Vidur Niti: इंसान के रूप में कौन है गीदड़? जानें किन लोगों को विदुर नीति में कहा गया है धरती पर बोझ

Vidur Niti: हजारों साल पुरानी विदुर नीति आज के समय में भी प्रासंगिक है. कुछ मनुष्य इंसान नहीं गीदड़ होते हैं, यह केवल आलोचना नहीं, बल्कि चेतावनी है. यह सही आचरण अपनाने का संदेश देती है. आइए जानते हैं, विदुर नीति में क्यों कुछ इंसान को धरती पर बोझ बताया गया है?

Vidur-Niti

Vidur Niti: महाभारत काल में एक ऐसा नाम मिलता है जो सत्ता में रहकर भी सत्य के साथ खड़ा रहा. यह नाम है विदुर. वे हस्तिनापुर के महामंत्री थे. जन्म से राजपरिवार में नहीं थे, लेकिन बुद्धि, नीति और धर्मज्ञान में सबसे आगे थे. उन्हें धर्मराज का अंश माना जाता है. उन्होंने राजा धृतराष्ट्र को बार-बार सही और नैतिक सलाह दी. उन्होंने अनीति और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई. यही शिक्षाएं आगे चलकर विदुर नीति के नाम से प्रसिद्ध हुईं. विदुर नीति महाभारत के उद्योग पर्व में मिलती है. इसमें जीवन, राजनीति, धन, आचरण और धर्म पर गहरी बातें कही गई हैं. सरल शब्दों में कहें तो यह एक नैतिक मार्गदर्शिका है.

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इंसान के रूप में गीदड़ कौन?

विदुर ने कुछ लोगों की तुलना गीदड़ से की है. यहां गीदड़ का अर्थ डरपोक और नीच प्रवृत्ति वाले व्यक्ति से है. वे कहते हैं कि जो लोग कभी दान नहीं देते, वे समाज के लिए व्यर्थ हैं. धन केवल अपने लिए जमा करना, विदुर के अनुसार, अधर्म है. जो लोग वेद और शास्त्रों से द्वेष रखते हैं, ज्ञान का अपमान करते हैं, वे भी इसी श्रेणी में आते हैं. विदुर मानते हैं कि ज्ञान से दूरी मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है.

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सेवा से मुंह मोड़ने वाले

विदुर साफ कहते हैं कि जो व्यक्ति माता-पिता और आचार्य की सेवा नहीं करता, वह भी गीदड़ समान है. भारतीय परंपरा में माता-पिता और गुरु को उच्च स्थान दिया गया है. उनकी उपेक्षा को विदुर ने गंभीर दोष माना है.

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गलत कमाई और झूठा अभिमान

जो व्यक्ति आजीविका के लिए गलत रास्ता अपनाता है, छल या बेईमानी से धन कमाता है, वह भी निंदनीय है. विदुर के अनुसार ऐसा धन टिकता नहीं और सम्मान भी नष्ट करता है. वे यह भी कहते हैं कि जिसने जीवन में कभी तीर्थयात्रा का प्रयास नहीं किया, आत्मचिंतन नहीं किया, और फिर भी अहंकार से सिर ऊंचा रखता है, वह भी गीदड़ समान है. यहां तीर्थ का अर्थ केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि से भी है.

धरती पर बोझ क्यों?

विदुर नीति के अनुसार जो व्यक्ति न दान करता है, न सेवा, न धर्म का पालन, और फिर भी अभिमान से भरा रहता है, वह समाज पर बोझ है. उन्होंने ऐसे आचरण को बेहद नीच बताया है. ऐसे इंसान के होने या न होने से समाज में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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