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IRCTC Scam Case: आज आएगा कोर्ट का ऑर्डर, लालू-तेजस्वी यादव समेत 5 लोगों के भविष्य का होगा फैसलाबिहार चुनाव से पहले बड़ी खबर है। चुनाव की तैयारियों में जुटे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को झटका लग सकता है। 8 साल पुराने आईआरसीटीसी घोटाले में आज दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट फैसला सुनाएगी। केस में लालू परिवार के लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 5 लोग आरोपी हैं। कोर्ट ने गत 29 मई को सुनवाई पूरी की थी, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रखा लिया था। CBI ने 7 जुलाई 2017 को पांचों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। अगर आरोप साबित होता है तो आरोपितों को 7 साल तक की सजा हो सकती है।
साल 2004 से 2009 के बीच लालू यादव केंद्रीय रेलमंत्री थे। उस दौरान आईआरसीटीसी के 2 होटलों, बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी के मैंटिनेंस का ठेका विजय और विनय कोचर की सुजाता होटल कंपनी को दिया था। सीबीआई का आरोप है कि इस डील के बदले लालू परिवार को पटना में 3 एकड़ कीमती जमीन मिली थी। टेंडर के बदले 25 फरवरी 2005 को कोचर ने पटना के बेली रोड स्थित 3 एकड़ जमीन सरला गुप्ता की कंपनी मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड (डीएमसीएल) को 1.47 करोड़ रुपए में बेच दी थी। जबकि बाजार में उसकी कीमत 1.93 करोड़ रुपए थी। इसे कृषि भूमि बताकर सर्कल रेट से काफी कम पर बेचा गया। इसके अलावा स्टैम्प ड्यूटी में गड़बड़ी की गई थी।
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सीबीआई ने 7 जुलाई 2017 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें लालू यादव, उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई ने विनय कोचर समेत अन्य आरोपियों के करीब 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस समय IRCTC के तत्कालीन MD पीके गोयल थे।
सीबीआई का आरोप है कि विनय और विजय कोचर की कंपनी को दोनों होटल लीज पर दिलाने के बदले लालू यादव ने पटना में जमीन ली थी। कोचर की कंपनी ने यह जमीन सरला गुप्ता की कंपनी को बेच दी। बाद में 2010 से 2014 के बीच प्रॉपर्टी तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की कंपनी कंपनी लारा प्रोजेक्ट को महज 65 लाख में ट्रांसफर कर दी गई। जबकि सर्कल रेट के तहत इसकी कीमत करीब 32 करोड़ थी। मार्केट रेट 94 करोड़ रुपए था। इसी तरह मामले में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का नाम भी शामिल हो गया।
केस में लालू प्रसाद यादव की तरफ से कहा गया था कि आईआरसीटीसी घोटाले में लालू के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। अपील की थी कि लालू इस मामले में बरी किए जाने के हकदार हैं। आज सीबीआई को पुख्ता सबूत देने होंगे। यदि ट्रायल के दौरान सीबीआई आरोपों को साबित कर देती है, तो आरोपियों को अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती है।
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