अंग्रेजों के जमाने वाला भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन, कुछ कदम दूर है बॉर्डर; दिखाई देता है दूसरे मुल्क का झंडा

देश का आखिरी रेलवे स्टेशन जो है बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब. अंग्रेजों के जमाने वाले इस स्टेशन से पैदल ही जा सकते हैं बॉर्डर पर और देख सकते हैं दूसरे देश का नजारा. जानिए क्या है इसका इतिहास और रोचक तथ्य.

Indian Railway Station

देश के कई ऐसे रेलवे स्टेशन हैं, जो अपनी विभिन्न खासियतों के बारे में मशहूर हैं. क्या आप जानते हैं देश में अंग्रेजों के जमाने का एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है, जिसे भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन कहा जाता है. ये रेलवे स्टेशन बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब है. खास बात तो ये है कि स्टेशन से कुछ कदम दूर ही भारत की सीमा है, जहां से आप पड़ोसी मुल्क का झंडा देख सकते हैं.

विज्ञापन

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेलवे नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. इसकी कुल लंबाई लगभग 69 हजार किलोमीटर और रनिंग ट्रैक लंबाई लगभग 109,700 किलोमीटर से ज्यादा का है. आपके मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर इतना बड़ा रेल नेटवर्क है, अलग-अलग हिस्सों में फैला है, तो इसका अंत कहां होता है?

विज्ञापन

भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन

इस सवाल के जवाब की बात करें तो उत्तर में जम्मू एवं कश्मीर का बारामुला, दक्षिण में तमिलनाडु का कन्याकुमारी, पश्चिम में गुजरात का ओखा जो द्वारका के पास और पूर्व में पश्चिम बंगाल का सिंहाबाद देश के अंतिम रेलवे स्टेशन हैं. लेकिन आज हम देख से जिस आखिरी रेलवे स्टेशन की बात कर रहे हैं, वो पश्चिम बंगाल का सिंहाबाद रेलवे स्टेशन है. पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हबीबपुर ब्लॉक स्थित रेलवे स्टेशन सिंहाबाद बांग्लादेश की सीमा के करीब है.

विज्ञापन

यह स्टेशन ऐतिहासिक रूप से बेहद खास है, इस स्टेशन पर आज भी गियर, बैरियर और टिकट जैसे उपकरण वैसे ही मौजूद हैं, जैसे ब्रिटिश काल में हुआ करते थे. इसका इस्तेमाल अब आम यात्रियों के लिए नहीं किया जाता है. कोई भी पैसेंजर ट्रेन यहां नहीं रुकती और इसका टिकट काउंटर भी बंद रहता है.

विज्ञापन

क्या आज भी होता है इसका इस्तेमाल?

इस स्टेशन का उपयोग मालगाड़ियों के आने जाने और ट्रांजिट के लिए किया जाता है. यह सिंहाबाद-रोहनपुर रेल मार्ग पर है जो भारत- बांग्लादेश के बीच माल ढुलाई का प्रमुख केंद्र है. इस रेलवे मार्ग का इस्तेमाल पड़ोसी मुल्क नेपाल के साथ व्यापारिक समझौतों के तहत किया जाता है. विभाजन के बाद इस मार्ग से लोगों की आवाजाही बंद हो गयी लेकिन इसका महत्व कम नहीं हुआ. 1978 में भारत-बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत स्टोन चिप्स का ट्रांसपोर्ट इस मार्ग से किया जाता है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ