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Aarti Chalisa

Surya Chalisa Lyrics: जीवन को खुशियों से भर देगा सूर्य चालीसा का पाठ, बढ़ेगा आत्मविश्वास और मिलेगी सफलता

Surya Chalisa Lyrics: सूर्य देव की पूजा उपासना करने से जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. सूर्य देव की पूजा से यश और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है. रोजाना सूर्य चालीसा का पाठ करने बेहद शुभ होता है. खासकर रविवार के दिन सूर्य देव चालीसा का पाठ करना चाहिए.

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Edited By : Aman Maheshwari Updated: Apr 12, 2026 12:46
Photo Credit- News24GFX

Surya Chalisa Lyrics in Hindi: सूर्य देव को अर्घ्य देने और सूर्य चालीसा का पाठ करने से सूर्य देव का आशीर्वाद मिलता है. सूर्य देव के आशीर्वाद से आत्मिवश्वास में वृद्धि होती है और यश की प्राप्ति होती है. सूर्य देव की उपासना के लिए रविवार का दिन खास माना जाता है. आप रोजाना या खासकर रविवार को सूर्य देव चालीसा का पाठ करें. सूर्य चालीसा का पाठ करने से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है. सूर्य की उपासना से बीमारियों से छुटकारा मिलता है स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद मिलता है.

सूर्य देव चालीसा (Surya Dev Chalisa)

दोहा
कनक बदन कुण्डल मकर,मुक्ता माला अङ्ग।
पद्मासन स्थित ध्याइए,शंख चक्र के सङ्ग॥

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चौपाई

जय सविता जय जयति दिवाकर!। सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!। सविता हंस! सुनूर विभाकर॥

विवस्वान! आदित्य! विकर्तन। मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते। वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥

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सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि। मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर। हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥

मंडल की महिमा अति न्यारी। तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते। देखि पुरन्दर लज्जित होते॥

मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर। सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै। हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं। मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै। दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥

नमस्कार को चमत्कार यह। विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई। अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

बारह नाम उच्चारन करते। सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन। रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है। प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते। रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत। कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित। भास्कर करत सदा मुखको हित॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे। रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा। तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर। त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन। भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥

बसत नाभि आदित्य मनोहर। कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा। गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥

विवस्वान पद की रखवारी। बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै। रक्षा कवच विचित्र विचारे॥

अस जोजन अपने मन माहीं। भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै। जोजन याको मन मंह जापै॥

अंधकार जग का जो हरता। नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही। कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

मंद सदृश सुत जग में जाके। धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा। किया करत सुरमुनि नर सेवा॥

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों। दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
परम धन्य सों नर तनधारी। हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन। मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
भानु उदय बैसाख गिनावै। ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥

यम भादों आश्विन हिमरेता। कातिक होत दिवाकर नेता॥
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं। पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं॥

दोहा
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहि बिविध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

सूर्य देव चालीसा पाठ विधि

सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए चालीसा का पाठ करने से पहले स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद तांबे के लौटे में जल लेकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें. इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं. सूर्य चालीसा का पाठ करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 12, 2026 12:46 PM

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