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Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

Bhog ke Niyam: भगवान की पूजा में बीज वाले फलों को केवल धोकर साबुत चढ़ाना कभी कभी पुण्य की जगह दोष का भागी बना सकता है. आइए जानते हैं, हिन्दू धर्म में बीज वाले फलों को अर्पित किए जाने के नियम क्या है?

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Bhog ke Niyam: हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा में भोग लगाने महत्व बहुत अधिक है। इसमें भी फल अधिक अर्पित किए जाते हैं। लेकिन फल को लेकर अनजाने में वैसी भूल हो जाती है, पुण्य की जगह की अनकही दोष का भागी बना सकता है। इसमें भी बीज वाले फलों, जैसी- पपीता, संतरा, सेब, अनार, नाशपाती, बब्बूगोसा, नाक, खरबूज या तरबूज की आती है, तो व्रतराज आदि धर्म ग्रंथों में बेहद स्पष्ट नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं, फल को बाजार से लाने के बाद केवल धोकर चढ़ाने से भोग नहीं लग जाता है, कहीं ये लापरवाही खुशियों के लिए संकट न बन जाएं?

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कड़े बीज वाले फल

जब हम खुद हम को और अपने अतिथि को पूरा पपीता या खरबूज-तरबूज खाने के लिए नहीं देते हैं, तो भगवान को इस प्रकार से कोई फल का भोग कैसे पेश कर सकते हैं। इसलिए जब कोई ऐसा फल भगवान को अर्पित करें, तो उसका बीज निकालकर और काटकर चढ़ाना चाहिए। भूल से भी इन फलों को कभी पूरा साबुत नहीं चढ़ाना चाहिए।

छोटे बीज वाले फल

अनार, संतरा, मौसम्बी, सेब आदि छोटे बीज वाले फलों को भी साबुत चढ़ाने के बजाय सही से सलीके से अर्पित करना चाहिए। संतरा-मौसम्बी के बीज निकाल के फांक में चढ़ाना चाहिए। अनार के दाने निकालकर चढ़ाना उत्तम है। इसी प्रकार, सेब, बब्बूगोसा और नाशपाती के बीज को निकालकर चढ़ाना चाहिए।

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आम, केला और अंगूर फल के नियम

पूजा के फलों में आम, केला और अंगूर का विशेष स्थान है। इन बीज वाले फलों को हमेशा साबुत ही अर्पित करना चाहिए। इन्हें विशेष परिस्थितियों में ही काटकर अर्पित करना चाहिए। अंगूर को प्रायः दाना-दाना धोकर कटोरे में सलीके से अर्पित करना चाहिए। अमरूद को भी साबुत चढ़ा सकते हैं, लेकिन इसे सही से साफ कर लेना चाहिए।

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भोग के इन नियमों का रखें ध्यान

  • फल काटने के चाकू, हंसिया जैसे साधन शुद्ध और साफ होने चाहिए। ये तामसिक चीजें काटने वाली नहीं होनी चाहिए।
  • फल को ताजा ही काटकर चढ़ाना चाहिए। काटने से इसे फल को अवश्य धो लेना चाहिए। जो फल छीलकर काटने वाले हैं, उसे छील लेना चाहिए। बहुत देर पहले कटे फल नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • भगवान को फल का भोग लगाने के लिए फल को हमेशा कांसा, पीतल, तांबा, सोना, चांदी और मिट्टी से शुद्ध और साफ बर्तनों में ही रखकर अर्पित करना चाहिए।
  • पूजा के भोग में सड़े-गले, दागदार, पक्षियों और कीड़ों द्वारा खाए गए फलों इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु और उनके रूपों जैसे सत्यनारायण, राम, कृष्ण, वामन आदि को हमेशा तुलसी दल के फल का भोग लगाना चाहिए। ध्यान रहे कि शिवजी और गणेशजी को तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Sep 10, 2026 12:15 AM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20+ वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है। वे स्वयं वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और एक सक्रिय ज्योतिष हैं। वे साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं और वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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