Gaurish Ashtakam Lyrics, Niyam & Benefits: देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित गौरीश अष्टकम एक प्राचीन व प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें कुल 8 श्लोक हैं. इसमें देवी गौरी और शिव जी की स्तुति की गई है, जिसके पाठ से व्यक्ति मोह-माया, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहता है व सही रास्ते पर चलता है. साथ ही इसमें शिव जी के गुण, रूप, करुणा, महिमा और भक्ति आदि का उल्लेख किया गया है. यहां पर आप गौरीश अष्टकम के लिरिक्स और इस स्तोत्र से जुड़ी अन्य बातों के बारे में जान सकते हैं.
गौरीश अष्टकम के लिरिक्स
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मंदमते। (ध्रुवपदम)
जलभवदुस्तरजलधिसुतरणं ध्येयं चित्ते शिवहरचरणम्।
अन्योपायं न हि न हि सत्यं गेयं शंकर शंकर नित्यम्। भज.।। 1।।
दारापत्यं क्षेत्रं वित्तं देहं गेहं सर्वमनित्यम्।
इति परिभावय सर्वमसारं गर्भविकृत्या स्वप्नविचारम्। भज.।। 2।।
मलवैचित्ये पुनरावृत्तिः पुनरपि जननीजठरोत्पत्तिः।
पुनरप्याशाकुलितं जठरं कि नहि मुञ्चसि कथयेश्चित्तम्। भज.।। 3।।
मायाकल्पितमैन्द्रं जालं न हि तत्सत्यं दृष्टिविकारम्।
ज्ञाते तत्त्वे सर्वमसारं मा कुरु मा कुरु विषयविचारम्। भज.।। 4।।
रज्जौ सर्पभ्रमणारोपस्तद्वद्ब्रह्मणि जगदारोपः।
मिथ्यामायामोहविकारं मनसि विचारय बारम्बारम्। भज.।। 5।।
अध्वरकोटीगंगागमनं कुरुते योगं चेन्द्रियदमनम्।
ज्ञानविहीनः सर्वमतेन न भवति मुक्तो जन्मशतेन। भज.।। 6।।
सोऽहं हंसो ब्रह्मौवाहं शुद्धानन्दस्तत्त्वपरोऽहम्।
अद्वैतोऽहं संगविहीने चेन्द्रिय आत्मनि निखिले लीने। भज.।। 7।।
शंकरकिकर मा कुरु चिन्तां चिंतामणिना विरचितमेतत्।
यः सद्भक्त्या पठति हि नित्यं ब्रह्मणि लीनो भवति हि सत्यम्। भज.।। 811
।। इति गौरीश अष्टकम सम्पूर्णम्।।
ये भी पढ़ें- Numerology: पिछले जन्म की गई गलतियां अब न दोहराएं, मूलांक से जानें Karmic Lessons
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Gaurish Ashtakam Lyrics, Niyam & Benefits: देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित गौरीश अष्टकम एक प्राचीन व प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें कुल 8 श्लोक हैं. इसमें देवी गौरी और शिव जी की स्तुति की गई है, जिसके पाठ से व्यक्ति मोह-माया, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहता है व सही रास्ते पर चलता है. साथ ही इसमें शिव जी के गुण, रूप, करुणा, महिमा और भक्ति आदि का उल्लेख किया गया है. यहां पर आप गौरीश अष्टकम के लिरिक्स और इस स्तोत्र से जुड़ी अन्य बातों के बारे में जान सकते हैं.
गौरीश अष्टकम के लिरिक्स
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मंदमते। (ध्रुवपदम)
जलभवदुस्तरजलधिसुतरणं ध्येयं चित्ते शिवहरचरणम्।
अन्योपायं न हि न हि सत्यं गेयं शंकर शंकर नित्यम्। भज.।। 1।।
दारापत्यं क्षेत्रं वित्तं देहं गेहं सर्वमनित्यम्।
इति परिभावय सर्वमसारं गर्भविकृत्या स्वप्नविचारम्। भज.।। 2।।
मलवैचित्ये पुनरावृत्तिः पुनरपि जननीजठरोत्पत्तिः।
पुनरप्याशाकुलितं जठरं कि नहि मुञ्चसि कथयेश्चित्तम्। भज.।। 3।।
मायाकल्पितमैन्द्रं जालं न हि तत्सत्यं दृष्टिविकारम्।
ज्ञाते तत्त्वे सर्वमसारं मा कुरु मा कुरु विषयविचारम्। भज.।। 4।।
रज्जौ सर्पभ्रमणारोपस्तद्वद्ब्रह्मणि जगदारोपः।
मिथ्यामायामोहविकारं मनसि विचारय बारम्बारम्। भज.।। 5।।
अध्वरकोटीगंगागमनं कुरुते योगं चेन्द्रियदमनम्।
ज्ञानविहीनः सर्वमतेन न भवति मुक्तो जन्मशतेन। भज.।। 6।।
सोऽहं हंसो ब्रह्मौवाहं शुद्धानन्दस्तत्त्वपरोऽहम्।
अद्वैतोऽहं संगविहीने चेन्द्रिय आत्मनि निखिले लीने। भज.।। 7।।
शंकरकिकर मा कुरु चिन्तां चिंतामणिना विरचितमेतत्।
यः सद्भक्त्या पठति हि नित्यं ब्रह्मणि लीनो भवति हि सत्यम्। भज.।। 811
।। इति गौरीश अष्टकम सम्पूर्णम्।।
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