Delhi High Court Maintenance Appeal Reject : दिल्ली हाईकोर्ट ने मेंटेनेंस को लेकर बड़ा फैसला दिया है। दिल्ली कोर्ट ने कमा रही एक महिला को भरण-पोषण देने से इनकार किया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला के पक्ष में मेंटेनेंस देने का आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि वह महिला योग्य होने के साथ-साथ नौकरी भी कर रही है ऐसे में उस भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता है।
एक महिला की मेंटेनेंस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि महिला योग्य और नौकरी भी कर रही। उसमें क्षमता है और वह कमाई भी कर रही है। ऐसे में पति द्वारा भरण-पोषण का मामला नहीं बनता है।
दरअसल पहले फैमिली कोर्ट ने पति से अलग हो चुकी महिला के भरण-पोषण की मांग करने वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया था। मामले की सुनवाई को बाद हाईकोर्ट ने महिला की फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि महिला अपनी शादी के समय एम फिल थी। अब वह कंप्यूटर में पेशेवर योग्यता के साथ-साथ पीएचडी है और नौकरी भी कर रही है। जबकि पुरुष (उसका पति) एक साधारण ग्रेजुएट है।
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अलग रह रही महिला ने अपनी याचिका में पति से कोर्ट खर्च के रूप में 55 हजार रुपये और रहने के लिए 35 हजार रुपये प्रति महीने की मांग की थी।
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एक महिला की मेंटेनेंस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि महिला योग्य और नौकरी भी कर रही। उसमें क्षमता है और वह कमाई भी कर रही है। ऐसे में पति द्वारा भरण-पोषण का मामला नहीं बनता है।
दरअसल पहले फैमिली कोर्ट ने पति से अलग हो चुकी महिला के भरण-पोषण की मांग करने वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया था। मामले की सुनवाई को बाद हाईकोर्ट ने महिला की फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि महिला अपनी शादी के समय एम फिल थी। अब वह कंप्यूटर में पेशेवर योग्यता के साथ-साथ पीएचडी है और नौकरी भी कर रही है। जबकि पुरुष (उसका पति) एक साधारण ग्रेजुएट है।
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