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Dwadash Jyotirling Stotra Lyrics: आज से ही पढ़ना शुरू करें द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्, पापों का होगा नाश

Dwadash Jyotirling Stotra: देवों के देव महादेव की कृपा में अद्भुत शक्ति है, जिनके आशीर्वाद से बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है. यदि आप भी शिव जी से मनचाहा वरदान पाना चाहते हैं तो नियमित रूप से द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं. यहां पर द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् के लिरिक्स, महत्व और लाभ आदि के बारे में बताया गया है.

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Written By: Nidhi Jain Updated: May 12, 2026 15:25
Dwadash Jyotirling Stotra Lyrics
Credit- Social Media

Dwadash Jyotirling Stotra: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् भोलेबाबा को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका नियमित रूप से पाठ करना शुभ होता है. प्राचीन काल में आदि शंकराचार्य ने खुद द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् की रचना की थी, ताकि भक्तों को शिव जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त हो सके. इसमें भगवान शिव के 12 सबसे पवित्र व दिव्य स्थानों यानी ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन किया गया है.

मान्यता है कि नियमित रूप से द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् का पाठ करने से पापों का नाश होता है और जीवन में खुशहाली का आगमन होता है. चलिए अब जानें द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् के लिरिक्स.

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द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् (Dwadash Jyotirling Stotra)

||द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् ||

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये, ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं, तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।1।।
श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गे, तुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम्।
तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं, नमामि संसारसमुद्रसेतुम्।।2।।
अवन्तिकायां विहितावतारं, मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं, वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।3।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे, समागमे सज्जनतारणाय।
सदैवमान्धातृपुरे वसन्त, मोङ्कारमीशं शिवमेकमीडे।।4।।
पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने, सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्।
सुरासुराराधितपादपद्मं, श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।।5।।
याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्ये, विभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः।
सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं, श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये।।6।।
महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं, सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यै:, केदारमीशं शिवमेकमीडे।।7।।
सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं, गोदावरीतीरपवित्रदेशे।
यद्दर्शनात् पातकमाशु नाशं, प्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीडे।।8।।
सुताम्रपर्णीजलराशियोगे, निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः।
श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं, रामेश्वराख्यं नियतं नमामि।।9।।
यं डाकिनिशाकिनिकासमाजे, निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च।
सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं, तं शङ्करं भक्तहितं नमामि।।10।।
सानन्दमानन्दवने वसन्त, मानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
वाराणसीनाथमनाथनाथं, श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये।।11।।
इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन्, समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्।
वन्दे महोदारतरस्वभावं, घृष्णेश्वराख्यं शरणम् प्रपद्ये।।12।।
ज्योतिर्मयद्वादशलिङ्गकानां, शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण।
स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या, फलं तदालोक्य निजं भजेच्च।।13।।

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।।इति श्रीमच्छंकराचार्य विरचितं द्वादश ज्योतिर्लिङ्गस्तोत्रं संपूर्णम्।।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Frequently Asked Questions

रोजाना ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में आप द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं.
वैसे तो एक दिन में कितनी भी बार द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् का पाठ किया जा सकता है, लेकिन एक बार में 108 बार आप इसे पढ़ सकते हैं.
First published on: May 12, 2026 03:25 PM

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