Kaalchakra: ग्रह, वास्तु और पितृ दोष से बचने के लिए कौन-सा रुद्राक्ष पहनें? पंडित सुरेश पांडेय से जानें उपाय
Kaalchakra Today: सनातन धर्म के लोगों के लिए रुद्राक्ष का खास महत्व है, जिसे भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. रुद्राक्ष को गले या हाथ में धारण करना शुभ होता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है. चलिए प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं कि कब कौन-से रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए. साथ ही आपको रुद्राक्ष से जुड़े नियमों के बारे में जानने को मिलेगा.
Kaalchakra Today 1 December 2025: रुद्राक्ष को देवों के देव महादेव का प्रतीक माना जाता है, जो भगवान शिव के आंसू से उत्पन्न एक फल की गुठली है. हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का उपयोग सुरक्षा कवच के तौर पर किया जाता है. इसे गले व हाथ में धारण करने से शिव जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही व्यक्ति नकारात्मक शक्तियों से बचा रहता है. हालांकि, कुछ लोग रुद्राक्ष को धारण करने की जगह उस पर मंत्र जाप भी करते हैं.
शास्त्रों में करीब 21 प्रकार के रुद्राक्ष का उल्लेख मिलता है. इसमें 1 से लेकर 21 प्रकार शामिल हैं. हर एक रुद्राक्ष की अपनी खासियत है, जिसे राशि व परेशानी के अनुसार धारण करना शुभ होता है. आज 1 दिसंबर 2025 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको बताएंगे कि कब कौन-सा रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है.
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ग्रह दोष से बचने के लिए कौन-सा रुद्राक्ष पहनें?
शनि की महादशा में 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए. इसके अलावा शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में भी आप 7 मुखी रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं.
जिन महिलाओं की कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति कमजोर है जिसके कारण उनका गर्भपात हो रहा है, उन्हें 3 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.
जिन लोगों की कुंडली में राहु या केतु का दोष है, उन्हें 1 मुखी, 3 मुखी, 8 मुखी या 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.
वास्तु-पितृ दोष से मुक्ति के लिए कौन-सा रुद्राक्ष पहनें?
जिन लोगों के घर में वास्तु दोष है, उन्हें अपने मकान के मुख्य द्वार पर रुद्राक्ष बांधना चाहिए.
पितृ दोष के बुरे प्रभाव से बचने के लिए 5 मुखी, 7 मुखी या 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है.