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Shiv Panchakshar Stotra Lyrics: भोलेबाबा की कृपा पाने के लिए पढ़ें शिव पंचाक्षर स्तोत्र, मिलेगा सुख और सुकून!

Shiv Panchakshar Stotra Lyrics: भगवान शिव को भोलेबाबा कहा जाता है क्योंकि वो अपने भक्तों को कष्ट में नहीं देख पाते हैं. वो काफी दयालु और सरल स्वभाव के हैं, जो कि बहुत ही जल्दी अपने भक्तों की पुकार सुन लेते हैं. यदि आप भी भोलेबाबा को खुश करना चाहते हैं तो नियमित रूप से शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं, जिसके लिरिक्स, महत्व और लाभ आदि के बारे में यहां पर बताया गया है.

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Shiv Panchakshar Stotra Lyrics: शिव पंचाक्षर स्तोत्र एक महाशक्तिशाली व दिव्य स्तोत्र है, जो कि पूर्ण रूप से भोलेबाबा को समर्पित है. भारत के महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने प्राचीन काल में खुद इस स्तोत्र की रचना की थी ताकि वो शिव के महान गुणों की स्तुति कर सकें. इसमें उन्होंने भोलेबाबा के स्वरूप और उनके ‘ॐ नमः शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र के 5 अक्षरों की स्तुति के रूप में वर्णन किया है. मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन्हें भोलेबाबा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही व्यक्ति को सुख व सुकून मिलता है. चलिए अब जानते हैं शिव पंचाक्षर स्तोत्र के लिरिक्स के बारे में.

शिव पंचाक्षर स्तोत्र

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय,
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:।
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय,
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:।
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय,
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:।
वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय,
चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय:।
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय,
दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै य काराय नम: शिवाय:।
पंचाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेत शिव सन्निधौ,
शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते।
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय,
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे ‘न’ काराय नमः शिवायः।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Frequently Asked Questions

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त और संध्या काल में शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करना शुभ होता है.
शास्त्रों में बताया गया है कि एक दिन में 1 से 11 बार शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है.
कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे कि सूतक, पातक और मासिक धर्म के दौरान शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ नहीं करना चाहिए.
First published on: May 11, 2026 03:24 PM

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About the Author

Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. पिछले 3 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रही हैं. न्यूज 24 से जुड़ने से पहले निधि जैन दिल्ली प्रेस संस्थान में कार्यरत थीं. निधि ने Guru Jambheshwar University, Hisar Haryana से BJMC (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई की है.

📧 Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

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