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Sita Navami Vrat Katha: मिथिला का सूखा बना वरदान! कलश से प्रकट हुईं माता सीता, पढ़ें राजा जनक की लाडली देवी जानकी की अवतरण कथा

Sita Navami 2026 Katha: देशभर में आज 25 अप्रैल 2026 को सीता नवमी का पर्व मनाया जा रहा है, जो कि राम जी की पत्नी देवी सीता को समर्पित है. आज यहां पर आपको सीता नवमी के महत्व और व्रत की कथा के बारे में पता चलेगा, जिसे पढ़ने से विशेष लाभ होता है.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Apr 25, 2026 06:53
Sita Navami 2026 Vrat Katha
Credit- AI Gemini

Sita Navami 2026 Vrat Katha: सनातन धर्म के लोगों के लिए सीता नवमी के दिन का खास महत्व है, जिस दिन माता सीता के जन्म का उत्सव मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार, प्राचीन काल में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता का जन्म हुआ था. इस बार आज 25 अप्रैल 2026 को सीता नवमी यानी जानकी जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. मान्यता है कि सीता नवमी के दिन देवी सीता यानी जानकी माता की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. साथ ही हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है.

हालांकि, पूजा-पाठ के अलावा व्रत और व्रत की कथा पढ़ने से भी सीता नवमी के दिन भक्तों को विशेष लाभ होता है. यहां पर आप माता सीता के अवतरण की कथा पढ़ सकते हैं.

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सीता नवमी की व्रत कथा

राजा जनक के राज्य में पड़ा अकाल

पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में एक बार मिथिला के राजा जनक के राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया था, जिससे सभी लोग परेशान थे. राजा जनक को जब ये बात पता चली तो उन्होंने राज्य के महान ऋषियों को दरबार में बुलाया और उनसे समाधान खोजने को कहा. ऋषियों ने राजा से कहा कि अगर आप खुद खेत जोतेंगे तो इंद्र देव की कृपा से आपके राज्य को अकाल से मुक्ति मिल सकती है.

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बीच में ही रुक गई खुदाई

राजा ने बिना वक्त गवाए हल चलाना शुरू कर दिया. इस दौरान उनका हल किसी धातु से टकरा गया और वहीं रुक गया, जिसके बाद उन्होंने उस जगह की खुदाई कराई. खुदाई के दौरान एक कलश निकला, जिसके ऊपर एक सुंदर सी कन्या थी. राजा जनक की कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण उन्होंने उस कन्या को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया.

दूर हुआ अकाल

कहा जाता है कि राजा जनक ने जैसी ही उस कन्या को अपनी गोद में उठाया, वैसे ही मिथिला में जोर की बारिश हुई, जिससे राज्य का अकाल दूर हो गया. बता दें कि उस दिन खुदाई के दौरान राजा जनक को कोई साधारण कन्या नहीं मिली थी, बल्कि माता सीता मिली थी, जिसके बाद से हर साल उस तिथि पर उनका जन्मदिन मनाने की प्रथा शुरू हो गई.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 25, 2026 06:53 AM

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