Kaalchakra: घर की इस दीवार से जुड़ा है सेहत और किस्मत का वास्तु कनेक्शन, जानें उपाय
Kaalchakra Today: क्या घर की गलत दिशा आपकी सेहत पर असर डाल रही है? वास्तु में इसका खास कनेक्शन बताया गया है कि घर की कौन सी दीवार और कोना परेशानी बढ़ा सकता है. आइए कालचक्र कार्यक्रम में पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं, सेहत और सकारात्मक ऊर्जा के लिए आसान वास्तु उपाय.
Edited By : Shyamnandan|Updated: Aug 21, 2026 12:55
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कालचक्र में जानें घर की कौन सी दिशा, दीवार और कोना सेहत पर असर डालता है। (फोटो क्रेडिट: AI | News24)
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Kaalchakra Today: क्या आप जानते हैं कि आपकी बीमारी का कारण सिर्फ खानपान या लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि आपका घर भी हो सकता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दिशाएं और कोने सीधे आपकी सेहत पर असर डालते हैं. गलत वास्तु न सिर्फ मानसिक तनाव बढ़ाता है, बल्कि शारीरिक बीमारियों को भी न्योता देता है. आज के कालचक्र कार्यक्रम में पंडित सुरेश पांडेय ने बताया कि घर की कौन सी दीवार और कौन सा कोना आपको बीमार बना रहा है और कैसे कुछ आसान वास्तु उपायों से आप अपनी सेहत सुधार सकते हैं? आइए जानते हैं, विस्तार से…
वास्तु क्यों है जरूरी?
पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, वास्तु शास्त्र प्रकृति के अनुकूल व्यवस्था का नाम है. जब हमारा घर प्रकृति के नियमों के अनुसार बनता है, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है. भारतवर्ष में सारी नदियां, नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर, पश्चिम से पूर्व और दक्षिण से उत्तर की ओर बहती हैं. इसका मतलब है कि पृथ्वी दक्षिण और पूरब की ओर नीची है, जबकि उत्तर और पश्चिम ऊंची है. अगर आपका घर दक्षिण और पश्चिम में ऊंचा और पूरब-उत्तर में नीचा है, तो यह वास्तु सम्मत है. इसके उलट होने पर जीवनभर उलझन बनी रहती है.
ईशान कोण: उत्तर-पूर्व का यह सबसे ऊर्जावान स्थान है. सूरज की पहली किरण यहीं आती है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करती है. इसलिए यहां पूजा घर बनाना शास्त्र सम्मत है. अग्नि कोण: दक्षिण-पूर्व की इस दिशा रसोई घर यानी किचन होनी चाहिए. सूर्य की रोशनी दिन में इस स्थान पर आती है, जिससे खाना शुद्ध और पौष्टिक बनता है. वायव्य कोण: उत्तर-पश्चिम के इस कोने में कभी सूर्य की रोशनी नहीं आती, इसलिए इसे ‘रुदन कोण’ या ‘शोक भवन’ कहा गया है. यहां रहने वाले लोग अक्सर दुखी और तनावग्रस्त रहते . नैऋत्य कोण: दक्षिण-पश्चिम का यह स्थान भारी और स्थिर होना चाहिए. यहां घर के मुखिया या बुजुर्गों का कमरा बनाना उचित है.
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बीमारियों का वास्तु कनेक्शन
जोड़ों का दर्द, गठिया, सर्वाइकल: अगर आपको इन समस्याओं का सामना है, तो देखें कि आपके घर की दीवारों में कोई दरार तो नहीं है. दरारें ठीक करवाएं और वहां झरने या पहाड़ के पोस्टर लगाएं. सिरदर्द और माइग्रेन: अपने बेडशीट को हल्के रंग का इस्तेमाल करें. डायबिटीज: बेडरूम के उत्तर-पश्चिम दिशा में नीले फूलों का गुलदस्ता रखें और समय-समय पर बदलते रहें. हाई ब्लड प्रेशर: घर के ब्रह्म स्थान में कोई स्टोर रूम न बनाएं और न ही लोहे का जाल लगवाएं. उत्तर-पूर्व दिशा में नीले फूलों वाले पौधे लगाएं. अस्थमा: ड्राइंग रूम की पश्चिमी दीवार पर पेंडुलम वाली सफेद या गोल्डन घड़ी लगाएं.
घर में हिंसक जानवरों, जैसे- शेर, बाघ, चीता आदि की तस्वीरें न लगाएं. भोजन करते समय मुंह पूर्व दिशा में रखें और थाली दक्षिण-पूर्व दिशा में. उत्तर-पूर्व दिशा में कभी शौचालय न बनवाएं. पूजा के समय दीपक को दक्षिण दिशा में रखें. रात में कपड़े घर के बाहर न सुखाएं. घर के ब्रह्म स्थान में भारी फर्नीचर न रखें, इससे ऊर्जा का प्रवाह रुकता है. बाथरूम और रसोई के दरवाजे आमने-सामने हों तो बाथरूम का दरवाजा बंद रखें.
वास्तु अनुसार दवाई कहां रखें?
पंडित सुरेश पांडेय के मुताबिक, उत्तर-पूर्व दिशा दवाइयों के लिए सबसे अच्छी मानी गई है. पूर्व दिशा भी फायदेमंद है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने से शरीर पर सकारात्मक असर होता है. एलोपैथिक दवाई को पश्चिम दिशा की अलमारी में रखें, जबकि आयुर्वेदिक टॉनिक उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए. जड़ी-बूटियों को पूर्व दिशा के मध्य में रखें.
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देखें वीडियो
कालचक्र प्रोग्राम की पूरी वीडियो को आप यूट्यूब पर यहां देख सकते हैं: