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Religion

सावन में क्यों नहीं खाना चाहिए प्याज और लहसुन? जानिए धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण

Sawan 2025: सावन के महीने में प्याज और लहसुन खाने के मनाही होती है। इसके पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारण भी होते हैं। सावन का महीना मानसून के समय पर आता है। ऐसे में इस समय प्याज और लहसुन का सेवन आपको बीमार कर सकता है। वहीं, यह महीना भगवन शिव की पूजा का होता है। प्याज और लहसुन का सेवन आपके अंदर तामसिक प्रवृत्ति को बढ़ाता है।

Sawan 2025: सावन के पवित्र माह की शुरुआत बीती 11 जुलाई को हो चुकी है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, और इस दौरान भक्त उपवास, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना में लीन रहते हैं। इस महीने में प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। इसके पीछे आयुर्वेदिक और धार्मिक दोनों कारण हैं, जो शास्त्रों और आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलते हैं।

हिंदू धर्म में सावन का महीना भक्ति और शुद्धता का प्रतीक है। इस दौरान भक्त अपने मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन माना जाता है, जो मन को उत्तेजित करता है और आध्यात्मिक शांति में बाधा डाल सकता है। वहीं, आयुर्वेद में भोजन को तीन गुणों में बांटा किया गया है। इसमें सात्विक, रजसिक और तामसिक भोजन आते हैं। प्याज और लहसुन को रजसिक और तामसिक माना जाता है, जो मन और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। सावन में इनका परहेज करने के पीछे कई आयुर्वेदिक कारण है।

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क्या कहते हैं धार्मिक शास्त्र?

मनुस्मृति के अध्याय 5 के श्लोक 5 में कहा गया है कि कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे कि प्याज और लहसुन, ब्राह्मणों और सात्विक जीवन जीने वालों के लिए निषिद्ध हैं, क्योंकि ये तामसिक और रजसिक गुणों को बढ़ाते हैं।

लशुनं गृञ्जनं चैव पलाण्डुं कवकं तथा। अभक्ष्यं ब्राह्मणानां च मांसं यच्च विदाहति।

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इसका अर्थ है कि लहसुन, प्याज, मशरूम और मांस आदि ब्राह्मणों के लिए अभक्ष्य (खाने योग्य नहीं) हैं, क्योंकि ये शरीर और मन को उत्तेजित करते हैं।

इसके साथ ही पद्म पुराण में भी धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत के दौरान तामसिक भोजन से बचने को कहा गया है। सावन में शिव पूजा के लिए सात्विक भोजन ही करना चाहिए। इससे मन शांत और एकाग्र रहता है।

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शिव पुराण में भगवान शिव को सात्विक और शुद्ध भोजन अर्पित करने का विधान बताया गया है। प्याज और लहसुन को तामसिक माना जाता है, इसलिए इन्हें भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता और न ही उपवास या सावन माह के दौरान खाया जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्याज और लहसुन राक्षसी प्रवृत्तियों को बढ़ाते हैं। इस कारण शुभ और पवित्र मौकों पर इनको खाने से बचना चाहिए।

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क्या कहते हैं आयुर्वेदिक ग्रंथ?

चरक संहिता के सूत्रस्थान 27 में भोजन के गुणों और उनके प्रभावों को बताया गया है। प्याज और लहसुन को उष्ण (गर्म) प्रकृति का माना गया है, जो पित्त दोष को बढ़ा सकता है। सावन बरसात का मौसम है, इसमें पित्त और कफ दोष असंतुलित हो सकते हैं। प्याज और लहसुन का सेवन न करने को कहा जाता है।

उष्णं तीक्ष्णं विदाहि च लशुनं पलाण्डु च।

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इसका अर्थ है कि लहसुन और प्याज उष्ण और तीक्ष्ण होते हैं, जो शरीर में जलन और असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

इसके साथ ही सुश्रुत संहिता में भी प्याज और लहसुन को भारी और उत्तेजक भोजन के रूप बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार ये पाचन तंत्र को प्रभावित और मन को अशांत कर सकते हैं, जो ध्यान और साधना के लिए सही नहीं है।

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आयुर्वेदिक ग्रंथ भावप्रकाश निघंटु में प्याज और लहसुन को औषधीय गुणों के साथ-साथ रजसिक और तामसिक गुणों वाला बताया गया है। ये शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं और कामवासना को उत्तेजित कर सकते हैं, जो आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त नहीं है।

पित्त दोष हो जाता है असंतुलित

सावन में वर्षा के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है। प्याज और लहसुन की गर्म तासीर पित्त को बढ़ाती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे अम्लपित्त (एसिडिटी) और जलन, हो सकती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, रजसिक और तामसिक भोजन मन को चंचल और अशांत बनाते हैं। सावन में ध्यान और भक्ति के लिए शांत और सात्विक मन की आवश्यकता होती है, इसलिए इनका परहेज किया जाता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

ये भी पढ़ें- सावन में शिव जी को क्यों अर्पित किया जाता है दूध, जानिए क्या है कारण?

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First published on: Jul 16, 2025 05:04 PM

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मोहित 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन सालों में इन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। इनको फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क के साथ ही चैनल, प्रिंट और डिजिटल माध्यम में काम करने का अनुभव है। इसके साथ ही Astroyogi  व अन्य एस्ट्रोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए भी काम कर चुके हैं। इन्होंने एस्ट्रोलॉजी का गहन अध्ययन किया हुआ है। इसके चलते पुराणों और शास्त्रों में छिपे गूढ़ रहस्यों को लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने की कोशिश भी अपने आर्टिकल्स के माध्यम से करते हैं। धर्म के साथ ही लाइफस्टाइल के भी जटिल विषयों को सरलता से पाठकों के समक्ष रखते हैं। अब News 24 के साथ जुड़कर फीचर लेखन का कार्य कर रहे हैं।

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Mohit Tiwari

मोहित 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन सालों में इन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। इनको फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क के साथ ही चैनल, प्रिंट और डिजिटल माध्यम में काम करने का अनुभव है। इसके साथ ही Astroyogi  व अन्य एस्ट्रोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए भी काम कर चुके हैं। इन्होंने एस्ट्रोलॉजी का गहन अध्ययन किया हुआ है। इसके चलते पुराणों और शास्त्रों में छिपे गूढ़ रहस्यों को लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने की कोशिश भी अपने आर्टिकल्स के माध्यम से करते हैं। धर्म के साथ ही लाइफस्टाइल के भी जटिल विषयों को सरलता से पाठकों के समक्ष रखते हैं। अब News 24 के साथ जुड़कर फीचर लेखन का कार्य कर रहे हैं।

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