Mata Temple Story: बिहार के दरभंगा जिले में माता काली का एक मंदिर है। यह मंदिर रामेश्वरी श्यामा माई मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह माता काली के बहुत बड़े भक्त हुआ करते थे। जब उनकी मृत्यु हो गई तो यहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया था। बाद में उस स्थान पर माता काली को समर्पित एक मंदिर का निर्माण करवाया गया। इस मंदिर का वर्णन मिथिला रामायण में भी पढ़ने को मिलता है।
कहां है ये अनोखा मंदिर?
यह मंदिर दरभंगा के यूनिवर्सिटी कैंपस में स्थित है। यहां रोज हजारों की संख्या में माता का दर्शन करने आते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि नवरात्रि के दौरान यहां जो भी भक्त माता की पूजा अर्चना करता है, उसकी सारी मुरादें पूरी हो जाती है। यहां सदियों से माता को पशु की बलि दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि माता पशुबलि से प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सारे कष्ट दूर कर देती हैं। यह मंदिर पहले तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध हुआ करता था। लेकिन बाद में यहां तंत्र साधना को वर्जित कर दिया गया।
चिता पर बना है ये मंदिर
इतिहासकारों का मानना है कि मां काली को समर्पित यह मंदिर महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता पर बनाया गया है। उस समय यह स्थान श्मशान भूमि हुआ करता था। इस श्मशान भूमि में दरभंगा राजघराने के लोगों का मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार किया जाता था। सबसे हैरानी की बात यह है कि शास्त्रों में श्मशान घाट में कोई भी शुभ काम करना वर्जित बताया गया है, लेकिन इस मंदिर में शादी, मुंडन और उपनयन जैसे शुभ कार्य सालों भर होते हैं।
श्यामा माई से जुड़ी कथा
दरभंगा स्थित श्यामा माई मंदिर का वर्णन मिथिला रामायण में पढ़ने को मिलता है। मिथिला रामायण में बताया गया है कि सहस्रानन रावण का बड़ा भाई था। रावण वध के पश्चात माता सीता ने प्रभु श्री राम से कहा, स्वामी अभी ये युद्ध समाप्त नहीं हुआ है। जब तक आप सहस्रानन का वध नहीं कर देते तब तक आप विजेता नहीं हो सकते। माता सीता के कहने पर श्री राम सहस्रानन से युद्ध करने निकल पड़ते हैं। युद्ध में सहस्रानन के बाण से प्रभु श्री राम घायल हो जाते हैं। यह देख माता सीता क्रोधित होकर सहस्रानन का अंत कर देती है।
ये भी पढ़ें-Kalyug Story: श्री कृष्ण के देह त्यागने के बाद कैसे हुई कलियुग की शुरुआत?
मिथिला रामायण में बताया गया है कि क्रोध से माता सीता का रंग काला हो गया था। सहस्रानन के वध के बाद भी जब सीता जी का क्रोध शांत नहीं हुआ तो, भगवान शिव उनके पास आते हैं और उन्हें शांत होने को कहते हैं। परन्तु माता सीता काली रूप में भगवान शिव के सीने पर अपना पैर रख देती हैं। इसके बाद माता सीता शांत हो जाती है। माता सीता के इसी रूप की पूजा दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में की जाती है।
ये भी पढ़ें- Navratri 2024: बिहार के इस मंदिर में देवी के धड़ की होती है पूजा, कालिदास को यहीं हुई थी ज्ञान की प्राप्ति!
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है
संबंधित खबरें
Kaalchakra: कैसा होता है सपने में पितरों का दिखना? पंडित सुरेश पांडेय से समझें पितरों के इशारे
48 mins agoPitru Paksha 2026: श्राद्ध का भोजन कराने के लिए कौवा ना मिले तो क्या करें? जानिए धार्मिक मान्यताएं
1 hr agoShardiya Navratri 2026: 11 अक्टूबर को होगा शारदीय नवरात्रि का आरंभ, जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
3 hrs agoSarva Pitru Amavasya 2026: पितृ दोष से मुक्ति के लिए सबसे उत्तम है सर्वपितृ अमावस्या, जानिए पितरों को प्रसन्न करने के उपाय
20 hrs agoPitru Paksha 2026: जीवन में सुख-समृद्धि के लिए पितृ पक्ष में करें श्री पितृ चालीसा का पाठ, यहां पढ़ें लिरिक्स
21 hrs agoKaalchakra: कैसे चंदन लगाने से मिलेगा भाग्य का साथ? पंडित सुरेश पांडेय से जानिए उपाय
23 hrs agoChhath Puja 2026 Date: कब है छठ पूजा? जानिए नहाय-खाय, खरना से लेकर अर्घ्य तक, यहां जानिए सही तारीख
23 hrs agoIndira Ekadashi 2026: 6 या 7 अक्टूबर कब है इंदिरा एकादशी? जानिए पितृ पक्ष की सही तारीख और महत्व
1 day agoSharad Purnima 2026: 25 या 26 अक्टूबर, कब है शरद पूर्णिमा? इस दिन क्यों बनाया जाता है खीर का प्रसाद, जानिए
1 day agoVideo: पितृ पक्ष में भूलकर भी ना करें ये गलतियां, वरना झेलने पड़ेंगे अशुभ परिणाम, जानिए
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines