Unknown Vedic Gods: दुल्हनों को सुरक्षित घर पहुंचाते हैं ये देवता, खोई चीज पाने के लिए की होती है पूजा

Unknown Vedic Gods: पूषन या पूषा वैदिक काल के प्रमुख देवता माने जाते हैं. ग्रंथों में इन्हें मार्गदर्शन, सुरक्षा और समृद्धि का देवता कहा गया है. विवाह, यात्रा और खोई चीज पाने के लिए इनकी पूजा की जाती थी. आइए जानते हैं, इनसे जुड़ी रोचक बातें.

pushan-dev

Unknown Vedic Gods: हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवता हैं, यह हम सभी सुनते और पढ़ते आए हैं, लेकिन यह गलत नहीं है क्योंकि हिन्दू धर्म के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में कई कोटि यानी अनेक प्रकार के देवताओं की बात की गई है. आज भले हम राम, कृष्ण, शिव, विष्णु, लक्ष्मी, गणेश और हनुमान को सबसे अधिक जानते और पूजते हैं, लेकिन वैदिक काल में ऐसे अनेक देवता भी पूजे जाते थे, जिसे आज बहुत कम लोग ही जानते हैं.

विज्ञापन

ऐसे ही एक देवता है पूषन या पूषा. ये वैदिक काल के एक सबसे प्रमुख देवता हैं. ये मार्गदर्शन, सुरक्षा और समृद्धि का देवता हैं. इनकी उपासना विशेष तौर पर विवाह, यात्रा और खोई हुई चीजों की प्राप्ति के लिए की जाती थी. आइए जानते हैं, पूषन (पूषा) देवता से जुड़ी रोचक बातें.

विज्ञापन

सही रास्ता दिखाना

पूषन देवता का सबसे पहली बार उल्लेख ऋग्वेद में हुआ है. उन्हें यात्रियों और पशुओं का रक्षक माना गया है. कहते हैं, जो लोग लंबी यात्रा पर निकलते थे, वे पूषन की पूजा जरूर करते थे, ताकि सुरक्षित रहें. वे भटके हुए लोगों और पशुओं को सही रास्ता दिखाते थे. यही कारण है कि उन्हें पशुओं को ढूंढने वाला देवता भी कहा गया है.

विज्ञापन

दुल्हनों के रक्षक

वैदिक विवाह मंत्रों में पूषन देवता का विशेष उल्लेख मिलता है. प्राचीन काल में लोगों का मानना था कि वे दुल्हन को सुरक्षित रूप से उसके नए घर तक पहुंचाते हैं. रास्ते में कोई बाधा न आए, कोई अनिष्ट न हो, यह सब पूषन देव देखते थे. आपको बता दें कि शादी के मौके पर विशेष रूप से उनकी प्रार्थना की जाती थी.

विज्ञापन

खोई चीज पाने की प्रार्थना

वैदिक देवता पूषन के प्रति लोगों की काफी निष्ठा थी. लोग पूषन देव से खोई हुई वस्तु या भटके हुए पशु को वापस पाने के लिए प्रार्थना करते थे. विशेष किसान और चरवाहे लोग अपने खेतों में खोए बैल, भैंस, बकरियों और भेड़ों को ढूंढने के लिए याद करते थे. लोगों का दृढ़ विश्वास था कि देवता पूषन हर खोई चीज को उसके मालिक तक पहुंचा देते हैं.

बकरी एक रथवाले देवता

पूषन देवता की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान यह थी कि उनका रथ घोड़ों द्वारा नहीं बल्कि बकरियों द्वारा खींचा जाता था. उनका यह रूप पशुओं का संरक्षक के रूप में स्थापित करता है. प्राचीन काल में जब लोगों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर थी, तब वे अपने पशुधन की सुरक्षा के लिए पूषन (पूषा) की ही पूजा करते थे.

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ