Aaj ka Suvichar: चाणक्य नीति आचार्य कौटिल्य की रचना है. चूंकि उनके पिता का नाम चणक था, इसलिए उन्हें चाणक्य भी कहा जाता है और उनकी नीतियों को चाणक्य नीति. आचार्य चाणक्य की नीतियों की सबसे खास बात ये है है कि ये जीवन की नैतिक शिक्षा है, जो सबके लिए और हर युग-समय में उपयोगी है. यही कारण है उनकी बातें, सीख और नीतियां आज भी पढ़ी, सुनी और मानी जाती है. आचार्य चाणक्य ने कहा है कि जीवन में 4 प्रकार के लोगों से हमेशा दूर-दूर ही रहना चाहिए, वरना आप खुद ही अपने जीवन में दुष्ट, कष्ट को बुलावा देंगे. आइए जानते हैं, ये 4 लोग कौन-से हैं?
कथनी-करनी में रखने वाले
आचार्य चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ में लिखा है कि जो लोग कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं यानी जिनकी कथनी और करनी में अंतर होता है, वे काफी खतरनाक होते हैं. ऐसे लोगों से हमेशा सावधान रहना चाहिए, वरना आप कभी भी धोखा खा सकते हैं.
मीठा बोलने वाले धोखेबाज
हर जगह ऐसे कई लोग होते हैं, जो आपके सामने तारीफ करेंगे और पीठ पीछे आपके विरुद्ध षडयन्त्र रचने से गुरेज नहीं करते हैं. आचार्य चाणक्य कहते हैं, ऐसे लोग विष-सम याने जहर के समान जहरीले होते हैं. इनसे दूर रहने रहने में ही भलाई है.
मूर्ख और अज्ञानी
आचार्य चाणक्य ने बताया है कि भूल से भी मूर्ख व्यक्ति से मित्रता नहीं रखनी चाहिए, इससे भले बुद्धिमान शत्रु अच्छे होते हैं. वे कहते हैं, ऐसे लोगों को ज्ञान देना या समझना अपना सिर फोड़ने जैसा है. इनसे हमेशा दुख और अपमान ही हाथ लगता है.
दुष्ट स्वभाव के लोग
चाणक्य नीति के अनुसार, जो लोग हमेशा ईर्ष्या, लालच और नेगेटिविटी से भरे होते हैं, उनसे न तो कोई मतलब रखना चाहिए, न ही उनसे कोई काम लेना चाहिए और न ही उन पर दया दिखानी चाहिए. इन लोगों से किसी भी प्रकार से संबंध रखना सीधे तौर पर विपत्ति को बुलाने जैसा है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।