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Dhanvantari Chalisa Lyrics: जय धन्वन्तरि जय रोगारी… रोजाना पढ़ें धन्वंतरि चालीसा, शारीरिक से लेकर मानसिक तनाव रहेगा दूर

Dhanvantari Ji Chalisa Lyrics: भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है, जिनकी कृपा से गंभीर से गंभीर रोग से मुक्ति मिल सकती है. चलिए जानते हैं धन्वंतरि जी को खुश करने के लिए रोजाना पढ़ने वाले चालीसा के लिरिक्स के बारे में. साथ ही आपको धन्वंतरि चालीसा के पाठ से जुड़े नियमों के बारे में पता चलेगा.

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Shri Dhanvantari Chalisa Lyrics: भगवान धन्वंतरि को हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक माना जाता है, जिनकी पूजा आयुर्वेद के जनक और देवताओं के चिकित्सक के रूप में की जाती है. माना जाता है कि जो लोग नियमित रूप से धन्वंतरि जी की पूजा करते हैं, उन्हें शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है. साथ ही जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है क्योंकि धन्वंतरि जी को श्रीहरि का ही एक अवतार माना जाता है, जो समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर निकले थे.

यदि आप भी धन्वंतरि जी को खुश करना चाहते हैं तो रोजाना उन्हें समर्पित चालीसा का पाठ कर सकते हैं. यहां पर आपको धन्वंतरि जी को समर्पित चालीसा के सही लिरिक्स और नियमों के बारे में जानने को मिलेगा.

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भगवान धन्वंतरि की चालीसा

श्री गणेशाय नमः

॥दोहा॥
करूं वंदना गुरू चरण रज, ह्रदय राखी श्री राम।
मातृ पितृ चरण नमन करूं, प्रभु कीर्ति करूँ बखान
तव कीर्ति आदि अनंत है, विष्णुअवतार भिषक महान।
हृदय में आकर विराजिए, जय धन्वंतरि भगवान॥

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॥ चौपाई ॥
जय धनवंतरि जय रोगारी। सुनलो प्रभु तुम अरज हमारी॥
तुम्हारी महिमा सब जन गावें। सकल साधुजन हिय हरषावे॥
शाश्वत है आयुर्वेद विज्ञाना। तुम्हरी कृपा से सब जग जाना॥
कथा अनोखी सुनी प्रकाशा। वेदों में ज्यूँ लिखी ऋषि व्यासा॥
कुपित भयऊ तब ऋषि दुर्वासा। दीन्हा सब देवन को श्रापा॥
श्री हीन भये सब तबहि। दर दर भटके हुए दरिद्र हि॥
सकल मिलत गए ब्रह्मा लोका। ब्रह्म विलोकत भये हुँ अशोका॥
परम पिता ने युक्ति विचारी। सकल समीप गए त्रिपुरारी॥
उमापति संग सकल पधारे। रमा पति के चरण पखारे॥
आपकी माया आप ही जाने। सकल बद्धकर खड़े पयाने॥
इक उपाय है आप ही बोलें। सकल औषध सिंधु में घोलें॥
क्षीर सिंधु में औषध डारी। तनिक हंसे प्रभु लीला धारी॥
मंदराचल की मथानी बनाई। दानवो से अगुवाई कराई॥
देव जनो को पीछे लगाया। तल पृष्ठ को स्वयं हाथ लगाया॥
मंथन हुआ भयंकर भारी। तब जन्मे प्रभु लीलाधारी॥
अंश अवतार तब आप ही लीन्हा। धनवंतरि तेहि नामहि दीन्हा॥
सौम्य चतुर्भुज रूप बनाया। स्तवन सब देवों ने गाया॥
अमृत कलश लिए एक भुजा। आयुर्वेद औषध कर दूजा॥
जन्म कथा है बड़ी निराली। सिंधु में उपजे घृत ज्यों मथानी॥
सकल देवन को दीन्ही कान्ति। अमर वैभव से मिटी अशांति॥
कल्पवृक्ष के आप हैं सहोदर। जीव जंतु के आप हैं सहचर॥
तुम्हरी कृपा से आरोग्य पावा। सुदृढ़ वपु अरु ज्ञान बढ़ावा॥
देव भिषक अश्विनी कुमारा। स्तुति करत सब भिषक परिवारा॥
धर्म अर्थ काम अरु मोक्षा। आरोग्य है सर्वोत्तम शिक्षा॥
तुम्हरी कृपा से धन्व राजा। बना तपस्वी नर भू राजा॥
तनय बन धन्व घर आये। अब्ज रूप धनवंतरि कहलाये॥
सकल ज्ञान कौशिक ऋषि पाये। कौशिक पौत्र सुश्रुत कहलाये॥
आठ अंग में किया विभाजन। विविध रूप में गावें सज्जन॥
अथर्व वेद से विग्रह कीन्हा। आयुर्वेद नाम तेहि दीन्हा॥
काय, बाल, ग्रह, उर्ध्वांग चिकित्सा। शल्य, जरा, दृष्ट्र, वाजी सा॥
माधव निदान, चरक चिकित्सा। कश्यप बाल, शल्य सुश्रुता॥
जय अष्टांग जय चरक संहिता। जय माधव जय सुश्रुत संहिता॥
आप है सब रोगों के शत्रु। उदर नेत्र मष्तिक अरु जत्रु॥
सकल औषध में है व्यापी। भिषक मित्र आतुर के साथी॥
विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि ज्ञान। सकल औषध ज्ञान बखानि॥
भारद्वाज ऋषि ने भी गाया। सकल ज्ञान शिष्यों को सुनाया॥
काय चिकित्सा बनी एक शाखा। जग में फहरी शल्य पताका॥
कौशिक कुल में जन्मा दासा। भिषकवर नाम वेद प्रकाशा॥
धन्वंतरि का लिखा चालीसा। नित्य गावे होवे वाजी सा॥
जो कोई इसको नित्य ध्यावे। बल वैभव सम्पन्न तन पावें॥

॥ दोहा ॥
रोग शोक सन्ताप हरण, अमृत कलश लिए हाथ।
जरा व्याधि मद लोभ मोह, हरण करो भिषक नाथ॥

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॥ इति धन्वंतरि चालीसा सम्पूर्ण ॥

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धन्वंतरि जी की चालीसा के पाठ से जुड़े नियम

  • सुबह जल्दी उठकर या शाम में प्रदोष काल में ही चालीसा का पाठ करें.
  • चालीसा पढ़ने से पहले धन्वंतरि जी की पूजा करें.
  • चालीसा पढ़ते समय अपने सामने धन्वंतरि जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  • चालीसा पढ़ने के बाद पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए माफी मांगें.
  • जल्दबाजी में चालीसा न पढ़ें और न ही शब्दों का गलत उच्चारण करें.
  • आसन पर बैठकर ही चालीसा पढ़ें.
  • बीच में चालीसा को न छोड़ें.
  • चालीसा पढ़ते समय मन को एकाग्र रखें और किसी से भी बात न करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 13, 2026 02:24 PM

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About the Author

Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में न्यूज राइटिंग से की थी, जिसके बाद देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर व्यापक अध्ययन किया. अब पिछले 4 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन में काम कर रही हैं.

📧 Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

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