Add News 24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

Aarti Chalisa

Laddu Gopal Chalisa । लड्डू गोपाल चालीसा: जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी… Shri Laddu Gopal Chalisa Lyrics In Hindi

Shri Laddu Gopal Chalisa In Hindi: लड्डू गोपाल को भगवान कृष्ण का बाल स्वरूप माना जाता है, जिनकी पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति आती है. साथ ही जीवन की तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलती है. लड्डू गोपाल का विशेष आशीर्वाद पाने के लिए आप उन्हें समर्पित चालीसा का पाठ कर सकते हैं. चलिए जानते हैं श्री लड्डू गोपाल चालीसा के सही लिरिक्स के बारे में.

Author
Written By: Nidhi Jain Updated: Nov 17, 2025 09:39
Shri Laddu Gopal Chalisa In Hindi
Credit- Social Media

Shri Laddu Gopal Chalisa Lyrics In Hindi: कृष्ण जी को एक प्रमुख हिंदू देवता माना जाता है, जो कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं. कृष्ण जी को प्रेम, करुणा, धर्म, परोपकार, सामाजिक न्याय और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, जिनके बाल स्वरूप की पूजा लड्डू गोपाल के रूप में की जाती है. भक्त लड्डू गोपाल को अपने घर का सदस्य मानते हैं और पूरी श्रद्धा भाव से उनकी सेवा करते हैं. यहां तक कि उन्हें स्नान कराते हैं, सुबह-शाम भोग लगाते हैं और बच्चे की तरह उनसे लाड भी लड़ाते हैं.

यदि आप भी लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं तो उस दौरान उन्हें समर्पित चालीसा का पाठ जरूर करें. इससे न सिर्फ आपको सकारात्मकता का अहसास होगा, बल्कि कृष्ण जी की कृपा से स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. यहां पर आप लड्डू गोपाल चालीसा के सही लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

---विज्ञापन---

श्री लड्डू गोपाल चालीसा (Shri Laddu Gopal Chalisa In Hindi)

।।दोहा।।

श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल।
वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल।।

---विज्ञापन---

।।चौपाई।।

जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी, दुष्ट दलन लीला अवतारी।
जो कोई तुम्हरी लीला गावै, बिन श्रम सकल पदारथ पावै।।
श्री वसुदेव देवकी माता, प्रकट भये संग हलधर भ्राता।
मथुरा सों प्रभु गोकुल आये, नन्द भवन मे बजत बधाये।।
जो विष देन पूतना आई, सो मुक्ति दै धाम पठाई।
तृणावर्त राक्षस संहारयौ, पग बढ़ाय सकटासुर मार्यौ।।
खेल खेल में माटी खाई, मुख मे सब जग दियो दिखाई।
गोपिन घर घर माखन खायो, जसुमति बाल केलि सुख पायो।।
ऊखल सों निज अंग बँधाई, यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई।
बका असुर की चोंच विदारी, विकट अघासुर दियो सँहारी।।
ब्रह्मा बालक वत्स चुराये, मोहन को मोहन हित आये।
बाल वत्स सब बने मुरारी, ब्रह्मा विनय करी तब भारी।।
काली नाग नाथि भगवाना, दावानल को कीन्हों पाना।
सखन संग खेलत सुख पायो, श्रीदामा निज कन्ध चढ़ायो।।
चीर हरन करि सीख सिखाई, नख पर गिरवर लियो उठाई।
दरश यज्ञ पत्निन को दीन्हों, राधा प्रेम सुधा सुख लीन्हों।।
नन्दहिं वरुण लोक सों लाये, ग्वालन को निज लोक दिखाये।
शरद चन्द्र लखि वेणु बजाई, अति सुख दीन्हों रास रचाई।।
अजगर सों पितु चरण छुड़ायो, शंखचूड़ को मूड़ गिरायो।
हने अरिष्टा सुर अरु केशी, व्योमासुर मार्यो छल वेषी।।
व्याकुल ब्रज तजि मथुरा आये, मारि कंस यदुवंश बसाये।
मात पिता की बन्दि छुड़ाई, सान्दीपन गृह विघा पाई।।
पुनि पठयौ ब्रज ऊधौ ज्ञानी, पे्रम देखि सुधि सकल भुलानी।
कीन्हीं कुबरी सुन्दर नारी, हरि लाये रुक्मिणि सुकुमारी।।
भौमासुर हनि भक्त छुड़ाये, सुरन जीति सुरतरु महि लाये।
दन्तवक्र शिशुपाल संहारे, खग मृग नृग अरु बधिक उधारे।।
दीन सुदामा धनपति कीन्हों, पारथ रथ सारथि यश लीन्हों।
गीता ज्ञान सिखावन हारे, अर्जुन मोह मिटावन हारे।।
केला भक्त बिदुर घर पायो, युद्ध महाभारत रचवायो।
द्रुपद सुता को चीर बढ़ायो, गर्भ परीक्षित जरत बचायो।।
कच्छ मच्छ वाराह अहीशा, बावन कल्की बुद्धि मुनीशा।
ह्वै नृसिंह प्रह्लाद उबार्यो, राम रुप धरि रावण मार्यो।।
जय मधु कैटभ दैत्य हनैया, अम्बरीय प्रिय चक्र धरैया।
ब्याध अजामिल दीन्हें तारी, शबरी अरु गणिका सी नारी।।
गरुड़ासन गज फन्द निकन्दन, देहु दरश धु्रव नयनानन्दन।
देहु शुद्ध सन्तन कर सग्ड़ा, बाढ़ै प्रेम भक्ति रस रग्ड़ा।।
देहु दिव्य वृन्दावन बासा, छूटै मृग तृष्णा जग आशा।
तुम्हरो ध्यान धरत शिव नारद, शुक सनकादिक ब्रह्म विशारद।।
जय जय राधारमण कृपाला, हरण सकल संकट भ्रम जाला।
बिनसैं बिघन रोग दुःख भारी, जो सुमरैं जगपति गिरधारी।।
जो सत बार पढ़ै चालीसा, देहि सकल बाँछित फल शीशा।

।।छन्द।।

गोपाल चालीसा पढ़ै नित, नेम सों चित्त लावई।
सो दिव्य तन धरि अन्त महँ, गोलोक धाम सिधावई।।
संसार सुख सम्पत्ति सकल, जो भक्तजन सन महँ चहैं।
ट्टजयरामदेव’ सदैव सो, गुरुदेव दाया सों लहैं ।।

।।दोहा।।

प्रणत पाल अशरण शरण, करुणा-सिन्धु ब्रजेश।
चालीसा के संग मोहि, अपनावहु प्राणेश।।

ये भी पढ़ें- Shri Radha Chalisa । श्री राधा चालीसा: जय वृषभानु कुंवरि श्री श्यामा… Shree Radha Chalisa Lyrics In Hindi

श्री लड्डू गोपाल चालीसा पढ़ने के नियम (Shri Laddu Gopal Chalisa Niyam)

स्नान आदि कार्य करने के बाद शुद्ध वस्त्र पहनने के बाद लड्डू गोपाल की पूजा करें. लड्डू गोपाल का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें शुद्ध वस्त्र पहनाने के बाद श्रृंगार करें. फिर उन्हें भोग लगाएं और उनके सामने घी का दीपक जलाएं. अब पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके लड्डू गोपाल चालीसा का पाठ करें.

ये भी पढ़ें- Shiv Chalisa | शिव चालीसा: जय गिरिजा पति दीन दयाला… Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Nov 17, 2025 09:39 AM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.