एशिया का सबसे साफ गांव, लेकिन रविवार को टूरिस्टों के लिए रहता है बंद! आखिर ऐसा क्यों?

मावलिन्नोंग सिर्फ अपनी सफाई के लिए ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. ऐसे में अगर आप यहां घूमना चाहते हैं तो रविवार के दिन न जाएं, क्योंकि इस दिन पर्यटकों के लिए बंद रहता है.

why aias cleanest village bans tourist on sundays

एशिया के सबसे साफ गांव की पहचान. Image Credit- News24

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भारत में कई ऐसे गांव हैं जो अपनी खूबसूरती, संस्कृति और अनोखी परंपराओं के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. इन्हीं में से एक है मेघालय का मावलिन्नोंग है, जिसे एशिया के सबसे साफ-सुथरे गांवों में गिना जाता है. यहां की हर गली, घर और आसपास का इलाका बेहद साफ नजर आता है. लेकिन इस गांव की एक और खास बात है, जो लोगों को हैरान कर देती है. वो यह है कि यहां रविवार के दिन पर्यटकों को एंट्री नहीं मिलती. यानी यहां पर गौर लोगों का रविवार के दिन अंदर आना सख्त मना है. आखिर ऐसा रूल क्यों बनाया गया, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

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एशिया के सबसे साफ गांव की पहचान

मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में मौजूद मावलिन्नोंग गांव अपनी बेहतरीन सफाई व्यवस्था के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. यहां रहने वाले लोग सफाई को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा मानते हैं. इसलिए गांव की सड़कों पर जगह-जगह बांस से बने डस्टबिन रखे जाते हैं और हर इंसान सफाई बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाता है.

आखिर रविवार को क्यों रहता है बंद?

मावलिन्नोंग में रविवार को पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगाने का कारण यहां के लोगों की धार्मिक और सामाजिक परंपराएं हैं. गांव के ज्यादातर लोग ईसाई समुदाय से हैं और रविवार उनके लिए प्रार्थना, परिवार के साथ समय बिताने और एंजॉय करने का होता है. इसलिए इस दिन गांव के लोग चर्च जाते हैं, धार्मिक चीजों में हिस्सा लेते हैं और बाहरी भीड़ से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं.

साफ सफाई के लिए पूरे गांव की जिम्मेदारी

मावलिन्नोंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां सफाई की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे गांव की होती है. बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई अपने आसपास की सफाई का पूरा ध्यान रखता है. प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण बचाने के लिए भी गांव में कई नियम बनाए गए हैं.

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यहां पर्यटकों के लिए क्या है खास?

यह गांव बहुत ही खूबसूरत है और अपनी सुंदरता और हरियाली के लिए जाना जाता है. यहां पर घूमने के लिए बहुत कुछ है. आप लिविंग रूट ब्रिज को एक्सप्लोर करने के लिए जा सकते हैं. साथ ही, बांस से बने स्काई व्यू टॉवर से बांग्लादेश के मैदानी इलाकों का नजारा साफ दिखाई देता है.

घूमने जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान

  • रविवार के अलावा किसी और दिन घूमने का प्लान बनाएं. वरना आप परेशान हो जाएंगे और वापस आना पड़ सकता है.
  • गांव में सफाई से जुड़े नियमों का पालन करें और कूड़ा इधर उधर न फेंके. ऐसा करना खराब हो सकता है, लोग नाराज हो सकते हैं.
  • स्थानीय लोगों से दोस्ती बढ़ाएं और पूरे गांव की सैर करें. ऐसा करने से आपको घूमने में बहुत मजा आएगा.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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