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Delhi Monsoon Update: दिल्ली-NCR में इस बार आधा-अधूरा मानसून क्यों? जानें वैज्ञानिक कारण

Delhi Monsoon Update: दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में मानसून की रफ्तार अचानक क्यों थम गई है? मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि पाकिस्तान से आ रही सूखी गर्म हवाओं और बंगाल की खाड़ी में कमजोर लो प्रेशर सिस्टम की वजह से यह स्थिति बनी है. हालांकि, अब मौसम बदलने वाला है और 10 जुलाई तक पूरे मानसून के सक्रिय होने की उम्मीद जताई गई है.

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Delhi Monsoon Update: दिल्ली-एनसीआर में समेत पूरे उत्तर भारत में जून के आखिरी दिनों में पहुंचने वाला मानसून जुलाई शुरू होने के बाद भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है. झमाझम बारिश न होने से एक तरफ जहां गर्मी और उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ खरीफ की फसलों की बुआई प्रभावित होने से किसान भी बेहद चिंतित हैं. मानसून के कमजोर और अधूरा रहने का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी में मजबूत लो-प्रेशर एरिया का न बनना और उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली पाकिस्तान की सूखी व गर्म हवाएं हैं.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इन गर्म पश्चिमी हवाओं ने मानसून की पूर्वी नम हवाओं को दिल्ली की तरफ बढ़ने से रोक दिया है. इसके परिणामस्वरूप राजधानी में मानसून की शुरुआत तो हुई, लेकिन वह आगे बढ़ने के बजाय ठिठक गया, जिससे दिल्लीवालों को भारी बारिश के बजाय भीषण उमस और चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ रहा है.

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पाकिस्तान की गर्म हवाएं बनाम बंगाल की खाड़ी का लो-प्रेशर सिस्टम

इस बार थार रेगिस्तान और पाकिस्तान के मैदानी इलाकों से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं अत्यधिक सक्रिय हैं. ये हवाएं न सिर्फ गर्म हैं, बल्कि इनमें नमी का स्तर शून्य के बराबर है. जब ये हवाएं दिल्ली के आसमान पर पहुंचती हैं, तो ये बंगाल की खाड़ी से आ रही नम मानसूनी हवाओं को ऊपर उठने और बादल बनाने से रोक देती हैं. इसके अतिरिक्त, इस बार बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवाती सिस्टम मध्य भारत (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में ही कमजोर हो जा रहे हैं, जिससे वे दिल्ली तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंचा पा रहे हैं.

क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी?

मौसम वैज्ञानिकों का विश्लेषण है कि साल 2026 का यह मानसून एक जटिल ट्रांज़िशन फेज से गुजर रहा है. प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ का प्रभाव समाप्त हो चुका है और ‘ला नीना’ सक्रिय हो रहा है. इस बदलाव के दौरान मानसूनी हवाओं का पैटर्न कुछ समय के लिए अस्थिर हो जाता है. यही कारण है कि जहां देश के कुछ हिस्सों में भारी बाढ़ आ रही है, वहीं उत्तर-पश्चिम भारत का मैदानी इलाका (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) सूखे जैसे हालात और हीटवेव जैसी उमस का सामना कर रहा है.

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दिल्ली के किस हिस्से पर मानसून कमजोर होने का ज्यादा असर

कमजोर मानसून का सबसे गंभीर असर मध्य और नजफगढ़ ज़ोन में देखा गया है, जहां औसत से 60% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. इसके विपरीत, स्थानीय बादलों के कारण सफदरजंग और पालम के कुछ सीमित पॉकेट्स में हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई है, लेकिन वह जमीन को ठंडा करने के बजाय हवा में उमस को 85% तक बढ़ा दे रही है, जिससे ‘गल्फ जैसी चिपचिपी गर्मी’ का अहसास हो रहा है.

राहत की खबर: 10 जुलाई तक बदलेगा मौसम

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अब दिल्ली-NCR के आसमान से सूखी हवाएं पीछे धकेली जा चुकी हैं और बंगाल की खाड़ी की नम हवाएं उन्हें रोक रही हैं. खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र तैयार हो रहा है, जिससे मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेज होगी. मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 10 जुलाई तक दिल्ली और आसपास के राज्यों में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, जिससे लोगों को भीषण उमस से राहत मिलेगी और झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा.

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Frequently Asked Questions

दिल्ली में मानसून कमजोर होने की मुख्य वजह पाकिस्तान की ओर से आने वाली गर्म व शुष्क हवाएं हैं, जो बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी नमी को रोक रही हैं. साथ ही मजबूत कम दबाव का क्षेत्र न बनना भी इसकी वजह है.
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, जब तक हवा का रुख बदलकर पूरी तरह से दक्षिण-पूर्वी नहीं हो जाता और बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम नहीं बनता, तब तक भारी बारिश की संभावना कम है. जुलाई के दूसरे सप्ताह में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
जी हाँ. गर्मियों और मानसून के शुरुआती दौर में पाकिस्तान के बलूचिस्तान और थार मरुस्थल की ओर से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान बढ़ा देती हैं और मानसूनी बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती हैं.
First published on: Jul 03, 2026 11:49 AM

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Vijay Jain

विजय जैन भारतीय मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्तमान में न्यूज 24 में सीनियर न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत विजय को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 से अधिक वर्षों का लंबा और समृद्ध अनुभव है. राजनीति, चुनाव, बिजनेस, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसी हर प्रमुख बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले विजय अपनी निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्हें साल 2018 में प्रतिष्ठित 'नेशनल श्रीफल अवार्ड' से सम्मानित किया गया था. डिजिटल दौर में वे ट्रेडिशनल जर्नलिज्म के अनुभवों को न्यू-एज मीडिया और SEO स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर खबरों को नया आयाम दे रहे हैं.

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