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Hindu Dharma: पिता के जीवित रहते पुत्र के लिए ये काम 5 करना है वर्जित, जानें क्या कहता है शास्त्र

Hindu Dharma: हिन्दू धर्म में पिता का सम्मान और परिवार की व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है. शास्त्रों में पिता के जीवित रहते पुत्र के लिए 5 काम वर्जित बताए गए हैं. क्या आप जानते हैं, ऐसे 5 काम कौन-से हैं और क्यों इन्हें करना सही नहीं माना जाता है? जानिए विस्तार से…

Hindu Dharma: हिन्दू धर्म में परिवार और पिता का स्थान बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. शास्त्रों में जीवन के हर पहलू के लिए नियम दिए गए हैं. खासकर पुत्र के लिए पिता के सम्मान और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक माना गया है. मनु स्मृति और गरुड़ पुराण जैसे धर्मग्रंथों में स्पष्ट निर्देश हैं कि पिता के जीवित रहते कुछ काम पुत्र को नहीं करने चाहिए. यह केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी उचित है. आइए जानते हैं, शास्त्रों में पिता के जीवित रहते पुत्र के लिए कौन-सी 5 काम करना है कार्य वर्जित बताया गया है?

तर्पण और पिंडदान न करना

पिता के रहते पुत्र को पूर्वजों का तर्पण या पिंडदान स्वयं नहीं करना चाहिए. इस कर्म का पहला अधिकार पिता का होता है. अगर पुत्र यह काम कर देता है तो परंपरा और समाज के नियमों का उल्लंघन माना जाता है. पितृकर्म में अनुशासन बनाए रखना परिवार की शांति और सम्मान के लिए जरूरी है.

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पिता का स्थान न लेना

घर के मुखिया या यज्ञ, पूजा आदि के मुख्य कर्म पिता ही करते हैं. पुत्र को पिता के रहते इन कर्मों का नेतृत्व नहीं करना चाहिए. ऐसा करना न केवल धार्मिक दृष्टि से गलत है बल्कि पारिवारिक व्यवस्था में भी अव्यवस्था पैदा कर सकता है.

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मूंछ नहीं कटवाना

पुराने समय में पुत्र अपने जीवनकाल में केवल पिता के निधन के बाद ही मूंछ कटवाता था. मूंछ पिता और पुत्र के बीच सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी. इसलिए पिता के रहते पुत्र को अपनी मूंछ कटवाने से बचना चाहिए.

दान में अपना नाम न लिखवाना

पिता के रहते यदि पुत्र कोई दान करता है तो उसे पिता के नाम पर करना चाहिए. स्वयं के नाम पर दान करना उचित नहीं माना जाता. यह नियम परिवार में आदर और सामाजिक सम्मान बनाए रखने के लिए है.

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कार्यक्रम में अपना नाम आगे न लिखें

किसी भी अवसर या कार्यक्रम में पिता के रहते पुत्र का नाम पहले नहीं लिखा जाना चाहिए. सबसे पहले पिता का नाम आए और उसके बाद पुत्र का. इससे परिवार में सामंजस्य और परंपरा का पालन होता है.

आपको बता दें, आज हजारों वर्षों से हिन्दू धर्म में ये नियम केवल रस्म-रिवाज नहीं बल्कि परिवार में सम्मान, अनुशासन और संतुलन बनाए रखने के लिए हैं. छोटे-छोटे नियम पालन करने से जीवन में आदर और सामाजिक प्रतिष्ठा बनी रहती है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Jan 08, 2026 10:46 PM

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Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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