भजन क्लबिंग क्या है? प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में किया जिक्र, जानिए क्या है यह ट्रेंड

What Is Bhajan Clubbing: भारत में तेजी से भजन क्लबिंग का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है. मेलबर्न में अपने भाषण के दौरान PM Modi ने भी भजन क्लबिंग का जिक्र किया है. यहां जानिए क्या है यह नया ट्रेंड.

PM Modi Bhajan Clubbing

भजन क्लबिंग क्या है?

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Bhajan Clubbing Meaning: क्लबिंग के बारे में तो आपने सुना ही होगा जहां क्लब में लड़के-लड़कियां जाकर अलग-अलग तरह के गानों पर नाचते-गाते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी भजन क्लबिंग के बारे में सुना है. एक जमाने में भजन-कीर्तन को बुजुर्गों का काम बताया जाता था लेकिन अब Gen Z तक भजन क्लबिंग को एंजॉय करते हैं. ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने भी भजन क्लबिंग का जिक्र किया है. ऐसे में यहां जानिए भजन क्लबिंग क्या है और इसका ट्रेंड इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है.

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भजन क्लबिंग क्या है | What Is Bhajan Clubbing

भजन क्लबिंग किसी क्लब या ओपन स्पेस में की जाती है. जिस तरह कॉन्सर्ट में अंधेरा होता है, धीमी लाइट होती है और स्पीकर पर तेज गाने बजते हैं बिल्कुल उसी तरह भजन क्लबिंग की जाती है. फर्क इतना है कि भजन क्लबिंग में जो गाने बजते हैं वो इलेक्ट्रो या पॉप लिरिक्स वाले गाने नहीं बल्कि सदियों से चले आ रहे हिंदू भक्ति गीत होते हैं जिन्हें आमतौर पर आपने मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में सुना होगा. जैसे-जैसे गाना बजता जाता है यानी भजन बजते हैं वैसे-वैसे भीड़ के हाथ हवा में उछकर तालियां बजा रहे होते हैं, पैर जमीन पर थिरकने लगते हैं और लोग भजन गाते हुए भक्ति के रंग में रंगने लगते हैं. कई बार भजन क्लबिंग में बड़े-बड़े स्पीकर पर रिकॉर्डेड म्यूजिक बजता है तो कभी लाइव म्यूजिक पर भजन क्लबिंग (Bhajan Jamming) का मजा लिया जाता है.

भजन क्लबिंग में नहीं होता एल्कोहल

भजन क्लबिंग की एक बड़ी शर्त यह है कि इसे भक्तिमय बनाए रखा जाए. इसीलिए भजन क्लबिंग के दौरान हर तरह के नशीले पदार्थ निषैध होते हैं. भारत ही नहीं बल्कि यूरोप और अमेरिका में भी भजन क्लबिंग का ट्रेंड चल पड़ा है और युवा खासतौर से ड्रग्स और एल्कोहल की तरफ पीठ करके इन भजन क्लबिंग या कॉन्सर्ट के लिए इकट्ठे हो रहे हैं.

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क्यों बढ़ रहा है भजन क्लबिंग का ट्रेंड

कहते हैं संगीत मन को सुकून देता है और इसीलिए लोग कॉन्सर्ट वगैरह में जाते हैं या अपने मनपसंद गाने सुनते हैं. ऐसे में भजन क्लबिंग ना सिर्फ मन को सुकून देती है बल्कि ऐसा महसूस होता है जैसे आप अपने ईश्वर के करीब आ रहे हैं. ईश्वर को आह्वाहन देती भजन क्लबिंग ना सिर्फ बड़ी उम्र के व्यक्तियों को बल्कि युवाओं को भी अपनी तरफ आकर्षित करती है. भजन क्लबिंग प्रार्थना और पार्टी का संगम लगती है और इसीलिए दुनियाभर में इसका ट्रेंड जोर पकड़ रहा है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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