नेपाल में हिंसा की मुख्य वजह क्या? मधुबनी बॉर्डर के पास बिहार पुलिस अलर्ट पर क्यों?

नेपाल के सुनसरी और आसपास के जिलों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद बिहार के मधुबनी समेत सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बॉर्डर पर वाहनों की सघन चेकिंग और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. जानिए सीमा पार उपजे इस तनाव की पूरी वजह और वर्तमान स्थिति.

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नेपाल के कोशी प्रांत स्थित सुनसरी जिले में डीजे साउंड व धार्मिक जुलूस को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़पों में बदल गया. इस हिंसा में 3 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने के बाद नेपाल के सप्तरी, सिरहा और सीमावर्ती जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. हिंसा का असर भारत में न फैले और असामाजिक तत्व खुली सीमा का फायदा उठाकर घुसपैठ या सीमा पार से तनाव न फैलाएं, इसे रोकने के लिए बिहार के मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज और पश्चिमी चंपारण जिलों में बिहार पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन और सघन वाहन चेकिंग अभियान शुरू कर हाई अलर्ट जारी किया है.

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नेपाल में क्यों फैली हिंसा?

नेपाल में हिंसा की शुरुआत और तनाव का कारण नेपाल के कोशी प्रांत स्थित सुनसरी जिले की देवांगंज ग्रामीण नगरपालिका वार्ड 3 में 26 जुलाई की देर रात विवाद की शुरुआत हुई. बोल बम तीर्थयात्रा की तैयारियों के दौरान तेज आवाज में बज रहे डीजे संगीत को लेकर दो गुटों में कहासुनी हो गई. यह विवाद जल्द ही पत्थरबाजी और हिंसा में बदल गया. उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोलियां चलाईं. गोली लगने से मौके पर ही एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि इलाज के दौरान 30 जुलाई को जयप्रकाश मेहता की जान चली गई. हिंसा में कुल मृतकों की संख्या 3 हो चुकी है.

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बिहार पुलिस हाई अलर्ट पर क्यों? 3 मुख्य सुरक्षा कारण

भारत और नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी ‘खुली सीमा’है, जिसमें बिहार 729 किलोमीटर की सीमा साझा करता है.

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  1. सीमा पार से तनाव रोकने की कोशिश
    नेपाल के सप्तरी और सिरहा जिले सीधे बिहार के मधुबनी और सुपौल जिलों से सटे हैं. नेपाल में तनाव का असर भारतीय सीमावर्ती गांवों में न पड़े, इसलिए पुलिस बल चौकसी बरत रहा है.
  2. असामाजिक तत्वों और अपराधियों की घुसपैठ पर रोक
    कर्फ्यू और हिंसा की आड़ में उपद्रवी या भगोड़े अपराधी खुली सीमा के वैकल्पिक रास्तों से बिहार में शरण न ले सकें, इसलिए गश्त बढ़ाई गई है.
  3. अफवाहों और सोशल मीडिया कंटेंट पर नकेल
    सीमावर्ती इलाकों में अफवाहें तेजी से फैलती हैं. बिहार पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कड़ी निगरानी रख रही है ताकि कोई भ्रामक खबर फैलाकर स्थानीय माहौल न बिगाड़ सके.

नेपाल में कर्फ्यू और पीएम का बयान

हिंसा फैलने के बाद सुनसरी, सप्तरी और आसपास के क्षेत्रों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू व निषेधाज्ञा लागू कर दी गई. स्थिति गंभीर होने पर नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने 31 जुलाई को देश को संबोधित किया. उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच समिति के गठन की घोषणा की और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया.
बिहार पुलिस ने सीमावर्ती नागरिकों से प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है. फिलहाल नेपाल के कई इलाकों में कर्फ्यू में ढील दी जा रही है और सद्भाव रैलियां निकाली जा रही हैं.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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