बिहार में ट्रैफिक पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब सड़कों पर खड़े सिपाही आपकी गाड़ी को रोक या जब्त नहीं कर सकेंगे. यह फैसला ट्रैफिक व्यवस्था को साफ-सुथरा और बेहतर बनाने के लिए लिया गया है. यह अधिकार अब सिर्फ सब-इंस्पेक्टर या उनसे बड़े अधिकारियों के पास होगा. सिपाहियों का काम अब सिर्फ ट्रैफिक को सही से चलाना होगा. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह नया नियम बनाया गया है. इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को अपना बॉडी कैमरा हमेशा ऑन रखना होगा. कैमरा बंद मिलने पर अधिकारी पर कार्रवाई होगी.

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पटना में लागू होगा नया मॉडल

पटना में जाम की समस्या खत्म करने के लिए नया 'स्ट्रेच मॉडल' लागू किया जा रहा है. कहीं भी जाम लगने पर तुरंत पुलिस की टीम मौके पर पहुंचेगी. अधिकारियों को दफ्तर में बैठने के बजाय सड़कों पर रहकर नजर रखनी होगी. मेट्रो के काम की वजह से कई जगह रास्ता वन-वे रहेगा और सड़कों से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे. गाड़ी की जांच के दौरान मोबाइल में डिजिलॉकर के कागज दिखाना भी पूरी तरह मान्य होगा. वहीं जब्त की गई गाड़ियों को 24 घंटे के अंदर छोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है.

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हादसे पर 1.5 लाख का इलाज

सड़क हादसे में घायल लोगों के लिए सरकार ने बड़ी मदद की सुविधा दी है. हादसे के बाद तय अस्पतालों में 1.5 लाख रुपये तक का इलाज बिल्कुल मुफ्त मिलेगा. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लोगों को इस योजना की जानकारी होना बहुत जरूरी है. इसके साथ ही एक्सीडेंट के मामलों में मिलने वाले मुआवजे की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है. अब पीड़ितों को छह महीने के अंदर मुआवजा राशि देने की पूरी कोशिश की जाएगी. इन नए बदलावों से आम लोगों का सफर काफी आसान हो जाएगा.

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