4 अगस्त को दिल्ली-NCR की सड़कों पर स्लीपर बस में फिर एक बार ‘निर्भया कांड’ हुआ. एक 16 साल की लड़की के साथ हुए गैंगरेप के बाद बवाल मच गया. इस बीच दिल्ली सरकार ने राजधानी में चलने वाली सभी बसों के लिए नियम और भी सख्त कर दिए हैं. ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को तवज्जो देते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर कोई नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.
क्या बदलाव होंगे?
न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देशों के तहत सभी बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले पैनिक बटन, आग बुझाने वाले यंत्र और फर्स्ट-एड किट का होना अनिवार्य है. वहीं, बस स्टाफ के लिए भी कई बदलाव किए गए हैं. अब ड्राइवर्स और कंडक्टर्स के पास वैलिड लाइसेंस, यूनिफॉर्म और PSV होना जरूरी है. किसी भी ऑपरेटर या स्टाफ को रखने से पहले उसका बैकग्राउंड वैरिफिकेशन अनिवार्य होगा. नशे की हालत में ड्राइविंग करने पर सख्त पाबंदी है और पूरे स्टाफ के लिए सभी यात्रियों के साथ अच्छे से पेश आना ज़रूरी है.
दिव्यांगों को बस में चढ़ाना या उतारना अनिवार्य
अगर कोई किसी यात्री को छेड़छाड़ या परेशान करता हुआ पाया जाए तो स्टाफ तुरंत पुलिस को जानकारी दे और बस को नजदीकी पुलिस स्टेशन, पुलिस पोस्ट या PCR वैन तक ले जाना चाहिए. दिल्ली सरकार ने ये भी निर्देश दिए हैं कि स्टाफ दिव्यांग यात्रियों को बस से चढ़ने या उतरने में उनकी मदद करें. ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने ऑपरेटर्स से कहा कि वो ये कन्फर्म जरूर करें कि हर बस के पास वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट हो और एमिशन स्टैंडर्ड्स का पालन करती हो. साथ ही, वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट भी साथ रखना जरूरी है. बसों के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया है.