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वंदे मातरम का पूरा हिस्सा क्यों नहीं गाया जाता? जानिए बाकी अंतरे हटाने की वजह क्या थी

Vande Mataram: वंदे मातरम को लेकर हाल ही में नया कानून पास हुआ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे राष्ट्रीय गीत के पहले 2 ही छंदों को गाया जाता रहा है. आखिर इसके बाकी 4 अंतरे को क्यों हटाना पड़ा था, आइए इसका इतिहास जानते हैं.

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Rules For Singing Vande Mataram: देश के स्वतंत्रता दिवस जैसे नेशनल फेस्टिवल पर ‘वंदे मातरम’ की खास अहमियत है. 15 अगस्त 2026 को लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ बजाया गया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया गया. मशहूर लेखक और साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के रचे हुए ‘वंदे मातरम’ मूल रूप से 6 अंतरों का गीत है, लेकिन सार्वजनिक और आधिकारिक आयोजनों में आमतौर पर इसके शुरुआती 2 छंद ही गाए जाते हैं. आखिर ऐसा क्यों है?

धार्मिक संदर्भों के कारण हुआ बदलाव

‘वंदे मातरम’ के शुरुआती 2 अंतरों में भारत की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली, नदियों और मातृभूमि को लेकर श्रद्धा नजर आती है. हालांकि बाद के अंतरों में देवी दुर्गा और लक्ष्मी जैसे धार्मिक प्रतीकों के उल्लेख के साथ साहित्यिक कृति ‘आनंदमठ’ से जुड़े संदर्भ भी आते हैं.

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1937 के आसपास इन धार्मिक संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग सहित कुछ ग्रुप्स ने ऐतराज जताया था. उस वक्त स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समुदायों को एकसाथ रखने की चुनौती भी अहम थी. ऐसे में गीत के ऐसे हिस्से को सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल करने पर विचार किया गया, जिससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को लेकर विवाद न हो.

टैगोर और गांधी से ली गई सलाह

एक राय बनाने के मकसद से इंडियन नेशनल कांग्रेस ने इस विषय पर प्रमुख नेताओं से चर्चा की. रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी से भी परामर्श लिया गया. इसके बाद सार्वजनिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय त्यौहारों पर ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती 2 अंतरों के इस्तेमाल किया जाने लगा.

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इन दोनों अंतरों में किसी खास धार्मिक देवी-देवताओं का जिक्र नहीं होने के कारण उन्हें सभी के लिए बेहतर माना गया. इसका मदसद राष्ट्रीय गीत को लेकर विवाद से बचना और स्वतंत्रता आंदोलन में सभी समुदायों की एकता बनाए रखना था.

1950 में राष्ट्रीय गीत का दर्जा

भारत के संविधान लागू होने के समय राष्ट्रीय प्रतीकों की स्थिति भी साफ हुई. ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के तौर पर स्वीकार किया गया, जबकि ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती 2 छंदों को राष्ट्रीय गीत का सम्मान मिला. दोनों को राष्ट्रीय जीवन में बड़ा स्थान दिया गया.

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2026 में कानून में बड़ा बदलाव

जुलाई 2026 में संसद ने ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास किया. इसके जरिए ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है. नए प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत के गायन के दौरान जानबूझकर रुकावट डालना, शोर मचाना या उसका अपमान करना दंडनीय माना जाएगा.

क्या वंदे मातरम न गाने पर जेल होगी?

इस सवाल को लेकर भी भ्रम की स्थिति रही है. जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक सर्कुलर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी. 25 मार्च 2026 को अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित निर्देश सलाह और मार्गदर्शन के स्वरूप में हैं.

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इसलिए केवल ‘वंदे मातरम’ न गाने को अपने आप में अपराध नहीं माना गया है और इसके लिए अलग से जेल की सजा का प्रावधान नहीं है. कानूनी कार्रवाई का विषय मुख्य रूप से राष्ट्रगीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने से जुड़ा है.

पूरा वंदे मातरम

वंदे मातरम्.
सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्.
वंदे मातरम्.

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शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम्.
वंदे मातरम्.

कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
के बॉले मां तुमि अबले,
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्.
वंदे मातरम्.

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तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे.
वंदे मातरम् .

त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्.
वंदे मातरम्.

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First published on: Aug 16, 2026 05:28 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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