बिहार के छात्रों के लिए एक बड़ी और जरूरी खबर है. सम्राट चौधरी सरकार के पिछले ऐलान के बावजूद, राज्य के नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों में 1 जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं हो पाएगा. कॉलेजों में तैयारियों के पूरी न होने और संचालन से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं के कारण इस योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सहमति के बाद ही पढ़ाई शुरू करने की नई तारीख तय की जाएगी.
कहां फंसा है पेंच?
उच्च शिक्षा विभाग इन नए कॉलेजों में तय समय पर पढ़ाई शुरू कराने की पूरी कोशिश में जुटा था. सरकार की योजना के मुताबिक 1 जुलाई से कक्षाएं शुरू होनी थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों की तैनाती से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने तक कई बड़ी मुश्किलें सामने आ गईं. शिक्षा विभाग ने पहले एक अधिसूचना जारी कर 1 जुलाई से अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में इंटर और डिग्री की पढ़ाई के संबंध में कुछ कड़े फैसले लिए थे. लेकिन राजभवन ने शिक्षा विभाग के इस एकतरफा फैसले पर सख्त आपत्ति जताई थी. राजभवन का तर्क था कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शैक्षणिक सत्र और प्रशासनिक फैसलों पर चांसलर की अनुमति के बिना ऐसा कोई भी बड़ा बदलाव नहीं किया जा सकता.
9 हजार से ज्यादा पदों को मिली है मंजूरी
राज्य सरकार ने 'सात निश्चय-3' के तहत उन सभी प्रखंडों (ब्लॉक्स) में डिग्री कॉलेज खोलने का फैसला किया था, जहां फिलहाल एक भी सरकारी या मान्यता प्राप्त कॉलेज नहीं है. इसके तहत कुल 211 प्रखंडों की पहचान की गई थी. इन कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने पहले ही 9,284 नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है, जिसमें 6,752 शिक्षक और 2,532 शिक्षकेतर कर्मचारियों के पद शामिल हैं. नियम के मुताबिक, हर कॉलेज के लिए 32 शिक्षक और 12 कर्मचारी तय किए गए हैं.
शिक्षकों की कमी बनी सबसे बड़ी रुकावट
तैयारियों में देरी की सबसे बड़ी वजह शिक्षकों की कमी है. जब तक नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक विभाग ने नौवीं से बारहवीं कक्षा के नेट (NET), जेआरएफ (JRF) या पीएचडी पास योग्य शिक्षकों को यहां प्रतिनियुक्त (डेप्यूटेशन) करने का विचार किया था. लेकिन इस फैसले को लेकर कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें और समस्याएं सामने आईं, जिससे शिक्षकों की समय पर तैनाती नहीं हो सकी.
पहले चरण में इन कॉलेजों में 16 विषयों की पढ़ाई को मंजूरी मिली थी, जिसमें से 1 जुलाई को केवल 6 विषयों से शुरुआत होनी थी. लेकिन अब न तो शिक्षक मिल पाए हैं और न ही इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार हुआ है. ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग अब एक नई कार्ययोजना बनाने में जुट गया है, ताकि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद जल्द से जल्द पढ़ाई की शुरुआत की जा सके.
बिहार के छात्रों के लिए एक बड़ी और जरूरी खबर है. सम्राट चौधरी सरकार के पिछले ऐलान के बावजूद, राज्य के नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों में 1 जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं हो पाएगा. कॉलेजों में तैयारियों के पूरी न होने और संचालन से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं के कारण इस योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सहमति के बाद ही पढ़ाई शुरू करने की नई तारीख तय की जाएगी.
कहां फंसा है पेंच?
उच्च शिक्षा विभाग इन नए कॉलेजों में तय समय पर पढ़ाई शुरू कराने की पूरी कोशिश में जुटा था. सरकार की योजना के मुताबिक 1 जुलाई से कक्षाएं शुरू होनी थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों की तैनाती से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने तक कई बड़ी मुश्किलें सामने आ गईं. शिक्षा विभाग ने पहले एक अधिसूचना जारी कर 1 जुलाई से अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में इंटर और डिग्री की पढ़ाई के संबंध में कुछ कड़े फैसले लिए थे. लेकिन राजभवन ने शिक्षा विभाग के इस एकतरफा फैसले पर सख्त आपत्ति जताई थी. राजभवन का तर्क था कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शैक्षणिक सत्र और प्रशासनिक फैसलों पर चांसलर की अनुमति के बिना ऐसा कोई भी बड़ा बदलाव नहीं किया जा सकता.
9 हजार से ज्यादा पदों को मिली है मंजूरी
राज्य सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के तहत उन सभी प्रखंडों (ब्लॉक्स) में डिग्री कॉलेज खोलने का फैसला किया था, जहां फिलहाल एक भी सरकारी या मान्यता प्राप्त कॉलेज नहीं है. इसके तहत कुल 211 प्रखंडों की पहचान की गई थी. इन कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने पहले ही 9,284 नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है, जिसमें 6,752 शिक्षक और 2,532 शिक्षकेतर कर्मचारियों के पद शामिल हैं. नियम के मुताबिक, हर कॉलेज के लिए 32 शिक्षक और 12 कर्मचारी तय किए गए हैं.
शिक्षकों की कमी बनी सबसे बड़ी रुकावट
तैयारियों में देरी की सबसे बड़ी वजह शिक्षकों की कमी है. जब तक नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक विभाग ने नौवीं से बारहवीं कक्षा के नेट (NET), जेआरएफ (JRF) या पीएचडी पास योग्य शिक्षकों को यहां प्रतिनियुक्त (डेप्यूटेशन) करने का विचार किया था. लेकिन इस फैसले को लेकर कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें और समस्याएं सामने आईं, जिससे शिक्षकों की समय पर तैनाती नहीं हो सकी.
पहले चरण में इन कॉलेजों में 16 विषयों की पढ़ाई को मंजूरी मिली थी, जिसमें से 1 जुलाई को केवल 6 विषयों से शुरुआत होनी थी. लेकिन अब न तो शिक्षक मिल पाए हैं और न ही इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार हुआ है. ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग अब एक नई कार्ययोजना बनाने में जुट गया है, ताकि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद जल्द से जल्द पढ़ाई की शुरुआत की जा सके.