Aaj Ka Suvichar: यह एक बहुत पुरानी कहावत है कि जैसी संगत, वैसी ही राह, वैसा ही कर्म और वैसा ही फल. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में साफ कहा है कि कुछ लोगों का साथ इंसान को धीरे-धीरे नर्क में धकेल देता है. चाणक्य नीति के अनुसार, ऐसे लोगों से दूरी बनाने में ही भलाई है, क्योंकि हम जैसे लोगों के साथ रहते हैं, वैसे ही बन जाते हैं. आइए जानते हैं, i इस विचार में आचार्य चाणक्य की ये नीति जानते हैं कि वे 3 प्रकार के लोग कौन हैं, जिनकी संगत में रहना सबसे बड़ी मूर्खता है?
बुरे चरित्र वाले
जिन लोगों का चरित्र खराब हो, उनका साथ कभी फायदा नहीं देता. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बुरे चरित्र वाले व्यक्ति से जितनी दूर रहो, उतना अच्छा. ये लोग अपनी गंदी आदतें दूसरों में भी फैलाते हैं और धीरे-धीरे आपकी साख को मिट्टी में मिला देते हैं.
अकारण नुकसान पहुंचाने वाले
कुछ लोग बिना कोई वजह दूसरों को परेशान करते हैं. उन्हें दुख देने में मजा आता है. ऐसे निर्दयी स्वभाव के लोगों का साथ छोड़ने में देर न करें. आचार्य चाणक्य के अनुसार, ये आपकी खुशियां चुरा लेंगे और बाद में आपको ही दोषी ठहराएंगे.
गंदी जगहों पर रहने वाले
जो लोग गंदे या संदिग्ध स्थानों पर रहते हैं, उनकी आदतें और सोच भी वैसी ही हो जाती है. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऐसे लोगों से दोस्ती करना नर्क में वास करने जैसा है. ये न सिर्फ आपका समय बर्बाद करते हैं, बल्कि आपको भी गलत राह पर ले जाते हैं.
दोस्ती से पहले परख लो
आचार्य चाणक्य की एक और सीख यह है कि किसी से दोस्ती करने से पहले उसे अच्छी तरह परख लो. अगर उसमें कोई दोष है, तो रिश्ता आगे न बढ़ाओ. वरना नुकसान से बचना मुश्किल हो जाता है. एक दिन में कोई अपना नहीं बनता, और न ही कोई दुश्मन. सच्ची पहचान में समय लगता है.
अक्लमंदी यही है
होशमंद वही है जो समय रहते इन तीनों तरह के लोगों से अपना पल्ला झाड़ ले. हो सकता है वो बुरा मानें, रोएं-चिल्लाएं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. आचार्य चाणक्य की ये बातें आज भी बिल्कुल सच हैं- ‘तुम्हारा उठना-बैठना ही तुम्हें बताता है कि तुम कैसे हो. सोच-समझकर संगत करो.’ इसलिए बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि आपकी संगत ही आपकी पहचान है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।