Bhadra Kaal: पंचांग के अनुसार, दिन और तारीख के साथ ही तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग कई चीजों का महत्व होता है. शुभ मुहूर्त के लिए सभी चीजों को देखा है. भद्रा का समय भी अशुभ माना जाता है. भद्रा काल में शुभ कार्य करने वर्जित होते हैं. होलिका दहन के दौरान इस बार भद्रा का साया रहने वाला है और इसके साथ ही ग्रहण लग रहा है. ऐसे में होलिका दहन 3 मार्च की बजाय 2 मार्च को किया जाएगा. भद्रा काल क्या है और इसे क्यों अशुभ मानते हैं चलिए जानते हैं.
क्या है भद्रा काल? (What is Bhadra Kaal)
पंचांग के अनुसार कुल 11 करण होते हैं इनमें से जब किसी तिथि को विष्टी करण आता है तो ही भद्रा कहते हैं. इस भद्रा काल को कई कामों के लिए अशुभ माना जाता है. भद्रा को शनि देव की बहन माना जाता है इसे शुभ कार्य के लिए अशुभ माना जाता है. इसी वजह से भद्रा के दौरान कई शुभ कार्य करने की मनाही होती है.
ये भी पढ़ें - Surya Budh Yuti: सूर्य-बुध की युति से इन राशियों को होगा जबरदस्त धनलाभ, शुभ संयोग से पलटेगी किस्मत
भद्रा की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रा को सूर्य देव और छाया की पुत्री माना जाता है. भद्रा का स्वभाव बहुत ही क्रोधी और उग्र माना गया है. जब भद्रा पृथ्वी लोक पर रहती है तो इस दौरान मांगलिक और शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. भद्रा को स्वर्ग और पाताल लोक में अशुभ नहीं माना जाता है. भद्रा के दौरान शउभ कार्य नहीं करने चाहिए.
क्या काम होते हैं वर्जित?
विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया काम शुरू करना और कोई भी शुभ संस्कार करना भद्रा के समय मना होता है. भद्रा में मुंडन, यज्ञ और राखी बांधने जैसा काम नहीं कर सकते हैं. भद्रा काल के समाप्त होने के बाद शुभ कार्य कर सकते हैं. कई स्थितियों में भद्रा पुच्छ काल में शुभ कार्य कर सकते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Bhadra Kaal: पंचांग के अनुसार, दिन और तारीख के साथ ही तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग कई चीजों का महत्व होता है. शुभ मुहूर्त के लिए सभी चीजों को देखा है. भद्रा का समय भी अशुभ माना जाता है. भद्रा काल में शुभ कार्य करने वर्जित होते हैं. होलिका दहन के दौरान इस बार भद्रा का साया रहने वाला है और इसके साथ ही ग्रहण लग रहा है. ऐसे में होलिका दहन 3 मार्च की बजाय 2 मार्च को किया जाएगा. भद्रा काल क्या है और इसे क्यों अशुभ मानते हैं चलिए जानते हैं.
क्या है भद्रा काल? (What is Bhadra Kaal)
पंचांग के अनुसार कुल 11 करण होते हैं इनमें से जब किसी तिथि को विष्टी करण आता है तो ही भद्रा कहते हैं. इस भद्रा काल को कई कामों के लिए अशुभ माना जाता है. भद्रा को शनि देव की बहन माना जाता है इसे शुभ कार्य के लिए अशुभ माना जाता है. इसी वजह से भद्रा के दौरान कई शुभ कार्य करने की मनाही होती है.
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भद्रा की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रा को सूर्य देव और छाया की पुत्री माना जाता है. भद्रा का स्वभाव बहुत ही क्रोधी और उग्र माना गया है. जब भद्रा पृथ्वी लोक पर रहती है तो इस दौरान मांगलिक और शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. भद्रा को स्वर्ग और पाताल लोक में अशुभ नहीं माना जाता है. भद्रा के दौरान शउभ कार्य नहीं करने चाहिए.
क्या काम होते हैं वर्जित?
विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया काम शुरू करना और कोई भी शुभ संस्कार करना भद्रा के समय मना होता है. भद्रा में मुंडन, यज्ञ और राखी बांधने जैसा काम नहीं कर सकते हैं. भद्रा काल के समाप्त होने के बाद शुभ कार्य कर सकते हैं. कई स्थितियों में भद्रा पुच्छ काल में शुभ कार्य कर सकते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.