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बिहार

बीजेपी ने मैथिली ठाकुर को मैदान में क्यों उतारा, जानिए पार्टी की इस रणनीती के पीछे की इनसाइड स्टोरी

Bihar Chunav 2025: बीजेपी ने जब से मैथिली ठाकुर को टिकट दिया है तब से बिहार की राजनीति में काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मैथिली के टिकट पर सवाल किए हैं. ऐसे में जानते हैं आखिर बीजेपी ने उन्हें टिकट देने का ऐलान क्यों किया है.

Author Written By: Namrata Mohanty Updated: Oct 17, 2025 12:52
maithili thakur
maithili thakur

Bihar Chunav 2025: बीजेपी ने बिहार चुनाव के लिए अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. मैथिली ठाकुर को भी बीजेपी ने अलीनगर से टिकट दिया है. मैथिली की टिकट से कई बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है क्योंकि उनका मानना है कि वे राजनीती का अनुभव नहीं रखती हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि क्यों BJP ने मैथिली को टिकट दिया होगा. चलिए समझते हैं पूरी बात.

नहीं है कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड

बता दें कि मैथिली ठाकुर एक लोकगायिका है जिनका कोई भी पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है. उनके पिता और दादाजी का भी संगीत से पुराना नाता है. उनके दोनों भाइयों को भी म्यूजिक की तरफ रुझान रहा है. ऐसे में मैथिली ठाकुर को अचानक बिहार में टिकट देना सभी के लिए ताज्जुब की बात है.

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सालों पहले छोड़ दिया था बिहार

मैथिली ठाकुर का परिवार काफी सालों पहले ही बिहार से दिल्ली आ गया था. वे दिल्ली के नजफगढ़ में अपने पूरे परिवार के साथ रहती हैं. उनके पिता ने ही उन्हें संगीत की शिक्षा दी थी. हालांकि, वे बिहार सालों पहले छोड़ चुकी है लेकिन उनकी जड़े आज भी बिहार की ही है. मैथिली बिहार के मधुबनी से आती हैं. इसलिए, माना जा रहा था कि शायद उन्हें वहां से टिकट मिलेगा.

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क्यों खेला होगा BJP ने यह दांव?

बीजेपी ने मैथिली ठाकुर को अलीनगर विधानसभा से टिकट दिया है. दरअसल, इसका कारण यह है कि पार्टी को इस सीट पर किसी साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार की तलाश थी जो यहां लंबे समय तक सत्ता में बना रहे. BJP ने मैथिली को टिकट देकर एक नहीं कई वर्गों पर सीधा टारगेट किया है जैसे युवा, महिलाओं और ब्राह्मण.

पूर्व विधायक पर लगे थे आरोप

अलीनगर सीट पर विधायक मिश्री लाल यादव की छवि पिछले कुछ समय से खराब चल रही है. उन पर कई आरोप और मारपीट के मामले थे. इसके अलावा, मिश्री लाल यादव ने भी पार्टी से इस्तीफा देते हुए कहा था कि भाजपा दलितों और पिछड़े वर्गों को उनका हक नहीं देती है.

मैथिली की जीत आसान नहीं

जी हां, भले ही मैथिली एक साफ-सुथरी छवि वाली शख्सियत हैं लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि उनके पास राजनीति का कोई तजुरबा नहीं है. उन्हें अभी लोगों के बीच जाना और उनके मुद्दों को समझकर समाधान करने जैसे कामों को करने में मेहनत लगेगी. इसके अलावा, बीजेपी के अपने कार्यकर्ताओं द्वारा विरोधाभास झेलना उनकी जीत मुश्किल कर सकता है. मिश्री लाल के समर्थक भी मैथिली के विरोधी है. इसलिए, मैथिली की जीत आसान नहीं मानी जा रही है.

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First published on: Oct 17, 2025 12:51 PM

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