Kaalchakra: गुप्त नवरात्रि में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानिए 10 महाविद्याओं का महत्व, पूजा विधि और मंत्र
Kaalchakra Today: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुरू हो चुकी है, आज के कालचक्र में पंडित सुरेश पांडेय से जानिए इस नवरात्रि की पूजा विधि, 10 महाविद्याओं का महत्व, साधना के सही नियम और जरूरी सावधानियां. साथ ही जानें, कौन-सी गलतियां पूजा का फल कम कर सकती हैं?
Written By: Shyamnandan|Updated: Jul 16, 2026 14:51
Edited By : Shyamnandan|Updated: Jul 16, 2026 14:51
Share :
---विज्ञापन---
Kaalchakra Today: कल से 15 जुलाई, 2026 से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुरू हो चुकी है. अगर आप मां शक्ति की पूजा करते हैं, तो ये पूरे साल का सबसे खास समय माना जाता है. मान्यता है कि इन 9 दिनों में पूरे मन और सही तरीके से की गई साधना आपकी मनोकामनाएं पूरी करने में मदद करती है. लेकिन आपको बता दें कि इस पूजा-पाठ में लापरवाही या नियमों की अनदेखी करने से उसका पूरा फल नहीं मिलता है. आइए, आज के कालचक्र प्रोग्राम में पंडित सुरेश पांडेय से विस्तार में जानते हैं, गुप्त नवरात्रि का मतलब, 10 महाविद्याओं का महत्व, सही पूजा विधि और वो जरूरी बातें जिनका ध्यान रखना चाहिए.
गुप्त नवरात्रि क्या है?
सनातन धर्म में सालभर में चार नवरात्रि आती हैं. चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो लगभग हर कोई जानता है, लेकिन आषाढ़ और माघ महीने की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. इसका फोकस बड़े आयोजन या दिखावे पर नहीं, बल्कि शांत मन से पूजा, ध्यान, जप और एकांत में साधना करने पर होता है. जहां बाकी नवरात्रि में नवदुर्गा की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की आराधना का खास महत्व माना जाता है. इस साल ये नवरात्रि 15 जुलाई से 23 जुलाई तक रहेगी.
महाविद्या यानी ऐसा दिव्य ज्ञान जो इंसान को आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ाए. मां शक्ति के ये 10 स्वरूप अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं.
---विज्ञापन---
मां काली: ये अहंकार खत्म करने और बुराइयों का अंत करने वाली महाशक्ति हैं. मां तारा: ये डर और मुश्किलों से बाहर निकालने वाली महादेवी हैं. मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी): ये सुख, सौंदर्य और समृद्धि देने वाली शक्ति हैं. मां भुवनेश्वरी: ये पूरी सृष्टि की जननी मानी जाती हैं. मां छिन्नमस्ता: ये त्याग और आत्मबल की देवी हैं. मां त्रिपुर भैरवी: ये अनुशासन और आंतरिक शक्ति देने वाली शक्ति हैं. मां धूमावती: ये कठिन समय में सही रास्ता दिखाने वाली शक्ति हैं. मां बगलामुखी: ये विरोधियों और नकारात्मक शक्तियों को शांत करने वाली महाशक्ति हैं. मां मातंगी: ये वाणी, कला और ज्ञान की देवी हैं. मां कमला: धन, खुशहाली और समृद्धि देने वाली देवी हैं..
गुप्त नवरात्रि में पूजा कैसे करें?
इस नवरात्रि की सबसे खास बात है कि अपनी साधना को जितना हो सके निजी रखें. इसका दिखावा करने से बचें. इन दिनों मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज और बाकी तामसिक चीजों से दूरी रखें. दुर्गा सप्तशती, काली चालीसा, चामुंडा स्तोत्र और अर्गला स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है. वहीं ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’ मंत्र का 108 बार जाप भी बेहद फलदायी माना गया है.
– अपनी साधना और पूजा का प्रचार न करें. – मन, बोल और व्यवहार को जितना हो सके साफ रखें. – आलस्य, दिन में ज्यादा सोना और तामसिक भोजन से बचें. – अगर 10 महाविद्याओं जैसी विशेष तंत्र साधना करना चाहते हैं, तो गुरु के मार्गदर्शन में ही करें. – जरूरतमंदों की मदद करें और पशु-पक्षियों के लिए पानी जैसी छोटी-छोटी सेवा जरूर करें.
श्रद्धा और विश्वास है सबसे जरूरी
गुप्त नवरात्रि सिर्फ पूजा या मंत्र जाप का समय नहीं, बल्कि अपने स्वभाव को बेहतर बनाने का भी मौका है. कोशिश करें कि चमड़े की चीजों का इस्तेमाल न करें और किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाएं. अगर पूरा दुर्गा सप्तशती पाठ संभव न हो, तो ‘सप्तशोकी दुर्गा’ का पाठ भी किया जा सकता है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा, साफ मन और बिना दिखावे की गई साधना ही सबसे ज्यादा फल देती है. ऐसे में इन 9 दिनों को पूरी भक्ति और सादगी के साथ बिताएं और मां शक्ति का आशीर्वाद पाने की कोशिश करें.