अंकित शर्मा मर्डर केस में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. शुक्रवार को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने ये फैसला दिया है. कोर्ट ने IB अधिकारी अंकित शर्मा मर्डर केस में सभी आरोपियों को IPC की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सज़ा दी है. दोषियों को दंगा करने, घातक हथियार के साथ दंगा करने, अपहरण और हत्या जैसे अपराधों के लिए भी सज़ा सुनाई गई. कोर्ट ने ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
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कब ठहराए गए थे दोषी?
साल 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी अंकित शर्मा के मर्डर केस में कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं मे दोषी करार दिया था, कोर्ट ने बाकी 6 आरोपियों को रिहा कर दिया था. लंबे वक्त तक चली सुनवाई में गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और बाकी सबूतों के आधार पर कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया था. उनपर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (मर्डर), धारा 363 (किडनैपिंग) और धारा 147 (दंगा) के तहत दोषी माना था.
जज ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?
दरअसल, IB अधिकारी अंकित शर्मा नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी खास में रहते थे. 24 और 25 फरवीर 2020 को जब दिल्ली में दंगे भड़के थे, तब हालात काफी बुरे थे. कहीं पथराव हो रहा था तो कहीं आगजनी. 25 फरवरी को अंकित कुछ सामान लेने के लिए घर से बाहर गए थे. इसके बाद परिवार ने उनसे बात करने की काफी कोशिश की, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका. अगले दिन नाले से उनका शव मिला. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि उनके शरीर पर कोई चोटें थीं और धारदार हथियार के भी ज़ख्म थे. इस मामले को लेकर आज जज ने फैसला सुनाते हुए कहा- ”ये बहुत गंभीर घटना थी. अंकित शर्मा की बुरी तरह से हत्या की गई , उनकी बॉडी जानवर की तरह छोड़ दी गयी थी.” कोर्ट ने कहा- ये घटना समाज को झकझोर देने वाली थी.
ताहिर की वकील ने क्या कहा?
ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने कहा- “कोर्ट ने खासतौर से ये देखा कि भले ही ये एक गंभीर अपराध है, लेकिन कोर्ट के सामने साबित नहीं हो पाया कि अपराधी में सुधार या बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है. अंकित शर्मा की हत्या में ताहिर हुसैन या किसी अन्य दोषी की कोई खास भूमिका साबित नहीं हुई है. उन्हें धारा 149 के तहत दोषी ठहराया गया है, जो गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा होने से जुड़ी है. इसलिए, सज़ा में भी यह बात झलकनी चाहिए. जहां तक हमारे क्लाइंट की बात है, हमें उनके बेगुनाह होने का पूरा भरोसा है और हम जल्द ही इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाकर अपनी दलीलें पेश करेंगे.”
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