पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने पर अड़ गई हैं. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ममता बनर्जी ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, इस्तीफा देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. साथ ही उन्होंने कहा कि हम चुनाव नहीं हारे, यह हमें हराने की उनकी कोशिश है. चुनाव आयोग के जरिए वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हम चुनाव जीत गए हैं.
इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि अगर ममता बनर्जी राज्यपाल के पास जाकर इस्तीफा नहीं देती हैं तो पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा.
अब सवाल यह पैदा होता है कि अगर ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देती हैं तो क्या राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा? सवाल यह भी है कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार के पास क्या विकल्प बच जाते हैं.
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संविधान विशेषज्ञ अश्विनी दुबे का कहना है कि इस्तीफा देना संवैधानिक बाध्यता है. इस्तीफा नहीं देने पर संविधान के आर्टिकल 164 में ऐसा प्रावधान है कि गवर्नर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं. चुनाव के नतीजे आने के बाद मौजूदा सीएम को इस्तीफा इसलिए देना होता है, ताकि उनकी मंत्री परिषद का भंग किए जा सके. मंत्री परिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है. जैसे ही पिछली विधानसभा का कार्यकाल खत्म होता है, मंत्रिमंडल भी अनौपचारिक रूप से भंग हो जाती है. सीएम का इस्तीफा इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देता है.
साथ ही उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं हो सकता कि किसी ने इस्तीफा नहीं दिया तो वह वहां का जबरन मुख्यमंत्री बना रह सकता है. इस्तीफा नहीं देने पर राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को बुलाकर अपना नेता चुनने के लिए कह सकते हैं. इसके अलावा इस्तीफा नहीं देने वाले मुख्यमंत्री को हटाने का फैसला भी ले सकते हैं.
इसके अलावा राज्यपाल मुख्य सचिव, डीजीपी या लॉएंडऑर्डर एजेंसी को आदेश देकर उन्हें पद से हटाने के लिए कह सकते हैं.
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वहीं, इंडिया टुडे ने सीनियर वकील शेखर नफड़े के हवाले से लिखा है, उनके विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राज्यपाल विधानसभा को बर्खास्त कर सकते हैं और सरकार का टर्म खत्म हो जाएगा क्योंकि पांच साल का मैंडेट खत्म हो गया है.
नफड़े ने बताया, 'इलेक्शन कमीशन ने एक जरूरी नोटिफिकेशन जारी किया है. जब तक कोई कोर्ट मौजूद वजहों से चुनाव रद्द नहीं कर देता, हर कोई इलेक्शन कमीशन के बताए नतीजों को मानने के लिए मजबूर है. और इन हालात में, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना ही होगा.'
उन्होंने आगे कहा कि अगर वह नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो गवर्नर के पास संविधान के नियमों के मुताबिक, सरकार को बर्खास्त करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा.
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इंडिया टुडे ने एक और वकील पीडीटी आचार्य के हवाले से लिखा है कि अगर वह इस्तीफा नहीं भी देतीं, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि संविधान के मुताबिक, कोई सरकार पांच साल बाद नहीं चल सकती.
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी चुनाव को चुनौती देना चाहती हैं तो यह एक पोल पिटीशन के जरिए होगा जिस पर बाद में ही सुनवाई होगी. साथ ही कहा कि अगर वह कदम उठाया भी जाता है, तो भी वह CM नहीं रह सकतीं.
क्या बोलीं ममता बनर्जी?
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘विलेन’ बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी. चुनाव आयोग ने बीजेपी का साथ दिया, जिसकी वजह से उसने 100 सीटों को लूटा. पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर टीएमसी को हराने की साजिश की.
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साथ ही ममता ने कहा कि वो एक आजाद पंछी की तरह हैं और बंगाल के विकास के लिए काम करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने बंगाल के लोगों को टॉर्चर करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि वो बीजेपी के अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं करने वाली और जरूरत पड़ने पर सड़कों पर धरना देंगी.
राहुल गांधी-अखिलेश यादव का मिला साथ
ममता बनर्जी के इन आरोपों को लेकर उन्हें राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं का साथ मिला है. राहुल गांधी ने सोमवार को नतीजे जारी होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि असम और बंगाल के चुनाव में धांधली हुई है. धांधली किए जाने के साफ-साफ सबूत हैं. चुनाव आयोग की मदद से भाजपा ने चुनाव चुराया है. ममता बनर्जी की बात से सहमत हैं, बंगाल में 100 सीटें चुराई गई है. हमने ये रणनीति पहले भी देखी है. 2024 में एमपी, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ. चुनाव चोरी, संस्था चोरी और अब चारा ही क्या है. कुछ लोग टीएमसी की हार पर खुशी मना रहे हैं, असम-बंगाल में भाजपा ने जनादेश चोरी किया है. लोकतंत्र को नष्ट करने का कदम उठाया है. ये एक पार्टी या दूसरी पार्टी का मसला नहीं है, ये भारत का मामला है.
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राहुल गांधी के अलावा अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाएंगे क्या? राजनीतिक इतिहास का घनघोर काला दिन. पूरा देश आक्रोशित है और लोकतंत्र दुखी है. सुरक्षा के नाम पर केंद्रीय बलों का मिसयूज हुआ. मतगणना के दौरान ये मिसयूज हुआ. 2022 के यूपी चुनाव में भी ये घपला किया था. सब जानते हैं कि सच क्या है, और क्या हुआ है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने पर अड़ गई हैं. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ममता बनर्जी ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, इस्तीफा देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. साथ ही उन्होंने कहा कि हम चुनाव नहीं हारे, यह हमें हराने की उनकी कोशिश है. चुनाव आयोग के जरिए वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हम चुनाव जीत गए हैं.
इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि अगर ममता बनर्जी राज्यपाल के पास जाकर इस्तीफा नहीं देती हैं तो पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा.
अब सवाल यह पैदा होता है कि अगर ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देती हैं तो क्या राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा? सवाल यह भी है कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार के पास क्या विकल्प बच जाते हैं.
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संविधान विशेषज्ञ अश्विनी दुबे का कहना है कि इस्तीफा देना संवैधानिक बाध्यता है. इस्तीफा नहीं देने पर संविधान के आर्टिकल 164 में ऐसा प्रावधान है कि गवर्नर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं. चुनाव के नतीजे आने के बाद मौजूदा सीएम को इस्तीफा इसलिए देना होता है, ताकि उनकी मंत्री परिषद का भंग किए जा सके. मंत्री परिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है. जैसे ही पिछली विधानसभा का कार्यकाल खत्म होता है, मंत्रिमंडल भी अनौपचारिक रूप से भंग हो जाती है. सीएम का इस्तीफा इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देता है.
साथ ही उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं हो सकता कि किसी ने इस्तीफा नहीं दिया तो वह वहां का जबरन मुख्यमंत्री बना रह सकता है. इस्तीफा नहीं देने पर राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को बुलाकर अपना नेता चुनने के लिए कह सकते हैं. इसके अलावा इस्तीफा नहीं देने वाले मुख्यमंत्री को हटाने का फैसला भी ले सकते हैं.
इसके अलावा राज्यपाल मुख्य सचिव, डीजीपी या लॉएंडऑर्डर एजेंसी को आदेश देकर उन्हें पद से हटाने के लिए कह सकते हैं.
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वहीं, इंडिया टुडे ने सीनियर वकील शेखर नफड़े के हवाले से लिखा है, उनके विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राज्यपाल विधानसभा को बर्खास्त कर सकते हैं और सरकार का टर्म खत्म हो जाएगा क्योंकि पांच साल का मैंडेट खत्म हो गया है.
नफड़े ने बताया, ‘इलेक्शन कमीशन ने एक जरूरी नोटिफिकेशन जारी किया है. जब तक कोई कोर्ट मौजूद वजहों से चुनाव रद्द नहीं कर देता, हर कोई इलेक्शन कमीशन के बताए नतीजों को मानने के लिए मजबूर है. और इन हालात में, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना ही होगा.’
उन्होंने आगे कहा कि अगर वह नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो गवर्नर के पास संविधान के नियमों के मुताबिक, सरकार को बर्खास्त करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा.
यह भी पढ़ें : क्यों दक्षिण का अभिनेता बन जाता है CM और भोजपुरी का स्टार भीड़ तक रह जाता है सीमित
इंडिया टुडे ने एक और वकील पीडीटी आचार्य के हवाले से लिखा है कि अगर वह इस्तीफा नहीं भी देतीं, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि संविधान के मुताबिक, कोई सरकार पांच साल बाद नहीं चल सकती.
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी चुनाव को चुनौती देना चाहती हैं तो यह एक पोल पिटीशन के जरिए होगा जिस पर बाद में ही सुनवाई होगी. साथ ही कहा कि अगर वह कदम उठाया भी जाता है, तो भी वह CM नहीं रह सकतीं.
क्या बोलीं ममता बनर्जी?
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘विलेन’ बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी. चुनाव आयोग ने बीजेपी का साथ दिया, जिसकी वजह से उसने 100 सीटों को लूटा. पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर टीएमसी को हराने की साजिश की.
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साथ ही ममता ने कहा कि वो एक आजाद पंछी की तरह हैं और बंगाल के विकास के लिए काम करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने बंगाल के लोगों को टॉर्चर करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि वो बीजेपी के अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं करने वाली और जरूरत पड़ने पर सड़कों पर धरना देंगी.
राहुल गांधी-अखिलेश यादव का मिला साथ
ममता बनर्जी के इन आरोपों को लेकर उन्हें राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं का साथ मिला है. राहुल गांधी ने सोमवार को नतीजे जारी होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि असम और बंगाल के चुनाव में धांधली हुई है. धांधली किए जाने के साफ-साफ सबूत हैं. चुनाव आयोग की मदद से भाजपा ने चुनाव चुराया है. ममता बनर्जी की बात से सहमत हैं, बंगाल में 100 सीटें चुराई गई है. हमने ये रणनीति पहले भी देखी है. 2024 में एमपी, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ. चुनाव चोरी, संस्था चोरी और अब चारा ही क्या है. कुछ लोग टीएमसी की हार पर खुशी मना रहे हैं, असम-बंगाल में भाजपा ने जनादेश चोरी किया है. लोकतंत्र को नष्ट करने का कदम उठाया है. ये एक पार्टी या दूसरी पार्टी का मसला नहीं है, ये भारत का मामला है.
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राहुल गांधी के अलावा अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाएंगे क्या? राजनीतिक इतिहास का घनघोर काला दिन. पूरा देश आक्रोशित है और लोकतंत्र दुखी है. सुरक्षा के नाम पर केंद्रीय बलों का मिसयूज हुआ. मतगणना के दौरान ये मिसयूज हुआ. 2022 के यूपी चुनाव में भी ये घपला किया था. सब जानते हैं कि सच क्या है, और क्या हुआ है.