दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. मामले को अब दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया गया है. साथ ही अदालत ने CBI कोर्ट के आदेश के संचालन को भी जारी रखा है. दिल्ली हाई कोर्ट में आज सीबीआई (CBI) की उस याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है. सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं.
क्या-क्या हुआ सुनवाई के दौरान
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान आरोपियों से पूछा कि क्या वे जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय चाहते हैं. केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने बताया कि केजरीवाल ने हाईकोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) के जरिए चुनौती दी है. यह आदेश ट्रायल कोर्ट की सीबीआई अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक से संबंधित था.
सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?
सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना आरोपियों का अधिकार है, लेकिन इसे स्थगन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि SLP इसी सप्ताह सूचीबद्ध हो, क्योंकि मामले में गंभीर आपत्तियां हैं और विवादित आदेश रिकॉर्ड पर ज्यादा समय नहीं रहना चाहिए. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साफ कहा, “उन्हें जवाब दाखिल करने दीजिए”. कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह बाद यानी 6 अप्रैल 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया और अपना अंतरिम आदेश जारी रखा.
क्या है पूरा मामला?
कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले के सभी 23 आरोपियों को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया था. इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, के. कविता समेत कई अन्य शामिल थे. ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर कड़ी आलोचना की थी. 9 मार्च को हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर नोटिस जारी किया और ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण बताया था. सीबीआई ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट के उसी आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.










