Kaalchakra: जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को घर लाना है बेहद शुभ , पंडित सुरेश पांडेय से जानें सभी जरूरी नियम और पूजा का सही तरीका

Kaalchakra Today: जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को घर लाना बेहद शुभ माना जाता है। पंडित सुरेश पांडेय से जानिए जानें किस धातु की मूर्ति स्थापित करें और उनकी सेवा के क्या नियम हैं और पूजा की सही विधि और जरूरी सावधानियां क्या क्या हैं?

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जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को घर लाना शुभ है. ((फोटो क्रेडिट: AI | News24))

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Kaalchakra Today: ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी का व्रत और पूजा 4 सितंबर, 2026 को रखा जाएगा। इस दिन लड्डू गोपाल की हर विधि से पूजा-अर्चना होती है। बहुत से लोग जिनके घरों में लड्डू गोपाल नहीं हैं, इसी दिन लड्डू गोपाल जी को अपने घर लाते हैं। आइए पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं, घर में किस धातु के लड्डू गोपाल की मूर्ति स्थापित करना चाहिए, उनकी सेवा कैसे करनी चाहिए, उनके पूजा की सही विधि क्या है, ताकि जन्माष्टमी के व्रत का समुचित लाभ मिल सके।

कैसी होनी चाहिए लड्डू गोपाल की मूर्ति?

पंडित सुरेश पांडेय बताते हैं कि यदि आपके मन में इस जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को घर लाने की सदिच्छा है, तो यह उत्तम बात है। आपको प्रायः 2 से 4 इंच के आकार की प्रतिमा घर लानी चाहिए। आपको बता दें कि इससे बड़ी मूर्ति लड्डू गोपाल की रोजाना की सेवा के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती है। जहां तक धातु की बात है, तो यह मूर्ति पीतल, अष्टधातु और चांदी की सबसे शुभ होती है।

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लड्डू गोपाल से बात करें

पंडित जी के मुताबिक, लड्डू की सेवा केवल भक्ति या पूजा की चीज नहीं है। आपको हर रोज लड्डू गोपाल का स्पर्श करना चाहिए और वह सुखद होना चाहिए। खुद केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखें, बल्कि लड्डू गोपाल से बात करें। उन्हें अपने दुख और सुख बताएं, अपनी समस्याएं उनसे शेयर करें। ऐसा करने से जीवन में जल्दी ही सकारात्मक बदलाव आते हैं।

जन्माष्टमी पर करें पूजा

जन्माष्टमी के दिन नहा-धोकर पवित्र हो लें। पूजा का संकल्प लें। ‘ॐ क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप करें। लड्डू गोपाल जी पंचामृत से अच्छे से स्नान करवाएं। फिर के दक्षिणवर्ती शंख में गंगाजल, दूध, केसर और चंदन सुगंध से मिश्रित जल से आचमन करें। उन्हें नए कपड़े पहनाएं, मोर मुकुट से सजाएं, एक बांसुरी दें, फिर सफेद चंदन का तिलक लगाएं। यदि लड्डू गोपाल की स्थापना कर रहे हैं, तो पूरी रात जागरण करें और ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण’ का जाप करें। आप ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप भी करें।

क्या है लड्डू गोपाल को 56 भोग का रहस्य?

कहते हैं, जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को 7 दिनों तक अपनी छोटी उंगली पर उठाया तो वे भूखे-प्यासे ही रहे थे। इस प्रकार, दिन के हर प्रहर जो कि कुल 8 प्रहर या पहर का होता है, उसे 7 दिन से गुना करने पर 56 योग आता है। इसलिए लड्डू गोपाल को हर पहर के हिसाब से छप्पन प्रकार के भोग लगाए जाते हैं।

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देखें वीडियो

कालचक्र प्रोग्राम की पूरी वीडियो को आप यूट्यूब पर यहां देख सकते हैं:

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष, वास्तु और धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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