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Rajasthan Waterfalls: राजस्थान में सिर्फ किले ही नहीं, ये 7 शानदार झरने भी हैं टूरिस्ट्स की पहली पसंद; जरूर करें एक्सप्लोर

Rajasthan Waterfalls: राजस्थान के किलों के अलावा यहां के 7 खूबसूरत और जादुई झरने आपका मन मोह लेंगे. मानसून में इन वॉटरफॉल्स की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली देखने लायक होती है.

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राजस्थान के 7 प्रमुख झरने और उनकी लोकेशन:

  • मेनाल झरना (चित्तौड़गढ़): इसे राजस्थान का ‘मिनी नियाग्रा’ कहते हैं, जो प्राचीन मंदिर के पास स्थित है.
  • गैपरनाथ झरना (कोटा): पहाड़ियों के बीच स्थित इस झरने तक सुंदर और छोटे ट्रेक के जरिए पहुँचा जाता है.
  • भीमलत झरना (बूंदी): यह 150 फीट की ऊंचाई से गिरता है और इसकी कहानी महाभारत के भीम से जुड़ी है.
  • चूलिया झरना (रावतभाटा): राणा प्रताप सागर बांध के पास स्थित यह झरना अपनी खास चट्टानों के लिए मशहूर है.
  • पड़ाझर महादेव (रावतभाटा): रामेश्वर महादेव गुफा मंदिर के पास घने जंगलों के बीच बसा एक शांत कोना है.
  • ध्रूड़िया झरना (माउंट आबू): एकमात्र हिल स्टेशन के घने जंगलों के बीच स्थित रोमांचक ट्रेकिंग पॉइंट है.
  • गर्भाजी झरना (अलवर): अरावली की सुंदर पहाड़ियों में सिलीसेढ़ झील के पास छुपा हुआ एक अद्भुत स्थल है.

Rajasthan Waterfalls: राजस्थान अपने भव्य किलों, आलीशान महलों और रंग-बिरंगे रेगिस्तान के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ऐतिहासिक राज्य में कई बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक झरने भी मौजूद हैं. मानसून के मौसम में जब इन झरनों के आस-पास की अरावली पहाड़ियां हरी-भरी चादर ओढ़ लेती हैं, तो यहाँ का नजारा किसी स्वर्ग जैसा लगने लगता है. चित्तौड़गढ़ का मेनाल, बूंदी का भीमलत, कोटा का गैपरनाथ और माउंट आबू का ध्रूड़िया झरना सैलानियों को शहरों की भीड़भाड़ से दूर एक बेहद शांत और सुकून भरा माहौल देते हैं.

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मेनाल झरने को राजस्थान का ‘मिनी नियाग्रा’ क्यों कहा जाता है?

अगर आप चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक स्थलों की सैर करने जा रहे हैं, तो आपको वहां के प्रसिद्ध मेनाल झरने का दीदार जरूर करना चाहिए. इस अद्भुत वॉटरफॉल को इसकी विशालता और तेज बहाव के कारण अक्सर राजस्थान का ‘मिनी नियाग्रा’ भी कहा जाता है. यह खूबसूरत झरना एक प्राचीन और ऐतिहासिक मेनाल मंदिर परिसर के बिल्कुल समीप स्थित है. खासकर बारिश के दिनों में जब पहाड़ियों का पानी एक बहुत ही तेज रफ्तार और गर्जना के साथ गहरी खाई में नीचे गिरता है, तो वहां उपस्थित पर्यटकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

कोटा के गैपरनाथ और बूंदी के भीमलत झरने

कोटा के पास पहाड़ियों के बीच छुपा गैपरनाथ झरना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जहाँ तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को एक रोमांचक छोटा ट्रेक करना पड़ता है. इसके पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर यहाँ के वातावरण को आध्यात्मिक और शांत बनाता है. वहीं दूसरी तरफ बूंदी का भीमलत झरना लगभग 150 फीट की ऊंचाई से गिरता है, जो नीचे एक बहुत ही सुंदर प्राकृतिक कुंड का निर्माण करता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस विशाल झरने का निर्माण महाभारत काल में स्वयं भीम ने किया था, जबकि वैज्ञानिक इसे पूरी तरह प्राकृतिक मानते हैं.

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रावतभाटा क्षेत्र में स्थित चूलिया और पड़ाझर महादेव झरने

राजस्थान के रावतभाटा इलाके में प्रकृति प्रेमियों के लिए दो बेहद शानदार झरने मौजूद हैं. इनमें से पहला चूलिया झरना है, जो सुप्रसिद्ध राणा प्रताप सागर बांध के बिल्कुल पास स्थित है. यह झरना अपनी अनोखी चट्टानी बनावट और सालभर बहने वाले तेज पानी के कारण जाना जाता है. वहीं दूसरा पड़ाझर महादेव झरना है, जो पूरी तरह घने जंगलों और बड़ी चट्टानों के बीच घिरा हुआ एक अत्यंत शांत स्थल है. यह झरना रामेश्वर महादेव गुफा मंदिर के पास बहता है, जहाँ लोग मानसिक शांति और सुकून के कुछ पल बिताने के लिए विशेष रूप से आते हैं.

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माउंट आबू के ध्रूड़िया और अलवर के गर्भाजी झरने

राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू अपनी ठंडी वादियों के लिए प्रसिद्ध है और इसी के घने जंगलों के बीच ध्रूड़िया झरना बहता है. इस झरने तक पहुँचने के लिए एडवेंचर के शौकीन लोगों को हरियाली के बीच से होते हुए एक कठिन ट्रेकिंग करनी पड़ती है. इसके विपरीत अलवर जिले में अरावली की शांत पहाड़ियों के बीच सिलीसेढ़ झील के पास गर्भाजी (गढ़वाजी) झरना स्थित है. इसे राजस्थान के छिपे हुए पर्यटन स्थलों में गिना जाता है, जहाँ ऊंचे पत्थरों से गिरता पानी और चारों तरफ फैले शांत जंगल सैलानियों का मन मोह लेते हैं.

झरनों की सैर करने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

मानसून के दौरान राजस्थान के ये सभी झरने अपने पूरे शबाब पर होते हैं और इनके आस-पास का पूरा इलाका हरी-भरी वादियों में तब्दील हो जाता है. हालांकि इस खुशनुमा मौसम में इन पर्यटन स्थलों पर जाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पहाड़ी रास्तों और चट्टानों पर अत्यधिक काई जमने के कारण फिसलन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे झरनों के तेज बहाव वाले पानी के बहुत नजदीक न जाएं और नीचे बने गहरे प्राकृतिक कुंडों में तैरने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं ताकि कोई अनहोनी न हो.

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Frequently Asked Questions

Ans: चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध मेनाल झरने को अक्सर राजस्थान का ‘मिनी नियाग्रा’ कहा जाता है.
Ans: भीमलत झरने की ऊंचाई करीब 150 फीट है और मान्यता के अनुसार इसका निर्माण महाभारत काल में भीम ने किया था.
Ans: चूलिया झरना रावतभाटा में राणा प्रताप सागर बांध के पास स्थित है और यहाँ पूरे साल पानी का तेज बहाव रहता है.
Ans: माउंट आबू के घने और खूबसूरत जंगलों के बीच ध्रूड़िया झरना स्थित है, जहाँ ट्रेकिंग करके पहुँचा जाता है.
Ans: अलवर का गर्भाजी झरना अरावली की पहाड़ियों में स्थित बेहद खूबसूरत सिलीसेढ़ झील के पास स्थित है.
First published on: Jun 30, 2026 01:13 PM

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About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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