Travel Tips: राजस्थान में भी है हरियाली का खजाना, इन जगहों की खूबसूरती कर देगी हैरान

Rajasthan Places: राजस्थान का हर हिस्सा रेगिस्तान जैसा नहीं है, अरावली की पहाड़ियों से लेकर जंगलों और झीलों तक, यहां नेचुरल के कई अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं. इसलिए अगली बार राजस्थान घूमने जाएं तो सिर्फ किले और महल ही नहीं, इन जगहों को भी एक्सप्लोर करें. 

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राजस्थान में भी है हरियाली का खजाना. Image Credit- Freepik

राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर हमारे मन में रेगिस्तान, रेत के टीले, किले और राजसी महल की तस्वीर उभरती है. लेकिन राजस्थान सिर्फ रेगिस्तान ही मौजूद नहीं है. राज्य के कई हिस्सों में घने जंगल, झीलें, पहाड़ियां और हरे-भरे नेचुरल इलाके भी देखने को मिलते हैं. अगर आप राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं और इस बार कुछ अलग देखना चाहते हैं तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं. हालांकि, यहां पर जाने के लिए आपको अच्छा खासा बजट चाहिए होगा और अगर आप फैमिली के साथ जा सकते हैं तो थोड़ी प्लानिंग पहले से करनी होगी. 

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माउंट आबू

राजस्थान में हरियाली और पहाड़ों का एक्सपीरियंस है तो माउंट आबू एक अच्छा ऑप्शन  हो सकता है. यह राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है. यहां हरियाली से घिरी पहाड़ियां, झील और जंगल पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं. आप यहां पर नक्की झील, गुरु शिखर, सनसेट पॉइंट और माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं. 

  • कैसे जाएं– आबू रोड रेलवे स्टेशन से बस या टैक्सी लेकर माउंट आबू पहुंचा जा सकता है. सड़क मार्ग से भी यह दिल्ली, जयपुर, अजमेर और अहमदाबाद जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है.
  • कब जाएं– अगर आपका मकसद हरियाली देखना है तो मानसून के बाद यहां की पहाड़ियों और जंगलों का नजारा खास तौर पर खूबसूरत हो सकता है.
  • टिकट है या नहीं– माउंट आबू घूमने का टिकट नहीं है तो आप फ्री में इस जगह तो एक्सप्लोर कर सकते हैं.

सरिस्का टाइगर रिजर्व

अलवर जिले में स्थित सरिस्का अपने जंगल और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है. यहां अरावली की पहाड़ियों के बीच जंगल का अलग एक्सपीरियंस मिलता है. अगर आपको नेचुरल और वाइल्डलाइफ पसंद है तो यह जगह राजस्थान के अलग रूप से रूबरू करा सकती है. आप अपने पूरे परिवार के साथ यहां पर जाने का प्लान बना सकते हैं. 

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  • कैसे जाएं– सरिस्का, अलवर से करीब 35 किमी और दिल्ली से करीब 200 किमी दूर है  अलवर रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस लेकर पहुंच सकते हैं.
  • कब जाएं– घूमने के लिए नवंबर से मार्च का वक्त आरामदायक माना जाता है. वाइल्डलाइफ सफारी के लिए सुबह या शाम का समय बेहतर रहता है.
  • टिकट है या नहीं– सरिस्का में घूमने के लिए सफारी टिकट लेना पड़ता है. कैंटर सफारी की बुकिंग ऑनलाइन की जा सकती है और टिकट की कीमत सहुलियत के हिसाब से तय की जाती है. 

कुंभलगढ़

उदयपुर के आसपास घूमने का प्लान है तो कुंभलगढ़ को भी देखा जा सकता है. अरावली की पहाड़ियों में मौजूद यह जगह अपने ऐतिहासिक किले के साथ-साथ आसपास के नेचुरल माहौल के लिए भी जानी जाती है. बारिश के मौसम में यहां की पहाड़ियां और आसपास का इलाका खास तौर पर हरा-भरा दिखाई दे सकता है. 

  • कैसे जाएं- कुंभलगढ़ का किला उदयपुर से करीब 84 किमी दूर है. ऐसे में आप उदयपुर से बस या टैक्सी लेकर पहुंच सकते हैं, जबकि एयरपोर्ट उदयपुर से करीब 98 किमी दूर है. 
  • कब जाएं- अक्टूबर से मार्च तक का समय घूमने के लिए अच्छा माना जाता है. हालांकि, कुंभलगढ़ गर्मियों में भी बहुत ही अच्छा लगता है. आप किसी भी मौसम में प्लान बना सकते हैं. 
  • टिकट है या नहीं- कुंभलगढ़ में एंट्री के लिए टिकट लगता है. इसकी कीमत जानने के लिए काउंटर या आधिकारिक पोर्टल पर रेट चेक करना बेहतर है. 

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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