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बच्चा बहुत जिद्दी हो तो क्या करें? यहां जानिए किस तरह बच्चे को जिद्द करने से रोका जा सकता है

Stubborn Kids: अगर आपका बच्चा भी बहुत ज्यादा जिद करता है तो यहां जानिए उसकी इस जिद करने की आदत को कैसे छुड़वाया जा सकता है. बच्चे को जिद्दी होने से रोकने में काम आएंगे ये पैरेंटिंग टिप्स.

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Parenting Tips: बच्चे अगर एक बार जिद्दी हो जाएं तो जबतक उनकी बात ना मान ली जाए तबतक पूरा घर सिर पर उठाए रखते हैं. जिद्दी बच्चों के सामने अक्सर ही माता-पिता को घुटने टेकने पड़ जाते हैं. कभी कुछ खाने की जिद तो कभी बाहर खेलने की या कुछ खरीदने की, बच्चों की जिद पूरी करते-करते पैरेंट्स बच्चों को अनजाने में ही इतना जिद्दी (Stubborn Kids) बना देते हैं कि बच्चे “ना” सुनने के आदी ही नहीं रहते हैं, बच्चों को हर समय अपनी जिद पूरी होते ही देखनी होती है. इस जिद को पूरा करने के लिए बच्चे कभी हाथ-पैर पटकने लगते हैं तो कभी लड़ना-झगड़ना शुरू कर देते हैं या जबतक जिद पूरी ना हो तबतक खाना-पीना छोड़ देते हैं. ऐसे में माता-पिता को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि वे जाने-अनजाने अपने बच्चों को जिद्दी ना बना दें. यहां जानिए बच्चा अगर जिद करता है तो क्या करें और बच्चे को जिद करने से कैसे रोकें.

बच्चा जिद करे तो क्या करें, जिद्दी बनने से कैसे रोकें

ना मानें सारी बातें

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बच्चे की हर बात मान जाने पर उसे हमेशा ही अपनी बात मनवाने की आदत हो जाती है. जो जिद सही ना हो उसे पूरा ना करें.

हर बात पर मना ना करें

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कई बार पैरेंट्स बच्चों की जरूरत या सही मांग भी नहीं सुनते हैं और उसे पहले ही मना कर देते हैं. ऐसा करने पर बच्चों को गुस्सा आने लगता है और वे जिद्दी बनना शुरू हो जाते हैं. उनकी हर बात काटी जाए तो बच्चे पैरेंट्स की बात मानना भी छोड़ देते हैं.

बच्चे की भावनाओं को भी समझें

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कई बार पैरेंट्स सिर्फ अपना पॉइंट ऑफ व्यू यानी अपना दृष्टिकोण ही देखते हैं और बच्चे के पॉइंट से समझना ही नहीं चाहते हैं. इससे बच्चे और पैरेंट्स के बीच सामंजस्य नहीं बैठ पाता है और बच्चे जिद्दी (Ziddi Bache) होने लगते हैं.

सबके लिए रूल्स हों बराबर

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बच्चे और बड़ों सभी के लिए उम्र के हिसाब से सही नियम सेट किए जाने जरूरी हैं. एक बच्चे का उदाहरण दूसरे को देना या किसी और के लिए बनाए गए नियमों को बच्चे पर थोपना सही नहीं है.

बैलेंस क्रिएट करें

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बच्चों को क्या खरीदकर देना है, उनकी क्या बात माननी है और क्या नहीं इसका ध्यान रखना जरूरी होता है. हर बात मान जाना और हर बात काट देना बच्चे को जिद्दी बना देता है.

बच्चे को दें चॉइस

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अगर बच्चा जिद करता है तो उसकी बात सरासर काटने के बजाय आप उसे चॉइस दे सकते हैं. बच्चे को किसी चीज के लिए मना किया जा रहा है तो आप कह सकते हैं कि तुम्हें एक दिन कुछ देर ज्यादा खेलने दिया जाएगा या अगली बार तुम अपनी पसंद के कपड़े खरीद सकते हो. छोटी-छोटी खुशियों से बच्चों को अच्छा महसूस होने लगता है और वे अपनी बात पर अड़े नहीं रहते हैं.

मजाक का सहारा लें

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बच्चा जिद करता है तो स्थिति अक्सर ही बहुत गंभीर हो जाती है और माता-पिता और बच्चों के बीच मनमुटाव तक हो जाता है. ऐसे में स्थिति को लाइट करने के लिए पैरेंट्स बच्चे से थोड़ा हंसी-मजाक कर सकते हैं. इससे होगा यह कि बच्चा उतना गंभीर नहीं रहेगा और अपनी जिद पर भी नहीं अड़ा रहेगा.

यह भी पढ़ें – बच्चे के लिए कैसे चुनें सही स्कूल? एडमिशन करवाने से पहले नोट कर लीजिए ये पॉइंट्स

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First published on: Mar 11, 2026 11:32 AM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती है. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं. अनुभव - 7 साल शिक्षा - जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पिछला अनुभव - NDTV, दिल्ली प्रेस, डायमंड पब्लिशिंग हाउस

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