Aaj ka Suvichar: पं. श्रीराम शर्मा आचार्य गायत्री परिवार संस्था के संस्थापक हैं, जिनके पूरी दुनिया में करोड़ों फॉलोअर हैं. इस संस्था का उनकी नेक शिक्षाओं ने कईयों की जिंदगी बदल दी है. उन्होंने अखंड ज्योति मैगजीन की शुरुआत की थी. अपने आलेखों में उन्होंने कहा है कि कुछ आदतें ऐसी होती हैं, जो सफलता को उन लोगों के पास भी फटकने नहीं देती हैं. आइए जानते हैं पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के सद्विचार कि ये लोग कौन हैं, इसके क्या नुकसान हैं और इन्हें इससे मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए?
कौन हैं ये लोग?
आचार्य जी के अनुसार, सफलता उनका वरण है, जो इस योग्य होते हैं और सफलता के लिए सतत प्रयत्नशील होते हैं. लेकिन 3 प्रकार एक लोगों से सफलता हमेशा दूर रहती है. पहले प्रकार के लोग वो हैं, जो आलसी है. वे हर काम को टालते रहते हैं. दूसरे लोग वे हैं, जो दूसरों की बुराई में लगे रहते हैं, लेकिन इन्हें अपनी बुराई नहीं दिखती है. तीसरे लोग वे हैं, जो किए गए उपकार को भूल जाते हैं. दरअसल, ये तीनों आदतें इंसान को अंदर से खोखला कर देती हैं.
क्या है नुकसान?
आलसी और टालमटोल करने वाले लोगों के पास एक तो अवसर आती नहीं हैं और यदि आती भी है, तो अवसर उनके हाथ से निकल जाते हैं. कल पर टालने की प्रवृत्ति से उसकी हर योजना अधूरी रह जाती हैं. वहीं, जो दूसरों की बुराई में लगे रहते हैं, वे अपना ही समय और ऊर्जा नष्ट कर लेते हैं. उनकी इस आदत से लोग आजिज होकर छोड़ देते हैं और वे अकेले पड़ जाते हैं. जबकि, अपकारी और कृतघ्न लोग किसी से कभी संतुष्ट नहीं होते, उन्हें हर चीज में कमी नजर आती है. यही कारण है कि ये तीनों ही सफलता को अपनी ओर नहीं आने देते हैं.
मुक्ति का उपाय
आचार्य जी कहते हैं, आलस और टालमटोल छोड़ने के लिए हर काम का एक तय समय तय करना बेहद जरूरी है. उसे समय से कर लेने पर जल्द ही सफलता खिंची आएगी. जो लोग बुराई में लगे हैं, उनको अपनी यह आदत को दूर करने के लिए दिन में कम से कम 5 लोगों की अच्छाई गिननी चाहिए. जो किसी किये के उपकार नहीं मानते हैं, उनको रोज शाम को उन 3 चीजों का धन्यवाद करना चाहिए, उन्हें हासिल हुई हैं. ये छोटे-छोटे अभ्यास जीवन में बड़ा बदलाव लाते हैं.
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की अनमोल सीख
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपने उपदेशों और आलेखों में हमेशा अच्छी ही बातें की हैं. उनमें से कुछ सबसे महत्वपूर्ण हैं. एक, जो लोग सुबह जल्दी उठते हैं और अपने दिन की शुरुआत ध्यान या प्रार्थना से करते हैं, उनकी सफलता तय है. दो, समय की कीमत समझो, दूसरों के लिए दिल में प्रेम रखो, और जो मिला है उसका आभार मानो. यही सफलता का असली मंत्र है. यह देखा गया है कि इससे जिंदगी खुद ब खुद बदलने लगती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।