अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से पहले दिल्ली में अर्धसैनिक बलों की सबसे बड़ी तैनाती, चप्पे-चप्पे पर होगी नजर

दिल्ली में होने वाले दो बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बड़े स्तर पर पहुंच गई है. 20 हजार जवान, 500 कमांडो, 1000 विशेष रक्षक और 300 बुलेट प्रूफ वाहनों की तैनाती की गई है. राजधानी के हर हिस्से में अर्धसैनिक बलों की कड़ी निगरानी रहेगी.

Delhi Police

Credit: Social Media

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देश की राजधानी दिल्ली में अगले कुछ दिनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बड़े स्तर पर दिखाई देगी. दो बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने राजधानी में अर्धसैनिक बलों की सबसे बड़ी तैनाती का फैसला किया है. सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 20 हजार जवान, 500 कमांडो, 1000 विशेष रक्षक और 300 बुलेट प्रूफ वाहनों को तैनात किया जाएगा. दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों के जवान और कमांडो नजर आएंगे. विदेशी मेहमानों की सुरक्षा को देखते हुए राजधानी को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सुरक्षा एजेंसियों ने सम्मेलन स्थलों, वीवीआईपी रूट, होटल और एयरपोर्ट के आसपास विशेष निगरानी बढ़ा दी है.

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क्यों लिया ये फैसला?

जानकारी के मुताबिक भारत और अफ्रीकी संघ आयोग के सहयोग से 31 मई को नई दिल्ली में चौथे संस्करण का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. इसके अलावा 1 और 2 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस का शिखर सम्मेलन भी दिल्ली में होगा. इन दोनों आयोजनों में कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों यानी सीएपीएफ को सौंपी गई है. सुरक्षा व्यवस्था में सीआरपीएफ की 70 कंपनियां, बीएसएफ की 55 कंपनियां, एसएसबी की 25 कंपनियां, सीआईएसएफ की 25 कंपनियां और आईटीबीपी की 25 कंपनियां शामिल की गई हैं. यह सभी बल 3 जून तक दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा संभालेंगे.

क्या है तैयारी?

सुरक्षा एजेंसियों ने वीवीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए विशेष रणनीति तैयार की है. ग्रेटर नोएडा स्थित सीआरपीएफ कैंप में लगभग 1000 विशेष रक्षकों को ट्रेनिंग दी गई है. इन जवानों को 50 प्रशिक्षित ट्रेनर्स द्वारा विशेष सुरक्षा अभ्यास कराया गया है. इसके लिए 50 अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं. इसके अलावा 300 बुलेट प्रूफ वाहनों को भी सुरक्षा ड्यूटी में लगाया गया है. ये वाहन विदेशी मेहमानों के काफिले और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा में इस्तेमाल किए जाएंगे. सीआरपीएफ सूत्रों के मुताबिक जिन जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है, वे पहले भी वीआईपी सुरक्षा का हिस्सा रह चुके हैं. इनमें कई जवान एसपीजी और एनएसजी जैसी विशेष सुरक्षा इकाइयों के साथ काम कर चुके हैं. विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के काफिले की सुरक्षा का अनुभव रखने वाले इन जवानों को इस बार भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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