईटेक और आधुनिक शहर के ट्रैफिक में फंसने वाले अपने साल भर के 168 घंटे बर्बाद कर देते है. इनके मुकाबले तो अपनी दिल्ली थोड़ी बेहतर लगती है. भारत के अन्य मेट्रोपॉलिटन सिटी की बात करें तब भी दिल्ली बेहतर नजर आती है. राजधानी दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और हैदराबाद से बेहतर है ट्रैफिक को लेकर. जहां मुंबई की सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की एवरेज रफ्तार 20.8 है तो वही बंगलौर की स्थिति तो लन्दन जैसी है. बैंगलोर की सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां हर घंटे सिर्फ 16.6 किलोमीटर ही चल पाती है. हालांकि ये अलग बात है कि कुछ महीनों पहले जब ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक जब अपने भारत दौरे पर आए थे तो उन्होंने भी दिल्ली के ट्रैफिक को लेकर कमेंट किया था. वो शायद ये बताना भूल गए कि लन्दन में 15 में में गाड़ी केवल 4 किलोमीटर ही बढ़ पाती है. जबकि इतने समय में दिल्ली साढ़े किलोमीटर का फासला तय कर लेती है.
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