आखिर क्यों मुगलों ने खीरे और मूली पर लगा दिया था बैन? जानिए महल के अंदर इन्हें ना ले जाने की वजह

क्या आप जानते हैं कि मुगल काल में खीरा और मूली जैसी आम सब्जियों को शाही महल के अंदर ले जाना मना था? आखिर इन सब्जियों पर बैन क्यों लगाया गया था और इसके पीछे क्या वजह थी? आइए जानते हैं इस दिलचस्प इतिहास के बारे में.

Why Did the Mughals Ban Cucumbers

Credit: AI

विज्ञापन

भारतीय इतिहास में मुगल शासकों की पहचान सिर्फ उनकी भव्य इमारतों, शानदार लाइफस्टाइल और शाही दावतों के लिए ही नहीं, बल्कि खान-पान से जुड़े सख्त नियमों के लिए भी की जाती है. मुगल महलों की रसोई में हर खाने-पीने की चीज़ को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती थी. इन्हीं नियमों में एक दिलचस्प नियम खीरे और मूली जैसी साधारण सब्जियों से भी जुड़ा था. इतिहासकारों और कई ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, मुगल महलों के अंदर खीरा और मूली ले जाने पर रोक थी. पहली नजर में ये फैसला अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक खास वजह मानी जाती है.

ये भी पढ़ें: Indian Citizenship: मुगलों के राज में भारतीय नागरिक होने का सबूत कैसे दिया जाता था? काफी चौंकाने वाला है जवाब

विज्ञापन

बदबू थी सबसे बड़ी वजह

कहा जाता है कि मूली और खीरा खाने के बाद सांस और शरीर से तेज गंध आने लगती है. मुगल दरबार में शिष्टाचार और सफाई का खास ध्यान रखा जाता था. बादशाह और शाही परिवार के सामने मौजूद होने वाले लोगों के लिए साफ-सफाई और अच्छी खुशबू बेहद जरूरी मानी जाती थी. इसी वजह से इन सब्जियों को महल के भीतर लाने या खाने से बचने की सलाह दी जाती थी, ताकि दरबार का माहौल खुशबूदार और व्यवस्थित बना रहे.

शाही रसोई के थे कड़े नियम

मुगल काल की शाही रसोई में खाना तैयार करने के लिए सैकड़ों रसोइए काम करते थे. खाने की क्वालिटी, स्वाद और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता था. कई बार खाने को परोसने से पहले उसका स्वाद और सुरक्षा भी जांची जाती थी ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो. मुगल शासक अपने खाने को लेकर काफी सतर्क रहते थे. दरबार के हकीम ये तय करते थे कि कौन-सी चीज़ कब और कितनी मात्रा में खानी चाहिए. ऐसे खाद्य पदार्थ जिनसे बदबू या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती थी, उन्हें शाही वातावरण के लिए सही नहीं माना जाता था.

क्या ये पूरे साम्राज्य में लागू था?

इतिहासकारों का मानना है कि ये प्रतिबंध आम जनता पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से शाही महल और दरबार के नियमों तक सीमित था. आम लोग अपने दैनिक भोजन में खीरा, मूली और बाकी सब्जियों का सामान्य रूप से इस्तेमाल करते थे. ये व्यवस्था शाही अनुशासन और दरबारी शिष्टाचार बनाए रखने के मकसद से अपनाई गई थी. मुगल काल की ये परंपरा बताती है कि उस दौर में सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि भोजन से जुड़ा व्यवहार, स्वच्छता और दरबारी अनुशासन भी बेहद खास माना जाता था. हालांकि आज खीरा और मूली को पौष्टिक सब्जियों में गिना जाता है.

विज्ञापन

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ