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Newly Married Couples First Karwa Chauth: करवा चौथ का शुभ हिंदू त्योहार पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे कराका चतुर्थी या करवा चौथ के नाम से भी जाना जाता है, यह इस साल 1 नवंबर को पड़ रहा है। इसे कराका चतुर्थी या करवा चौथ के नाम से भी जाना जाता है, यह इस वर्ष 1 नवंबर को पड़ रहा है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए कठिन निर्जला व्रत (पानी और भोजन के बिना उपवास) रखकर इस त्योहार को मनाती हैं। वे चंद्रोदय (चंद्रमा उगने के बाद) छलनी से दर्शन करके और फिर उसमें से अपने पति को देखकर व्रत तोड़ती हैं। जिसके बाद पति पत्नी को खाने का एक निवाला और पानी का एक घूंट देता है। जहां यह व्रत सभी विवाहित महिलाओं के लिए बेहद खास है, वहीं यह नवविवाहित दुल्हनों के लिए भी विशेष महत्व रखता है जो अपना पहला करवा चौथ व्रत रख रही हैं, तो आज हम अपना पहला करवा चौथ कैसे मना सकते हैं, इस बारे में जानेंगे।
किसी भी विवाहित महिला के लिए पहला करवा चौथ बहुत महत्व रखता है। पति-पत्नी दोनों के परिवार वाले इसे एक खास दिन के रूप में देखते हैं। परिवार के सभी दोस्त और रिश्तेदार नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं देने आते हैं और दुल्हन को कई उपहार मिलते हैं। अगर आप अपना पहला करवा चौथ मना रही है तो नवविवाहित महिलाओं को इस दिन विशेष महसूस कराने के लिए अपने ससुराल और मायके से सोच-समझकर उपहार लेने चाहिए। नवविवाहित बहू को अपनी सास को खास तैयार किया गया बाया भी देना चाहिए जिसमें कपड़े, जेवर, खाने की साम्रागी और शादी का सामान हो। यह रस्म सास से आशीर्वाद पाने के लिए की जाती है।

सरगी त्योहार का एक और महत्वपूर्ण रस्म है। पहले करवा चौथ पर सास को अपने हाथों से अपनी बहू को सरगी देनी चाहिए। सरगी की थाली में फल, मठरी, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाने की चीजें होती हैं। सरगी को सूर्योदय (सूर्य उगने) से पहले सास और बहू दोनों को एक साथ खाना चाहिए।

नवविवाहित महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। फिर, उन्हें मंदिर की सफाई करनी चाहिए, दीया जलाना चाहिए, मां पार्वती, भगवान शिव, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए, निर्जला व्रत का संकल्प लेना चाहिए और करवा चौथ कथा सुननी चाहिए।

नवविवाहित दुल्हनों को पारंपरिक लाल कपड़े पहनने, सोलह श्रृंगार और हाथों और पैरों पर मेहंदी लगानी चाहिए। इन्हें काले, भूरे और सफेद रंग पहनने से बचना चाहिए। सफेद और काले रंग को जहां शुभ नहीं माना जाता वहीं भूरा रंग राहु और केतु की दशा को आगे लाता है। वे लाल रंग के अलावा लाल, गुलाबी, पीला, हरा और मैरून रंग पहन सकती हैं।

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