Xi Jinping India visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे. 12 और सितंबर को शी जिनपिंग भारत में रहेंगे. चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस बात की जानकारी साझा की है. इस घोषणा के बाद से दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन की बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे. भारत द्वारा आयोजित किए जा रहे इस सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा होगा, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और आपसी सहयोग के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
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2019 में हुआ था आखिरी भारत दौरा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आए थे. शी जिनपिंग ने 11 और 12 अक्टूबर 2019 को भारत का दौरा किया था. चीनी राष्ट्रपति के साथ लगभग 200 से कम अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. दोनों शीर्ष नेताओं के बीच उस दौरान कई अहम मुद्दों पर विस्तृत बातचीत हुई थी. अब 7 साल के लंबे अंतराल के बाद उनके इस नए दौरे पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के क्या मायने?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए भारत आना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ या ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है. जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन दोनों का भारत आना यह साबित करता है कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता. दुनिया के बड़े मंचों पर भारत, चीन और रूस का एक साथ बैठना पश्चिमी देशों को भी एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश देता है. गलवान हिंसा के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते पूरी तरह ठंडे बस्ते में चले गए थे. जिनपिंग का खुद दिल्ली आना यह दिखाता है कि दोनों देश अब बातचीत के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं. सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की पूरी संभावना है.