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Gaurish Ashtakam Lyrics: बेवजह की चिंताएं नहीं करती परेशान, गौरीश अष्टकम का पाठ मोह-माया से रखता है दूर

Gaurish Ashtakam Lyrics, Niyam & Benefits: क्या आप भी छोटी-छोटी बातों पर टेंशन लेने लगते हैं या फालतू काम में उलझे रहते हैं? अगर हां, तो ऐसी स्थिति में आपको नियमित रूप से गौरीश अष्टकम का पाठ करना चाहिए. इससे आप मोह-माया में फंसने से बचे रहेंगे. चलिए अब जानें गौरीश अष्टकम के महत्व, लिरिक्स, लाभ और नियम आदि के बारे में.

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Gaurish Ashtakam Lyrics, Niyam & Benefits: देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित गौरीश अष्टकम एक प्राचीन व प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें कुल 8 श्लोक हैं. इसमें देवी गौरी और शिव जी की स्तुति की गई है, जिसके पाठ से व्यक्ति मोह-माया, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहता है व सही रास्ते पर चलता है. साथ ही इसमें शिव जी के गुण, रूप, करुणा, महिमा और भक्ति आदि का उल्लेख किया गया है. यहां पर आप गौरीश अष्टकम के लिरिक्स और इस स्तोत्र से जुड़ी अन्य बातों के बारे में जान सकते हैं.

गौरीश अष्टकम के लिरिक्स

भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मंदमते। (ध्रुवपदम)
जलभवदुस्तरजलधिसुतरणं ध्येयं चित्ते शिवहरचरणम्।
अन्योपायं न हि न हि सत्यं गेयं शंकर शंकर नित्यम्। भज.।। 1।।
दारापत्यं क्षेत्रं वित्तं देहं गेहं सर्वमनित्यम्।
इति परिभावय सर्वमसारं गर्भविकृत्या स्वप्नविचारम्। भज.।। 2।।
मलवैचित्ये पुनरावृत्तिः पुनरपि जननीजठरोत्पत्तिः।
पुनरप्याशाकुलितं जठरं कि नहि मुञ्चसि कथयेश्चित्तम्। भज.।। 3।।
मायाकल्पितमैन्द्रं जालं न हि तत्सत्यं दृष्टिविकारम्।
ज्ञाते तत्त्वे सर्वमसारं मा कुरु मा कुरु विषयविचारम्। भज.।। 4।।
रज्जौ सर्पभ्रमणारोपस्तद्वद्ब्रह्मणि जगदारोपः।
मिथ्यामायामोहविकारं मनसि विचारय बारम्बारम्। भज.।। 5।।
अध्वरकोटीगंगागमनं कुरुते योगं चेन्द्रियदमनम्।
ज्ञानविहीनः सर्वमतेन न भवति मुक्तो जन्मशतेन। भज.।। 6।।
सोऽहं हंसो ब्रह्मौवाहं शुद्धानन्दस्तत्त्वपरोऽहम्।
अद्वैतोऽहं संगविहीने चेन्द्रिय आत्मनि निखिले लीने। भज.।। 7।।
शंकरकिकर मा कुरु चिन्तां चिंतामणिना विरचितमेतत्।
यः सद्भक्त्या पठति हि नित्यं ब्रह्मणि लीनो भवति हि सत्यम्। भज.।। 811
।। इति गौरीश अष्टकम सम्पूर्णम्।।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Frequently Asked Questions

आदि शंकराचार्य ने प्राचीन काल में गौरीश अष्टकम की रचना की थी.
आदि शंकराचार्य ने भक्तों को सांसारिक मोह-माया से मुक्त करने और उनके मन में शिव-पार्वती जी की भक्ति को जागृत करने के लिए गौरीश अष्टकम की रचना की थी.
सुबह जल्दी या प्रदोष काल में ही स्वस्थ अवस्था में गौरीश अष्टकम का पाठ करना चाहिए. इसके अलावा जल्दबाजी में या बिना अर्थ जाने इस स्तोत्र का पाठ न करें. साथ ही पाठ करने से पहले शिव-पार्वती जी का स्मरण करें और उनकी पूजा जरूर करें.
First published on: Jun 01, 2026 02:39 PM

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Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. पिछले 3 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रही हैं. न्यूज 24 से जुड़ने से पहले निधि जैन दिल्ली प्रेस संस्थान में कार्यरत थीं. निधि ने Guru Jambheshwar University, Hisar Haryana से BJMC (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई की है.

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