10 बार CM, 5 बार केंद्रीय मंत्री... अब राज्य सभा जाएंगे 'सुशासन बाबू'!, जानें नीतीश कुमार का पूरा राजनीतिक सफर

Nitish Kumar Political Career: रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री और 5 बार केंद्रीय मंत्री रहे नीतीश कुमार अब राज्यसभा जा रहे हैं. बख्तियारपुर से शुरू हुआ उनका यह सफर बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक युग का अंत है.

Nitish Kumar

नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए हैं।

बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से दबदबा रखने वाले नीतीश कुमार अब एक नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं. नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था. उनके पिता एक आयुर्वेदिक चिकित्सक थे और समाज में उनकी काफी प्रतिष्ठा थी. नीतीश ने अपनी शुरुआती शिक्षा के बाद पटना के बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. हालांकि उन्होंने कुछ समय के लिए बिजली बोर्ड में काम किया लेकिन उनका मन हमेशा जनसेवा और राजनीति में लगा रहा. वे राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर जेपी आंदोलन में कूद पड़े. 1985 में पहली बार हरनौत से विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नही देखा. लालू प्रसाद यादव के साथ शुरुआती दोस्ती के बाद उन्होंने अपनी अलग राह चुनी और 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर समता पार्टी की नींव रखी जिसने बिहार की राजनीति का रुख बदल दिया.

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केंद्र में दबदबा और रेल सुधारों के जनक

बिहार की कमान संभालने से पहले नीतीश कुमार ने केंद्र की राजनीति में अपनी गहरी छाप छोड़ी. वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे. वे दो बार देश के रेल मंत्री रहे। पहली बार 1998-1999 में और दूसरी बार 2001-2004 तक. रेल मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने ही 2002 में इंटरनेट टिकट बुकिंग की शुरुआत की थी. उन्होंने 1999-2000 और फिर 2000-2001 के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में काम किया. 1998-1999 के दौरान उनके पास भूतल परिवहन (Surface Transport) मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार था. 1990 में उन्होंने वी.पी. सिंह की सरकार में पहली बार केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके अलावा तत्काल योजना और बड़े पैमाने पर रेलवे टिकट काउंटरों का विस्तार भी उन्हीं की देन है. 1999 में गैसल ट्रेन हादसे के बाद उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देकर एक मिसाल पेश की थी. केंद्र में मंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया जिससे उन्हें बिहार में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने में मदद मिली.

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मुख्यमंत्री के रूप में 10 कार्यकाल और विकास के मॉडल

नीतीश कुमार बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं. उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार इस पद की शपथ ली है जो अपने आप में एक अनोखा कीर्तिमान है. उनके शासनकाल में बिहार ने कानून व्यवस्था में बड़े सुधार देखे और अपराधियों पर नकेल कसी गई. उन्होंने लड़कियों के लिए साइकिल योजना, पोशाक योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर सामाजिक क्रांति की शुरुआत की. कोइरी और कुर्मी समाज के साथ-साथ अत्यंत पिछड़ी जातियों को सत्ता में हिस्सेदारी दिलाना उनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. शराबबंदी जैसा कड़ा फैसला लेकर उन्होंने महिला वोट बैंक को मजबूती से अपने साथ जोड़ा. हालांकि बार-बार गठबंधन बदलने के कारण उन्हें ‘पलटू राम’ जैसे उपनाम भी मिले लेकिन वे हमेशा राज्य की राजनीति के केंद्र में बने रहे.

राज्यसभा का रुख और बिहार में नई शुरुआत

75 वर्ष की उम्र में अब नीतीश कुमार ने सक्रिय राज्य राजनीति से एक कदम पीछे हटते हुए राज्यसभा जाने का फैसला किया है. उनके इस कदम को बिहार में एक बड़े युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है. उनके साथ ही उनके बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की अटकलें भी तेज हैं जिससे जेडीयू के भविष्य को एक नई दिशा मिल सकती है. नीतीश के राज्यसभा जाने से बिहार में बीजेपी के लिए अपना मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ हो गया है जो पिछले दो दशकों से जूनियर पार्टनर की भूमिका में थी. राजगीर खेल अकादमी, पटना साइंस सिटी और जीविका दीदियों के जरिए उन्होंने जो विकास का खाका खींचा है वह हमेशा उनके योगदान की याद दिलाता रहेगा. अब दिल्ली की राजनीति में उनकी भूमिका क्या होगी इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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