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बिहार

बिहार: मुख्यमंत्री तय, मंच तैयार, फिर शपथ ग्रहण से पहले कहां फंसा पेंच? इस ‘पावर सेंटर पर अटका समीकरण

बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं. मंत्रिमंडल के स्वरूप, विभागों के बंटवारे और सत्ता साझेदारी की रणनीति को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर गहन मंथन जारी है.

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Written By: Akarsh Shukla Updated: Nov 18, 2025 17:47

Bihar NDA Alliance: बिहार में चुनावी घमासान के नतीजे एनडीए के पक्ष में आने के बाद अब सरकार गठन और विभागों के बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर जारी है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक एनडीए गठबंधन की प्रमुख पार्टियां बीजेपी, जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के बीच मंत्रालयों का बंटवारा लगभग हो चुका है, लेकिन एक मंत्रालय पर बीजेपी और जेडीयू के बीच तकरार की खबर सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि बिहार के ‘पावर सेंटर’ यानी गृह मंत्रालय पर पेंच फंसा हुआ है, जिसे लेकर अभी तक एनडीए गठबंधन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है.

एनडीए गठबंधन में गहन मंथन जारी

गौरतलब है कि बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं. मंत्रिमंडल के स्वरूप, विभागों के बंटवारे और सत्ता साझेदारी की रणनीति को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर गहन मंथन जारी है. दिल्ली में जेडीयू के शीर्ष नेताओं लल्लन सिंह और संजय झा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ लगभग तीन घंटे चली बैठक ने राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ा दी है. इस बैठक में मंत्रालयों के बंटवारे, विधानसभा अध्यक्ष पद और दोनों दलों की शक्ति-संरचना पर विस्तृत चर्चा हुई.

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‘पावर सेंटर’ बने गृह मंत्रालय पर अटका समीकरण

बीजेपी इस बार सत्ता संतुलन बदलने के मूड में है. पार्टी गृह मंत्रालय और शिक्षा विभाग अपने पास चाहती है और इसके बदले स्वास्थ्य और वित्त मंत्रालय छोड़ने को भी तैयार है. लेकिन समस्या यह है कि गृह मंत्रालय नीतीश कुमार की राजनीतिक मजबूती का ‘कोर सेंटर’ माना जाता है. 2005 से लेकर अब तक वे गृह विभाग को अपने नियंत्रण में रखते आए हैं और यही वजह है कि वे इसे छोड़ने के मूड में नहीं हैं. कानून-व्यवस्था, पुलिस तंत्र और प्रशासनिक पकड़ जैसे अहम मसलों के चलते गृह मंत्रालय पर सहमति बनना अभी भी सबसे कठिन चुनौती बना हुआ है. सूत्र बताते हैं कि यही मुद्दा बातचीत को रोककर खड़ा है.

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विधानसभा अध्यक्ष का मामला सुलझा

लंबी खींचतान के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर तस्वीर साफ हो गई है. अध्यक्ष बीजेपी का होगा, जबकि उपाध्यक्ष का पद जेडीयू को मिलेगा. इस सहमति के बाद दोनों दलों की रणनीतिक बातचीत आगे बढ़ गई है और अब फोकस प्रमुख मंत्रालयों पर टिक गया है.

किसके पास कौन सा मंत्रालय रहने की उम्मीद?

बीजेपी के खाते में राजस्व,सहकारिता,पशु एवं मत्स्य संसाधन,विधि,लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण,उद्योग,पर्यटन, पथ निर्माण रहेगा . सूत्रों के मुताबिक इसके साथ ही बीजेपी गृह मंत्रालय और शिक्षा विभाग चाहता है इसके बदले वो स्वास्थ्य और वित्त छोड़ने के लिए तैयार है. बीजेपी का तर्क है कि बदलते राजनीतिक समीकरणों में उसे ‘अधिक प्रभावी’ मंत्रालयों की जरूरत है. इसी कारण वह स्वास्थ्य और वित्त छोड़ने को भी तैयार है.

जेडीयू के पास ये मजबूत विभाग में कृषि, खान एवं भूतत्व, जल संसाधन, संसदीय कार्य, ऊर्जा, योजना एवं विकास, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, समाज कल्याण शामिल है. हालाकि कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालयों को लेकर अभी भी चर्चा जारी है. हालांकि गृह मंत्रालय के साथ जेडीयू प्रशासनिक ढांचे का बड़ा हिस्सा अपने नियंत्रण में रखना चाहती है.

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अंतिम दौर की एक और बातचीत संभावित

दोनों दलों के बीच मंत्रालयों की हिस्सेदारी लगभग तय है. अब लड़ाई सिर्फ एक मोर्चे पर है गृह मंत्रालय. नीतीश कुमार इसे छोड़ने को तैयार नहीं और बीजेपी इसे अपने लिए निर्णायक मंत्रालय मान रही है. सूत्रों का कहना है कि आज देर रात एक और अहम बैठक होगी, जो सरकार के पूरे स्वरूप की अंतिम तस्वीर तय कर सकती है.

First published on: Nov 18, 2025 05:45 PM

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